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केतु महादशा में मंगल अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय

केतु महादशा में मंगल अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप

विंशोत्तरी क्रम में केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है — यह काल मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर मंगल की अंतर्दशा 4 माह 27 दिन की होती है (सूत्र: 7×7÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय मंगल (भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद) तय करता है।

महादशा-स्वामी केतु के अध्याय में मंगल अपने कारकत्व — भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद — के विषय सामने लाता है। दोनों की नैसर्गिक मैत्री से यह अवधि प्रायः सहयोगी रहती है।

फल कैसे पढ़ें — असली नियम

फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: मंगल जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; केतु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।

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इस अवधि के सामान्य उपाय

मंगल (अंतर्दशा-स्वामी): मंगल को बल/शांति देने हेतु मंगलवार व्रत, हनुमान-चालीसा पाठ, 'ॐ अंगारकाय नमः' जप तथा हनुमान-पूजन श्रेष्ठ है। रत्न मूँगा (Red Coral) ताँबे/सोने में, अनामिका में, मंगलवार धारण किया जाता है। मसूर-दाल, लाल वस्त्र व गुड़ का दान तथा क्रोध-प्रबंधन विशेष लाभकारी है; मांगलिक-दोष हेतु कुंभ-विवाह आदि परिहार शास्त्र-सम्मत हैं।

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