पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का द्वितीय चरण कुंभ राशि के 23°20′ से 26°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृषभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।
नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
वृषभ-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पूर्वा भाद्रपद के जातक तीव्र संकल्प, आदर्शवाद और परिवर्तनकारी विचारों वाले होते हैं — अजैकपाद का नक्षत्र तप की अग्नि रखता है। साधारण जीवन इन्हें रुचता नहीं; कोई बड़ा उद्देश्य चाहिए। भीतर का उग्र-आवेश सृजन में लगे तो युग बदलते हैं। चरम-विचारों से सावधान रहें।
चरण-विशेष: वृषभ नवांश की पृथ्वी-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «सो» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पूर्वा भाद्रपद के चारों चरणों के अक्षर: से, सो, दा, दी)
करियर-दिशा
समाज-सुधार, लेखन-विचारधारा, research, अध्यात्म, वित्त (जोखिम-प्रबंधन) व mission-प्रधान संस्थाएँ पूर्वा भाद्रपद के क्षेत्र हैं। ये विचारों से आग लगा सकते हैं — दिशा शुभ रखें। उद्देश्य मिल जाए तो थकान इन्हें छू नहीं पाती।
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