🌳 ग्रह-फल

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का तृतीय चरण कुंभ राशि के 26°40′ से 0°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।

नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

मिथुन-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

पूर्वा भाद्रपद के जातक तीव्र संकल्प, आदर्शवाद और परिवर्तनकारी विचारों वाले होते हैं — अजैकपाद का नक्षत्र तप की अग्नि रखता है। साधारण जीवन इन्हें रुचता नहीं; कोई बड़ा उद्देश्य चाहिए। भीतर का उग्र-आवेश सृजन में लगे तो युग बदलते हैं। चरम-विचारों से सावधान रहें।

चरण-विशेष: मिथुन नवांश की वायु-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «दा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पूर्वा भाद्रपद के चारों चरणों के अक्षर: से, सो, दा, दी)

करियर-दिशा

समाज-सुधार, लेखन-विचारधारा, research, अध्यात्म, वित्त (जोखिम-प्रबंधन) व mission-प्रधान संस्थाएँ पूर्वा भाद्रपद के क्षेत्र हैं। ये विचारों से आग लगा सकते हैं — दिशा शुभ रखें। उद्देश्य मिल जाए तो थकान इन्हें छू नहीं पाती।

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