पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का चतुर्थ चरण मीन राशि के 0°00′ से 3°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कर्क नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी चंद्र है।
नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी चंद्र परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
कर्क-नवांश का रंग: मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पूर्वा भाद्रपद के जातक तीव्र संकल्प, आदर्शवाद और परिवर्तनकारी विचारों वाले होते हैं — अजैकपाद का नक्षत्र तप की अग्नि रखता है। साधारण जीवन इन्हें रुचता नहीं; कोई बड़ा उद्देश्य चाहिए। भीतर का उग्र-आवेश सृजन में लगे तो युग बदलते हैं। चरम-विचारों से सावधान रहें।
चरण-विशेष: कर्क नवांश की जल-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «दी» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पूर्वा भाद्रपद के चारों चरणों के अक्षर: से, सो, दा, दी)
करियर-दिशा
समाज-सुधार, लेखन-विचारधारा, research, अध्यात्म, वित्त (जोखिम-प्रबंधन) व mission-प्रधान संस्थाएँ पूर्वा भाद्रपद के क्षेत्र हैं। ये विचारों से आग लगा सकते हैं — दिशा शुभ रखें। उद्देश्य मिल जाए तो थकान इन्हें छू नहीं पाती।
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