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राहु महादशा में मंगल अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय

राहु महादशा में मंगल अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप

विंशोत्तरी क्रम में राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है — यह काल माया, विदेश, तकनीक, अचानक घटनाएँ, भ्रम, महत्वाकांक्षा के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर मंगल की अंतर्दशा 1 वर्ष 18 दिन की होती है (सूत्र: 18×7÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय मंगल (भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद) तय करता है।

महादशा-स्वामी राहु के अध्याय में मंगल अपने कारकत्व — भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद — के विषय सामने लाता है। राहु मंगल को शत्रु मानता है — अवधि में खींचतान/मत-परिवर्तन सामान्य है; धैर्य रखें।

दशा-संधि की अंतिम अंतर्दशा

मंगल की यह अंतर्दशा राहु-महादशा की अंतिम अंतर्दशा है — इसके बाद महादशा ही बदल जाती है। परंपरा दशा-संधि को संवेदनशील काल मानती है: पुराना अध्याय समेटने और नए की तैयारी का समय — बड़े जोखिम टालें, लंबित काम निपटाएँ।

फल कैसे पढ़ें — असली नियम

फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: मंगल जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; राहु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।

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इस अवधि के सामान्य उपाय

मंगल (अंतर्दशा-स्वामी): मंगल को बल/शांति देने हेतु मंगलवार व्रत, हनुमान-चालीसा पाठ, 'ॐ अंगारकाय नमः' जप तथा हनुमान-पूजन श्रेष्ठ है। रत्न मूँगा (Red Coral) ताँबे/सोने में, अनामिका में, मंगलवार धारण किया जाता है। मसूर-दाल, लाल वस्त्र व गुड़ का दान तथा क्रोध-प्रबंधन विशेष लाभकारी है; मांगलिक-दोष हेतु कुंभ-विवाह आदि परिहार शास्त्र-सम्मत हैं।

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