🌳 ग्रह-फल

शतभिषा नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

शतभिषा नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश

शतभिषा नक्षत्र का द्वितीय चरण कुंभ राशि के 10°00′ से 13°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मकर नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।

नक्षत्र-स्वामी राहु और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।

मकर-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

शतभिषा के जातक रहस्य-भेदी, एकांत-प्रिय, स्वतंत्र विचारक और उपचार-शक्ति वाले होते हैं — वरुण का नक्षत्र 'सौ वैद्यों' की क्षमता रखता है। भीड़ से अलग, अपनी ही धुन में गहरे उतरते हैं। सागर-सा व्यक्तित्व: ऊपर शांत, भीतर अथाह। भावनाएँ बाँटना सीखें।

चरण-विशेष: मकर नवांश की पृथ्वी-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «सा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (शतभिषा के चारों चरणों के अक्षर: गो, सा, सी, सू)

करियर-दिशा

चिकित्सा-अनुसंधान, ज्योतिष-रहस्यविद्या, technology, समुद्र/रसायन/औषधि-उद्योग व एकांत-साधना वाले क्षेत्र शतभिषा को फलते हैं। असाध्य समस्याओं के समाधान इन्हीं से निकलते हैं। टीम से न्यूनतम-संवाद बनाए रखें — प्रतिभा दिखेगी तभी सराही जाएगी।

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