शतभिषा नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
शतभिषा नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
शतभिषा नक्षत्र का चतुर्थ चरण कुंभ राशि के 16°40′ से 20°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मीन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी गुरु है।
नक्षत्र-स्वामी राहु और चरण (नवांश) का स्वामी गुरु परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
मीन-नवांश का रंग: ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन, भाग्य, विवेक के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
शतभिषा के जातक रहस्य-भेदी, एकांत-प्रिय, स्वतंत्र विचारक और उपचार-शक्ति वाले होते हैं — वरुण का नक्षत्र 'सौ वैद्यों' की क्षमता रखता है। भीड़ से अलग, अपनी ही धुन में गहरे उतरते हैं। सागर-सा व्यक्तित्व: ऊपर शांत, भीतर अथाह। भावनाएँ बाँटना सीखें।
चरण-विशेष: मीन नवांश की जल-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «सू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (शतभिषा के चारों चरणों के अक्षर: गो, सा, सी, सू)
करियर-दिशा
चिकित्सा-अनुसंधान, ज्योतिष-रहस्यविद्या, technology, समुद्र/रसायन/औषधि-उद्योग व एकांत-साधना वाले क्षेत्र शतभिषा को फलते हैं। असाध्य समस्याओं के समाधान इन्हीं से निकलते हैं। टीम से न्यूनतम-संवाद बनाए रखें — प्रतिभा दिखेगी तभी सराही जाएगी।
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