शतभिषा नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
शतभिषा नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश
शतभिषा नक्षत्र का तृतीय चरण कुंभ राशि के 13°20′ से 16°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कुंभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।
नक्षत्र-स्वामी राहु और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
कुंभ-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
शतभिषा के जातक रहस्य-भेदी, एकांत-प्रिय, स्वतंत्र विचारक और उपचार-शक्ति वाले होते हैं — वरुण का नक्षत्र 'सौ वैद्यों' की क्षमता रखता है। भीड़ से अलग, अपनी ही धुन में गहरे उतरते हैं। सागर-सा व्यक्तित्व: ऊपर शांत, भीतर अथाह। भावनाएँ बाँटना सीखें।
चरण-विशेष: कुंभ नवांश की वायु-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «सी» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (शतभिषा के चारों चरणों के अक्षर: गो, सा, सी, सू)
करियर-दिशा
चिकित्सा-अनुसंधान, ज्योतिष-रहस्यविद्या, technology, समुद्र/रसायन/औषधि-उद्योग व एकांत-साधना वाले क्षेत्र शतभिषा को फलते हैं। असाध्य समस्याओं के समाधान इन्हीं से निकलते हैं। टीम से न्यूनतम-संवाद बनाए रखें — प्रतिभा दिखेगी तभी सराही जाएगी।
यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।
निःशुल्क कुंडली बनाएँ →शतभिषा नक्षत्र का पूर्ण परिचय · नक्षत्र-स्वामी राहु का परिचय · अपना जन्म-नक्षत्र व चरण जानें (निःशुल्क) · नवांश (D9) क्या है · राशि-नक्षत्र अनुसार बच्चों के नाम