🌳 ग्रह-फल

सूर्य महादशा में केतु अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय

सूर्य महादशा में केतु अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप

विंशोत्तरी क्रम में सूर्य की महादशा 6 वर्ष चलती है — यह काल आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर केतु की अंतर्दशा 4 माह 6 दिन की होती है (सूत्र: 6×7÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय केतु (मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान) तय करता है।

महादशा-स्वामी सूर्य के अध्याय में केतु अपने कारकत्व — मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान — के विषय सामने लाता है। सम-सम्बन्ध से फल मिश्रित रहता है — निर्णायक भूमिका कुंडली में दोनों की स्थिति की है।

फल कैसे पढ़ें — असली नियम

फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: केतु जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; सूर्य की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।

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इस अवधि के सामान्य उपाय

केतु (अंतर्दशा-स्वामी): केतु को शांत करने हेतु 'ॐ कें केतवे नमः' जप, गणेश-पूजन तथा भैरव/शिव-आराधना श्रेष्ठ है। रत्न लहसुनिया (Cat's Eye) चाँदी/पंचधातु में — तीव्र-प्रभावी, अतः बिना परामर्श न धारण करें। कुत्ते को भोजन, कंबल/तिल का दान, गणेश-आराधना तथा अध्यात्म-साधना विशेष लाभकारी है।

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