| तारीख | संकष्टी चतुर्थी | तिथि | चंद्रोदय |
|---|---|---|---|
| मंगलवार, 6 जनवरी 2026 | लंबोदर (सकट) संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 6 जनवरी, 5:32 AM → 7 जनवरी, 4:23 AM | 🌙 चंद्रोदय 8:20 PM |
| गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026 | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी | 4 फ़रवरी, 9:40 PM → 5 फ़रवरी, 9:53 PM | 🌙 चंद्रोदय 8:55 PM |
| शुक्रवार, 6 मार्च 2026 | भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी | 5 मार्च, 2:34 PM → 7 मार्च, 4:48 PM | 🌙 चंद्रोदय 8:31 PM |
| रविवार, 5 अप्रैल 2026 | विकट संकष्टी चतुर्थी | 4 अप्रैल, 7:40 AM → 6 अप्रैल, 11:41 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:07 PM |
| मंगलवार, 5 मई 2026 | एकदंत संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 5 मई, 2:55 AM → 6 मई, 5:22 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:41 PM |
| बुधवार, 3 जून 2026 | कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी | 2 जून, 4:32 PM → 4 जून, 9:01 PM | 🌙 चंद्रोदय 9:11 PM |
| शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 | कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी | 2 जुलाई, 7:08 AM → 4 जुलाई, 10:10 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:03 PM |
| रविवार, 2 अगस्त 2026 | गजानन संकष्टी चतुर्थी | 1 अगस्त, 8:38 PM → 2 अगस्त, 8:46 PM | 🌙 चंद्रोदय 8:40 PM |
| सोमवार, 31 अगस्त 2026 | हेरम्ब (बहुला) संकष्टी चतुर्थी | 30 अगस्त, 7:08 AM → 1 सितंबर, 5:12 AM | 🌙 चंद्रोदय 7:48 PM |
| मंगलवार, 29 सितंबर 2026 | विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 28 सितंबर, 4:44 PM → 30 सितंबर, 12:26 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:07 PM |
| गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी | 28 अक्टूबर, 10:37 PM → 29 अक्टूबर, 7:41 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:44 PM |
| शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 | गणाधिप संकष्टी चतुर्थी | 26 नवंबर, 10:46 AM → 28 नवंबर, 4:10 AM | 🌙 चंद्रोदय 7:44 PM |
| शनिवार, 26 दिसंबर 2026 | आखुरथ संकष्टी चतुर्थी | 25 दिसंबर, 8:56 PM → 27 दिसंबर, 2:44 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:42 PM |
स्थानीय चंद्रोदय पर कृष्ण चतुर्थी; किसी दिन न हो तो उदया-तिथि का दिन।
गणेश-पुराण/नारद-पुराण: कृष्ण चतुर्थी को गणेश-व्रत व चंद्र-अर्घ्य से संकट-नाश, ऋण-मुक्ति, विघ्न-निवारण, संतान-सुख; चंद्रमा को गणेश ने कलंक का शाप देकर संकष्टी पर उसी को अर्घ्य का विधान दिया — चंद्र-दर्शन के बिना संकष्टी पूरी नहीं (विनायक चतुर्थी पर उल्टा — चंद्र-दर्शन वर्जित)।
अंगारकी संकष्टी: मंगल (अंगारक) ने गणेश की तपस्या कर वरदान पाया कि मंगलवार की संकष्टी उनके नाम से हो और उसका फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर — इसलिए महाराष्ट्र-कर्नाटक में अंगारकी पर मंदिरों में लाखों (सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, दगडूशेठ)। संकष्टी की तिथि चंद्रोदय-व्यापिनी — जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी हो; विनायक की मध्याह्न-व्यापिनी।
क़तर (दोहा) में 13। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
दोहा के लिए 13 में से 0 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
संकष्टी = कृष्ण पक्ष चतुर्थी (पूर्णिमा के बाद) — व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय, चाँद को अर्घ्य देकर पारण, संकट-निवारण; विनायक = शुक्ल पक्ष चतुर्थी (अमावस्या के बाद) — दोपहर में पूजा, चाँद न देखें (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ; ऊपर सूची में दोनों।
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारक (मंगल) की तपस्या से गणेश का वर कि मंगलवार की संकष्टी का फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर; साल में 1-3 बार; महाराष्ट्र में लाखों उपवास व मंदिर-कतार; मंगल-दोष वालों के लिए विशेष; ऊपर सूची में «(अंगारकी)» लिखा मिलेगा।
चंद्रोदय-समय (ऊपर) के बाद चाँद की दिशा (पूर्व) में अर्घ्य दें या थाली में दर्पण/जल में प्रतिबिंब मानकर — पारण मान्य; व्रत पूरा; रात बहुत देर न करें; चंद्रोदय बहुत देर (10 बजे बाद) हो तो रोगी-गर्भवती पहले फलाहार लें।