हर तिथि के साथ वह सटीक समय है जब शुभ नक्षत्र, तिथि और पंचांग के बाक़ी अंग साथ हों — बर्मिंघम के स्थानीय समय (BST, DST सहित) में, बर्मिंघम के अपने सूर्योदय से, प्रकाशित पंचांगों से मिलाए शास्त्रीय नियमों पर। गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास आदि वर्जित काल पहले ही हटा दिए गए हैं।
जनवरी 2फ़रवरी 5मार्च 6अप्रैल 4मई 5जून 6जुलाई 4अगस्त 0सितंबर 0अक्टूबर 0नवंबर 0दिसंबर 0
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 20 जनवरी बुधवार | 08:06 AM – 10:47 AM | मृगशिरा | त्रयोदशी | मिथुन |
| 28 जनवरी गुरुवार | 07:56 AM – 10:33 PM | चित्रा, स्वाती | सप्तमी | तुला |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 1 फ़रवरी सोमवार | 07:50 AM – 03:51 AM, 2 फ़र | ज्येष्ठा | एकादशी | वृश्चिक |
| 8 फ़रवरी सोमवार | 07:38 AM – 08:26 PM | शतभिषा | द्वितीया, तृतीया | कुंभ |
| 18 फ़रवरी गुरुवार | 08:58 AM – 05:44 AM, 19 फ़र | पुनर्वसु, पुष्य | त्रयोदशी | मिथुन → कर्क (10:12 AM) |
| 24 फ़रवरी बुधवार | 03:10 PM – 07:03 AM, 25 फ़र | चित्रा, स्वाती | पंचमी | कन्या → तुला (04:00 PM) |
| 25 फ़रवरी गुरुवार | 07:03 AM – 02:48 PM | स्वाती | पंचमी | तुला |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 5 मार्च शुक्रवार | 06:46 AM – 06:34 AM, 6 मार्च | श्रवण, धनिष्ठा | त्रयोदशी | मकर |
| 11 मार्च गुरुवार | 06:32 AM – 10:07 AM | अश्विनी | तृतीया | मेष |
| 17 मार्च बुधवार | 06:18 AM – 06:16 AM, 18 मार्च | पुनर्वसु, पुष्य | दशमी, एकादशी | मिथुन → कर्क (06:02 PM) |
| 18 मार्च गुरुवार | 06:16 AM – 08:21 PM | पुष्य | एकादशी | कर्क |
| 24 मार्च बुधवार | 06:02 AM – 05:59 AM, 25 मार्च | चित्रा, स्वाती | द्वितीया, तृतीया | तुला |
| 25 मार्च गुरुवार | 05:59 AM – 07:08 AM | स्वाती | तृतीया | तुला |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 1 अप्रैल गुरुवार | 06:43 AM – 06:40 AM, 2 अप्रैल | श्रवण | दशमी, एकादशी | मकर |
| 2 अप्रैल शुक्रवार | 06:40 AM – 10:22 PM | श्रवण, धनिष्ठा | एकादशी | मकर → कुंभ (09:02 PM) |
| 8 अप्रैल गुरुवार | 06:27 AM – 01:29 PM | अश्विनी | द्वितीया | मेष |
| 30 अप्रैल शुक्रवार | 12:44 PM – 05:37 AM, 1 मई | धनिष्ठा, शतभिषा | दशमी | कुंभ |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 10 मई सोमवार | 01:38 PM – 11:18 PM | पुनर्वसु | पंचमी | मिथुन |
| 12 मई बुधवार | 05:17 AM – 10:25 AM | पुष्य | सप्तमी | कर्क |
| 17 मई सोमवार | 11:58 AM – 05:08 AM, 18 मई | चित्रा | त्रयोदशी | कन्या → तुला (07:03 PM) |
| 21 मई शुक्रवार | 12:53 PM – 05:02 AM, 22 मई | ज्येष्ठा | द्वितीया | वृश्चिक |
| 27 मई गुरुवार | 04:56 AM – 01:56 AM, 28 मई | धनिष्ठा | सप्तमी | मकर → कुंभ (01:19 PM) |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 2 जून बुधवार | 04:50 AM – 07:46 AM | अश्विनी | त्रयोदशी | मेष |
| 7 जून सोमवार | 04:47 AM – 10:56 AM | पुनर्वसु | तृतीया | मिथुन |
| 14 जून सोमवार | 04:45 AM – 09:38 PM | चित्रा, स्वाती | एकादशी | तुला |
| 23 जून बुधवार | 11:13 AM – 04:45 AM, 24 जून | धनिष्ठा | पंचमी | मकर → कुंभ (08:20 PM) |
| 24 जून गुरुवार | 04:45 AM – 01:40 PM | धनिष्ठा, शतभिषा | पंचमी | कुंभ |
| 28 जून सोमवार | 06:19 PM – 04:48 AM, 29 जून | अश्विनी | दशमी | मेष |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 5 जुलाई सोमवार | 04:52 AM – 02:03 AM, 6 जुल | पुष्य | द्वितीया, तृतीया | कर्क |
| 9 जुलाई शुक्रवार | 06:45 PM – 04:57 AM, 10 जुल | हस्त | सप्तमी | कन्या |
| 12 जुलाई सोमवार | 07:11 AM – 07:26 PM | स्वाती | दशमी | तुला |
| 15 जुलाई गुरुवार | 10:11 AM – 01:09 AM, 16 जुल | ज्येष्ठा | त्रयोदशी | वृश्चिक |
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
मुंडन (चूड़ाकरण) में जन्म के बाल उतारकर शिशु को गर्भ-संस्कारों से मुक्त किया जाता है — कोमल शिशु का कर्म है, इसलिए दिन की शुद्धि के साथ मौसम और शिशु का स्वास्थ्य भी देखा जाता है।
परम्परा में विषम वर्ष — पहले, तीसरे, पाँचवें या सातवें वर्ष में मुंडन श्रेष्ठ। उत्तरायण-काल व माघ से ज्येष्ठ तक के मास अनुकूल; चातुर्मास प्रायः टाला जाता है।
मुंडन-नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा व रेवती। वारों में सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार शुभ; मंगल-शनि टालें।
जन्म-मास में और माता को पाँचवाँ मास (गर्भ) चल रहा हो तो कई परम्पराएँ मुंडन टालती हैं; भद्रा, अमावस्या, रिक्ता तिथियाँ व राहुकाल सदा वर्जित। तीर्थ (जैसे त्रिवेणी, विंध्यवासिनी) में कुल-परम्परा से हो तो वहीं की विधि मान्य।
मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय की तिथि-नक्षत्र और उस दिन के चौघड़िया पर टिका है, जो बर्मिंघम के अपने दिन के भाग हैं। बर्मिंघम का सूर्योदय भारत से घंटों बाद होता है, बीच में तिथि बदल सकती है — इसीलिए तारीख़ भारतीय पंचांग से एक दिन अलग हो सकती है।
बर्मिंघम का स्थानीय समय (BST), DST अपने-आप लागू।
नहीं — ये बर्मिंघम के पंचांग-शुद्ध दिन हैं। अंतिम तिथि संबंधित व्यक्तियों की कुंडली (चंद्रबल, ताराबल, चालू दशा) मिलाकर ही पक्की करें — मुहूर्त-उपकरण में जन्म-विवरण दें या ज्योतिषी से पूछें।
विषम वर्ष लगते ही (जैसे तीसरा वर्ष शुरू होने पर) शुभ नक्षत्र-दिन में करें — ठीक जन्म-तिथि का आग्रह नहीं, शुद्ध मुहूर्त का है।
कई कुलों में हाँ (चूड़ाकरण सबका संस्कार है), कई में नहीं — यह कुल-परम्परा का विषय है, शास्त्र दोनों को मान देता है।
परम्परा में बाल जल-प्रवाह या तीर्थ में अर्पित किए जाते हैं — अपने पुरोहित की बताई विधि मानें।