🏹 विजयादशमी (दशहरा) व्रत कथा
कथा
श्रीराम ने वनवास में सीता-हरण के बाद लंका पर चढ़ाई की। युद्ध से पहले उन्होंने नौ दिन शक्ति की आराधना की, और दसवें दिन अहंकारी रावण का वध किया — इसीलिए इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। पुतले का जलना हमारे भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्ष्या, आलस्य, हिंसा, छल और अधर्म — रावण के दस सिरों — को जलाने का प्रतीक है।
दूसरी कथा माँ दुर्गा और महिषासुर की है — नौ दिन के युद्ध के बाद दशमी को माँ ने महिषासुर का वध किया, इसीलिए विजया-दशमी। बंगाल में इसी दिन माँ की प्रतिमा का विसर्जन है — माँ मायके (धरती) से ससुराल (कैलाश) लौटती हैं, इसलिए विदाई के आँसू और सिंदूर-खेला।
शमी-पूजा की कथा महाभारत से है — अज्ञातवास में पांडवों ने अपने अस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे और वर्ष पूरा होने पर विजयादशमी को ही उन्हें उतारकर पूजा की, फिर कौरवों पर विजय पाई। रघु-कौत्स की कथा में इसी दिन शमी वृक्ष से स्वर्ण-मुद्राएँ बरसीं — इसलिए महाराष्ट्र में आपटा/शमी के पत्ते «सोना» कहकर बाँटे जाते हैं।
कथा का महत्व — यह व्रत क्यों
विजयादशमी साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है — यानी इस दिन का पूरा समय (विशेषकर अपराह्न का विजय-काल) नए काम, गृह-प्रवेश, वाहन-ख़रीद, विद्यारंभ, नामकरण के लिए शुभ माना गया है।
यह पर्व दो कथाओं को जोड़ता है — रामायण का रावण-वध और देवी-पुराण का महिषासुर-वध। इसलिए उत्तर भारत में रामलीला-रावण-दहन और बंगाल-दक्षिण में दुर्गा-विसर्जन/आयुध-पूजा — दोनों रूप एक ही दिन हैं।
स्त्रियों के लिए यह नवरात्रि के व्रत का समापन-दिन है — जवारे बाँटना, कलश का जल घर में छिड़कना, अपने से बड़ों के पैर छूना और बच्चों-भाइयों को जवारे व दही-चावल का टीका करना।
कथा सुनने का नियम
- कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
- व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
- कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।
📿 विजयादशमी (दशहरा) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दशहरा {Y} में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की विजयादशमी है — आश्विन शुक्ल दशमी, पंचांग-गणना से; अपराह्न का विजय मुहूर्त भी ऊपर है।
विजय मुहूर्त क्या है और क्यों ख़ास है?
दशमी के अपराह्न (दोपहर बाद) का वह समय जब श्रीराम ने युद्ध-प्रस्थान किया — लगभग 48 मिनट की खिड़की, ऊपर दिल्ली के लिए दी है। नया काम, वाहन, गृह-प्रवेश, विद्यारंभ इसमें बिना अलग मुहूर्त के शुभ हैं।
क्या दशहरे को नवरात्रि का व्रत खोलते हैं?
कई परिवार नवमी को हवन-कन्या-पूजन के बाद और कई दशमी की सुबह पूजा करके पारण करते हैं — दोनों मान्य हैं। अपने घर की रीत अपनाएँ।
शमी की पूजा क्यों की जाती है?
महाभारत में पांडवों ने अपने शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे और विजयादशमी को उतारकर विजय पाई; शमी को शनि और अग्नि का वृक्ष भी माना गया है — इसकी पत्ती तिजोरी में रखने से धन-स्थिरता का विश्वास है।
क्या दशहरे को नया सामान ख़रीद सकते हैं?
हाँ, यह साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है — वाहन, सोना, घर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नई किताबें-कलम, सबके लिए शुभ। विजय मुहूर्त में हो तो और उत्तम।
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