📖 व्रत-कथा

🪁 मकर संक्रांति (खिचड़ी / पोंगल / लोहड़ी) व्रत कथा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कथा

सूर्य देव अपने पुत्र शनि से रुष्ट रहते थे (शनि की माता छाया से जुड़ी कथा)। मकर राशि शनि का घर है — मकर संक्रांति को सूर्य एक महीने के लिए पुत्र शनि के घर जाते हैं, और यह पिता-पुत्र के मिलन का दिन है; कहते हैं इस दिन शनि ने पिता का तिल-गुड़ से स्वागत किया, तभी से तिल-गुड़ का चलन और «तिल-गुड़ खाओ, मीठा बोलो» की सीख।

महाभारत में भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर 58 दिन उत्तरायण की प्रतीक्षा की — क्योंकि उत्तरायण में देह छोड़ने वाला पुनर्जन्म से मुक्त होता है; मकर संक्रांति के बाद (माघ शुक्ल अष्टमी) उन्होंने प्राण त्यागे। इसीलिए यह दिन मोक्ष और पितरों के तर्पण का भी दिन है।

गंगावतरण — भगीरथ की तपस्या से गंगा इसी दिन कपिल मुनि के आश्रम पहुँचीं और सागर-पुत्रों का उद्धार कर सागर में मिलीं; इसीलिए गंगासागर (बंगाल) में मकर संक्रांति का महास्नान — «सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार»।

कथा का महत्व — यह व्रत क्यों

उत्तरायण देवताओं का दिन माना गया है — भीष्म पितामह ने शर-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी और मकर संक्रांति के बाद देह छोड़ी। इस दिन का स्नान-दान (विशेषकर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल) अक्षय-फल देता है।

पुण्यकाल: संक्रांति के क्षण से उस दिन सूर्यास्त तक (या 16 घटी); संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो अगला दिन पर्व-दिन। इसीलिए कभी 14 और कभी 15 जनवरी — ऊपर दी तिथि इंजन से है। महापुण्यकाल संक्रांति के तुरंत बाद की लगभग 2 घटी (48 मिनट)।

स्त्रियों की रीत: तिल-गुड़ बाँटना («तिळगुळ घ्या, गोड बोला»), हल्दी-कुमकुम, सुहागिनों को बायना/वाण देना, नई बहू-बच्चे को «बोरन्हाण»; बिहार-पूर्वांचल में दही-चूड़ा-तिलकुट, घर की बड़ी स्त्री सबको तिल देकर आशीर्वाद।

कथा सुनने का नियम

  • कथा पूजा के बाद और आरती से पहले सुनी/पढ़ी जाती है — पूरा परिवार साथ बैठे।
  • व्रत रखने वाला शांत मन से सुने; दीपक जलता रहे और हाथ में थोड़े अक्षत-फूल रखें।
  • कथा पूरी होने पर फूल देव-चरणों में चढ़ाकर प्रणाम करें; प्रसाद सबमें बाँटें।

📿 मकर संक्रांति (खिचड़ी / पोंगल / लोहड़ी) की पूजा-विधि (चरण-दर-चरण) →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मकर संक्रांति {Y} में कब है — 14 या 15 जनवरी?

ऊपर दी गई तिथि इंजन की सूर्य-गणना से है — जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है (संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो अगला दिन)। आजकल प्रायः 14 जनवरी, कुछ वर्षों में 15; हर ~72 साल में एक दिन आगे खिसकती है।

पुण्यकाल क्या है, दान कब करें?

संक्रांति के क्षण से उस दिन सूर्यास्त तक (शास्त्र में 16 घटी); संक्रांति के तुरंत बाद के 48 मिनट «महापुण्यकाल»। स्नान-दान इसी में — सूर्योदय से दोपहर तक सबसे अच्छा।

तिल-गुड़ ही क्यों?

तिल और गुड़ ठंड में गर्मी और शक्ति देते हैं (आयुर्वेद); कथा में शनि ने पिता सूर्य का स्वागत तिल-गुड़ से किया; तिल का दान पितरों-मोक्ष से जुड़ा है — इसलिए खाओ, बाँटो, दान करो।

लोहड़ी, पोंगल, बिहू और मकर संक्रांति एक ही हैं?

सब सूर्य के मकर-प्रवेश और नई फ़सल के उत्सव हैं — लोहड़ी एक रात पहले (पंजाब), पोंगल चार दिन (तमिलनाडु), माघ बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (यूपी-बिहार) — नाम और पकवान अलग, सूर्य एक।

खरमास क्या है और संक्रांति से क्यों खुलता है?

सूर्य के धनु राशि में रहने का महीना (दिसंबर-मध्य से मकर संक्रांति तक) खरमास/मलमास — विवाह-गृहप्रवेश वर्जित; मकर-प्रवेश से उत्तरायण और शुभ कार्य फिर शुरू। विवाह-तिथियाँ मुहूर्त-पन्ने पर।

🏠 मकर संक्रांति (खिचड़ी / पोंगल / लोहड़ी) 2026 — तिथि, मुहूर्त, पूरा पन्ना · सभी व्रत-त्योहार