Nakshtra Takकुंडलीराशिफलपंचांगमिलानज्ञानग्रह-फलज्योतिषीStore
🪔 पूजा-विधि

🪔 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

इस दिन की विधि के दो भाग हैं — भोर में स्नान वाली और शाम को दीपदान वाली। जिस वर्ष दोनों अलग दिन पड़ें, तालिका देखकर उसी हिसाब से करें।

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. सूर्योदय से पहले, अरुणोदय में उठें; पूरे शरीर पर तिल के तेल की मालिश (अभ्यंग) करें — सिर, कान, नाभि और तलवों पर विशेष रूप से। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में घर की बड़ी स्त्री परिवार के सदस्यों के सिर पर तेल लगाती है।
  2. तेल के बाद उबटन लगाएँ — बेसन या जौ का आटा, हल्दी, चंदन-चूर्ण और थोड़ा दूध या दही; महाराष्ट्र में तैयार «उटणे» भी मिलता है। कुछ देर रखकर हल्के हाथ से छुड़ाएँ।
  3. स्नान के समय अपामार्ग (चिरचिटा / लटजीरा) की टहनी सिर के ऊपर से तीन बार घुमाने की पुरानी रीत है — «सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥»; कई घर इसके पत्ते स्नान के जल में डाल देते हैं।
  4. गुनगुने जल से स्नान करके साफ़ या नए वस्त्र पहनें; तिलक लगाकर श्रीकृष्ण को प्रणाम करें। महाराष्ट्र-गोवा में स्नान के बाद कारीट (चिराटे) का छोटा कड़वा फल पैर से फोड़ने की रीत है — नरकासुर-वध का प्रतीक।
  5. यम-तर्पण: दक्षिण की ओर मुख करके, जल में थोड़े काले तिल डालकर अंजलि दें और यमराज के चौदह नाम लें — «यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च। वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च॥ औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने। वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नमः॥» फिर हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
  6. शाम को प्रदोष-काल में यम-दीपदान: आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक, सरसों या तिल का तेल, चार बत्तियाँ; घर के मुख्य द्वार की दहलीज़ के बाहर दक्षिण की ओर मुख करके रखें और परिवार की कुशलता व दीर्घायु की प्रार्थना करें।
  7. इसके बाद घर के हर कोने, रसोई, जल-स्थान, तुलसी, आँगन और द्वार पर दीये जलाएँ — कई घरों में 14 दीये (चतुर्दशी की संख्या); बंगाल में घर के अँधेरे कोनों में चौद्दो प्रदीप।
  8. जिन परिवारों की रीत है, वे शाम या रात को हनुमान-पूजा (सिंदूर-चोला, हनुमान चालीसा, बूँदी-लड्डू का भोग) या गुजरात की तरह काली चौदस पर महाकाली/कुलदेवी की पूजा करें; आरती के बाद प्रसाद बाँटें और अगले दिन के लक्ष्मी-पूजन की तैयारी करें।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

ज़्यादातर सामान धनतेरस-दीवाली की सामग्री में ही आ जाता है; स्नान की चीज़ें एक रात पहले तैयार रख लें — भोर में ढूँढ़ने का समय नहीं मिलता।

  • तिल का तेल — मालिश के लिए (कई घरों में सरसों का तेल)
  • उबटन — बेसन/जौ का आटा, हल्दी, चंदन-चूर्ण, दूध या दही (या तैयार उटणे)
  • अपामार्ग (चिरचिटा) की टहनी या पत्ते — मिलें तो
  • साफ़ या नए वस्त्र, तौलिया, स्नान के लिए गुनगुना जल
  • तर्पण के लिए ताँबे का लोटा, काले तिल, जल, कुश (मिले तो)
  • यम-दीपक हेतु आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक, चार बत्तियाँ, तेल
  • मिट्टी के दीये (14 या अधिक), घी/तेल, रुई की बत्तियाँ
  • रोली, अक्षत, हल्दी, फूल-माला, धूप-अगरबत्ती, कपूर, आरती-थाली
  • श्रीकृष्ण का चित्र; जिनकी रीत हो, उनके लिए हनुमान जी या महाकाली का चित्र, सिंदूर, चमेली का तेल
  • भोग — मिठाई, फल, खील-बताशे; महाराष्ट्र में फराळ, बंगाल में चौद्दो शाक

🛍 पूजा-सामग्री देखें

नरक चतुर्दशी का भोग और भोजन

नरक चतुर्दशी पर व्रत अनिवार्य नहीं — यह स्नान, दीपदान और दीवाली की तैयारी का दिन है; पर हनुमान-पूजा या रंतिदेव-कथा से जुड़े कुछ घरों में दिन का व्रत रखा जाता है। भोजन प्रदेश के हिसाब से बहुत अलग है।

  • बंगाल: भूत चतुर्दशी पर चौद्दो शाक — नीम, सरसों आदि चौदह पत्तेदार सागों को मिलाकर बनी सब्ज़ी, दोपहर के भोजन में
  • महाराष्ट्र: अभ्यंग-स्नान के बाद पहला फराळ — चकली, करंजी, शंकरपाळी, चिवड़ा, बेसन-लड्डू, अनारसे
  • तमिलनाडु: तेल-स्नान के बाद दीपावली-मरुंदु (सोंठ, अजवाइन, गुड़-घी से बना पाचक लेहियम), फिर मिठाइयाँ
  • गुजरात: काली चौदस पर उड़द के वड़े — कई घरों में भोग और भोजन दोनों में
  • उत्तर भारत: दीवाली की मिठाइयाँ (गुझिया, लड्डू, बर्फ़ी), हनुमान जी को बूँदी-लड्डू या चूरमा; शाम को सादा सात्विक भोजन

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • सूर्योदय से पहले, अरुणोदय में तिल-तेल की मालिश और उबटन से स्नान करें — स्नान का दिन तालिका में देखें
  • स्नान के बाद दक्षिणमुख होकर यम-तर्पण या कम-से-कम प्रणाम, और श्रीकृष्ण का स्मरण
  • शाम को प्रदोष-काल में द्वार पर दक्षिणमुखी चौमुखा यम-दीपक ज़रूर रखें
  • घर के अँधेरे कोनों, रसोई, जल-स्थान और तुलसी पर दीये जलाएँ — अगले दिन की लक्ष्मी-पूजा से पहले घर उजला रहे
  • दिन में ज़रूरतमंद को अन्न या वस्त्र का दान — रंतिदेव-कथा का यही संदेश है

❌ क्या न करें

  • इस सुबह सूर्योदय के बाद तक सोते रहना — अभ्यंग-स्नान का समय भोर ही है
  • यम-दीपक को लाँघना, हिलाना या बुझाना; उसे दक्षिण के अलावा किसी और दिशा में रखना
  • अगली सुबह बुझे दीयों को कूड़े में फेंकना — ठंडे होने पर सम्मान से पेड़ के नीचे या मिट्टी में रखें, या धोकर फिर उपयोग करें
  • जलते दीयों के पास परदे-कपड़े, और बच्चों को पटाख़ों के साथ अकेला छोड़ना
  • काली चौदस या भूत चतुर्दशी के नाम पर डर फैलाने वाले टोने-टोटकों के बहकावे में आना — यह उपासना और पूर्वज-स्मरण का दिन है

व्रत-कथा

भूदेवी के पुत्र नरकासुर को वरदान मिला था, पर शक्ति के मद में वह अत्याचारी बन गया — उसने स्वर्ग पर चढ़ाई की, देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए और अनेक राजाओं की सोलह हज़ार कन्याओं को अपने नगर प्राग्ज्योतिषपुर में बंदी बना लि… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नरक चतुर्दशी {Y} में कब है? छोटी दिवाली और अभ्यंग-स्नान अलग दिन क्यों पड़ सकते हैं?

ऊपर की तालिका में इस साल की कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन पंचांग-गणना से दिए गए हैं। छोटी दिवाली (यम-दीपदान) उस दिन है जिस दिन प्रदोष-काल में चतुर्दशी हो, जबकि अभ्यंग-स्नान उस सुबह होता है जिस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पहले) में चतुर्दशी हो। तिथि के घटने-बढ़ने से ये दो अलग दिन पड़ सकते हैं — तब स्नान लक्ष्मी-पूजन वाले दिन की सुबह होता है; अपने शहर के पाँचों दिन की तारीख़ें दिवाली के शहर-वार पन्ने (जैसे /vrat/diwali/lucknow) पर देखें।

यम दीपदान कैसे करें?

शाम को प्रदोष-काल में आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें, तेल भरकर चार बत्तियाँ लगाएँ और घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर मुख करके रखें। हाथ जोड़कर यमराज से परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें; दीपक को अपने-आप जलने दें, उसे लाँघें या हटाएँ नहीं।

रूप चौदस पर उबटन क्यों लगाते हैं?

रूप चौदस का स्नान तन की शुद्धि और निखार का प्रतीक है — तेल-मालिश सर्दी से पहले त्वचा और जोड़ों को पोषण देती है और बेसन-हल्दी-चंदन का उबटन मैल हटाकर त्वचा साफ़ करता है। परंपरा में भोर का यह स्नान नरक-भय से मुक्ति और पूरे दीपोत्सव के लिए तन-मन की तैयारी माना जाता है।

क्या दक्षिण भारत में यही दीपावली है?

हाँ, तमिलनाडु और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में नरक चतुर्दशी की सुबह को ही दीपावली कहा जाता है — भोर का तेल-स्नान, नए वस्त्र, पटाख़े और मिठाइयाँ इसी दिन होते हैं। उत्तर भारत की तरह अमावस्या की शाम का लक्ष्मी-पूजन वहाँ उतना केंद्रीय नहीं, हालाँकि कर्नाटक और कई व्यापारी परिवारों में अमावस्या पर लक्ष्मी-पूजा भी होती है।

काली चौदस और भूत चतुर्दशी क्या हैं?

गुजरात और राजस्थान के कुछ भागों में इसी चतुर्दशी को काली चौदस कहते हैं — रात को महाकाली, हनुमान जी या कुलदेवी की उपासना होती है, ताकि घर से नकारात्मकता दूर रहे। बंगाल में यही भूत चतुर्दशी है — पूर्वजों की स्मृति में 14 दीये जलाए जाते हैं और 14 तरह के साग खाए जाते हैं; उसके बाद अमावस्या को काली-पूजा।

🏠 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 2026 — तिथि, मुहूर्त, पूरा पन्ना · सभी व्रत-त्योहार