Nakshtra Takकुंडलीराशिफलपंचांगमिलानज्ञानग्रह-फलज्योतिषीStore
🪔 पूजा-विधि

🌿 तुलसी विवाह पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

घर में तुलसी-विवाह की विधि — शाम गोधूलि/प्रदोष में (ऊपर समय); तुलसी = कन्या, शालिग्राम/विष्णु-मूर्ति (या चित्र) = वर; घर के पुरुष/ब्राह्मण संकल्प-मंत्र, स्त्रियाँ सजावट-गीत।

तुलसी विवाह कैसे करें — पूजा के चरण

  1. तैयारी (दिन में): तुलसी के गमले/चौरा को धो-लीपकर रंगोली, गन्ने (4) का मंडप (गन्ने चारों कोनों पर बाँधकर ऊपर चुनरी), आम-पत्ते व फूलों का तोरण; गमले पर सुहाग-सामग्री; शालिग्राम (न हो तो विष्णु/कृष्ण की छोटी मूर्ति या चित्र) को स्नान कराकर पीले वस्त्र, चंदन-तिलक — दूल्हा।
  2. उपवास: घर की स्त्री (या विवाह कराने वाला) दिन में फलाहार/एक समय; शाम विवाह के बाद भोजन।
  3. तुलसी-श्रृंगार: तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाना, चूड़ी-बिंदी-सिंदूर-मेहँदी-आलता (गमले पर), हल्दी लगाना (हल्दी-रस्म), फूल-माला; गमले को साड़ी/लाल कपड़े से लपेटना — तुलसी दुल्हन।
  4. विवाह-आरंभ (गोधूलि): कलश-स्थापना, गणेश-पूजन; शालिग्राम को हाथ में लेकर/चौकी पर तुलसी के दाएँ रखें; दोनों को हल्दी-चंदन-अक्षत, वर को पीली, कन्या को लाल माला; «तुलसी विवाह» का संकल्प — «मैं (नाम) तुलसी माता का शालिग्राम भगवान से विवाह (कन्यादान) कराता/कराती हूँ»।
  5. कन्यादान व गठबंधन: तुलसी के गमले पर हाथ रखकर कन्यादान-मंत्र/भावना; शालिग्राम व तुलसी के बीच मौली/चुनरी से गठबंधन; मंगलाष्टक («मंगलम् भगवान विष्णुः…») पाठ, अक्षत-वर्षा; स्त्रियाँ विवाह-गीत/मंगल-गीत।
  6. फेरे: शालिग्राम को हाथ में लेकर तुलसी की 7 परिक्रमा (या तुलसी-गमले को वर के चारों ओर) — हर फेरे पर अक्षत-फूल; सप्तपदी-भावना; फिर तुलसी को सिंदूर (विष्णु की ओर से), वर-वधू की आरती (कपूर)।
  7. भोग व आरती: खीर-पूरी, लड्डू, फल, पंचामृत, तुलसी-दल, गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, आँवला, मूली (कार्तिक की ऋतु-वस्तुएँ) — विष्णु-तुलसी को; तुलसी-आरती («जय जय तुलसी माता») व विष्णु-आरती; «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय» / «तुलसी श्रीर्महालक्ष्मी…» स्तोत्र।
  8. कथा-भोज: वृंदा-जालंधर की कथा (नीचे); प्रसाद व विवाह-भोज (पूरी-सब्ज़ी-खीर-लड्डू) परिवार-पड़ोस को; कन्या/ब्राह्मण को दक्षिणा; गन्ने का मंडप अगले दिन तक, गन्ना प्रसाद-रूप में खाना; तुलसी-चुनरी पूर्णिमा/साल-भर।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

सुहाग-सामग्री, गन्ने, शालिग्राम व कार्तिक की ऋतु-वस्तुएँ — तुलसी-विवाह की सूची।

  • तुलसी का पौधा (गमला/चौरा), शालिग्राम (या विष्णु/कृष्ण-मूर्ति/चित्र), चौकी, पीला-लाल कपड़ा, कलश (जल-आम-पत्ते-नारियल)
  • मंडप: 4 गन्ने, लाल चुनरी/साड़ी (मंडप-छत), आम-पत्ते व गेंदा का तोरण, रंगोली-रंग, फूल-पत्ती
  • तुलसी-श्रृंगार (सुहाग-सामग्री): लाल चुनरी, चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहँदी, आलता, काजल, कंघी, शीशा, बिछिया (प्रतीक), लाल साड़ी/कपड़ा
  • वर (शालिग्राम): पीला वस्त्र/धोती, चंदन, मुकुट (कागज़/फूल), पीली माला, जनेऊ, मौली (गठबंधन)
  • पूजन: हल्दी, रोली, अक्षत, चंदन, मौली, पान-सुपारी, लौंग-इलायची, इत्र, पंचामृत, गंगाजल, तुलसी-दल, घी-दीप, धूप, कपूर, आरती-थाली
  • ऋतु-भोग: गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, आँवला, मूली, शकरकंद, केला, अमरूद; खीर, पूरी, लड्डू, मिठाई; नारियल
  • मंगलाष्टक/तुलसी-विवाह की पुस्तिका, विवाह-गीत; कन्या-दक्षिणा; ब्राह्मण (हो तो) की दक्षिणा
  • अगले दिन: गन्ना बाँटने/खाने की रीत, तुलसी-दीप, चुनरी यथावत

🛍 पूजा-सामग्री देखें

खीर-पूरी-लड्डू, गन्ना-सिंघाड़ा-बेर-आँवला; विवाह-भोज

तुलसी-विवाह में विष्णु-तुलसी को कार्तिक की ऋतु-वस्तुएँ — गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, आँवला, मूली, शकरकंद — और खीर-पूरी-लड्डू का भोग; विवाह-भोज में परिवार-पड़ोस को पूरी-सब्ज़ी-खीर/लड्डू; दिन में फलाहार, शाम विवाह के बाद भोजन; गन्ना प्रसाद-रूप में अगले दिन।

  • भोग: खीर (चावल-दूध), पूरी, बेसन/बूँदी-लड्डू, पंचामृत, तुलसी-दल, गन्ना (छिला-कटा), सिंघाड़ा, बेर, आँवला, मूली, शकरकंद, केला, अमरूद, नारियल
  • विवाह-भोज (परिवार-पड़ोस): पूरी, कद्दू/आलू की सब्ज़ी, चने की दाल, खीर, लड्डू, रायता, अचार — जैसे घर के विवाह में
  • फलाहार (दिन में): फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े का हलवा, मखाने
  • अगले दिन: गन्ना बाँटकर खाना (मंडप का), बचा भोग गाय को; तुलसी-दल का सेवन प्रसाद-रूप (कार्तिक)
  • वर्जित: तुलसी-विवाह के दिन तुलसी-पत्ता तोड़ना (एक दिन पहले तोड़कर रखें), प्याज़-लहसुन-माँस, तुलसी को रात/एकादशी/रविवार को छूना-जल देना (लोक-नियम)

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • द्वादशी (या घर की रीत से एकादशी-शाम) को गोधूलि/प्रदोष में विवाह — ऊपर समय; तुलसी-पत्ते एक दिन पहले तोड़ें
  • गन्ने का मंडप, तुलसी को सुहाग-श्रृंगार (चुनरी-चूड़ी-सिंदूर), शालिग्राम को पीले वस्त्र; कन्यादान-गठबंधन-मंगलाष्टक-फेरे-आरती
  • ऋतु-भोग: गन्ना-सिंघाड़ा-बेर-आँवला-मूली + खीर-पूरी; विवाह-भोज परिवार-पड़ोस; कन्या-दक्षिणा
  • विवाह-बाधा/संतान-कामना वाले तुलसी-विवाह में सम्मिलित हों, तुलसी-नामाष्टक पाठ; कार्तिक-भर तुलसी-दीप
  • उसी दिन से विवाह-मुहूर्त — घर के लग्न-मुहूर्त पंचांग/ज्योतिषी से (शुभ मुहूर्त पन्ना)

❌ क्या न करें

  • तुलसी-विवाह/एकादशी/रविवार को तुलसी-पत्ता तोड़ना, रात में तुलसी छूना-जल देना (लोक-नियम)
  • शालिग्राम को स्त्रियों द्वारा स्पर्श (कुछ कुल-रीत — मत भिन्न; विष्णु-मूर्ति/चित्र से विवाह चलता है), शालिग्राम बिना स्नान
  • प्याज़-लहसुन-माँस-मद्य; तुलसी को गंदा जल; प्लास्टिक का श्रृंगार पौधे पर छोड़ना (पौधा दबे नहीं)
  • विवाह अधूरा — बिना फेरे/आरती; गन्ना फेंकना (प्रसाद है); दक्षिणा/कन्या-सम्मान में कंजूसी
  • तुलसी-गमले में सूखा/मरा पौधा रखकर विवाह — नया पौधा लगाएँ; एकादशी-द्वादशी पर तुलसी-दल का भोग-हेतु सेवन नहीं (पहले तोड़ा दल ही)

व्रत-कथा

वृंदा-जालंधर की कथा: असुर-राज जालंधर (समुद्र से उत्पन्न, शिव-तेज) की पत्नी वृंदा परम पतिव्रता थी — उसके सतीत्व के बल से जालंधर अजेय हुआ, देवताओं को हराकर स्वर्ग तक पर अधिकार करने लगा। देवताओं ने विष्णु से प्रार्थना की; व… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तुलसी विवाह {Y} में कब है — एकादशी या द्वादशी?

शास्त्र-मत में कार्तिक शुक्ल द्वादशी (ऊपर तिथि); लोक-रीत में बहुत-से घर देवउठनी एकादशी की शाम ही करते हैं — दोनों मान्य; महाराष्ट्र में द्वादशी से पूर्णिमा तक कोई भी शाम। कुल-रीत मानें।

तुलसी विवाह का मुहूर्त क्या है?

गोधूलि/प्रदोष-काल (सूर्यास्त के आसपास — ऊपर समय) श्रेष्ठ; द्वादशी-तिथि की खिड़की ऊपर; राहुकाल टालें; अभिजित (दोपहर) में तैयारी-पूजन।

शालिग्राम न हो तो?

विष्णु/कृष्ण/लक्ष्मी-नारायण की छोटी मूर्ति या चित्र को वर बनाएँ — पीले वस्त्र, मुकुट; भाव मुख्य है; कई घर ठाकुरजी (बालकृष्ण) से विवाह कराते हैं।

तुलसी विवाह कौन कराए — घर की स्त्री या ब्राह्मण?

घर में स्त्रियाँ ही श्रृंगार-गीत-कन्यादान करती हैं, संकल्प-मंत्र घर का पुरुष/ब्राह्मण (हो तो); पंडित अनिवार्य नहीं — मंगलाष्टक व आरती से घर में पूरा हो जाता है।

कन्यादान का फल किसे?

मान्यता — जिनके घर कन्या नहीं, या जो तुलसी-कन्यादान कराते हैं, उन्हें कन्यादान-पुण्य; विवाह-बाधा वालों को दांपत्य-सुख की प्रार्थना का फल।

तुलसी विवाह के बाद क्या करें?

गन्ना प्रसाद-रूप में खाएँ-बाँटें, तुलसी की चुनरी बनी रहे, कार्तिक पूर्णिमा तक रोज़ तुलसी-दीप, भीष्म-पंचक (द्वादशी-पूर्णिमा) में सात्विक; उसी सप्ताह से घर के विवाह-मुहूर्त देखें।

तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी में अंतर?

देवउठनी = कार्तिक शुक्ल एकादशी, भगवान का जागना, चातुर्मास-समाप्ति; तुलसी-विवाह = अगले दिन द्वादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह — कई घर दोनों एक ही शाम करते हैं; देवउठनी का अलग पन्ना है।

🏠 तुलसी विवाह 2026 — तिथि, मुहूर्त, पूरा पन्ना · सभी व्रत-त्योहार