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🪔 पूजा-विधि

💰 वैभव लक्ष्मी व्रत (शुक्रवार) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि (व्रत-पुस्तिका के अनुसार) — संकल्प 11 या 21 शुक्रवार; पूजा शाम को, पूरब मुख।

वैभव लक्ष्मी व्रत (शुक्रवार) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. संकल्प (पहले शुक्रवार): सुबह स्नान कर माँ लक्ष्मी के सामने — «मैं (नाम) 11/21 शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत (कामना) हेतु करूँगी; पूर्ण होने पर उद्यापन करूँगी»; व्रत घर पर ही हो — यात्रा में न करें, वह शुक्रवार बाद में जोड़ें।
  2. दिन-भर: फलाहार या एक समय भोजन (नमक चलता है); मन-वचन से शुद्ध, किसी की निंदा नहीं, «जय माँ लक्ष्मी» का स्मरण।
  3. शाम की पूजा: पूरब की ओर मुख कर आसन पर बैठें; सामने चौकी पर लाल/पीला कपड़ा, उस पर मुट्ठी-भर चावल का ढेर, ढेर पर जल-भरा ताम्र-कलश, कलश पर कटोरी; कटोरी में सोने/चाँदी की वस्तु (सिक्का, अँगूठी, नथ — जो हो; न हो तो रुपये का सिक्का)।
  4. लक्ष्मीजी का चित्र (धनलक्ष्मी — कमल पर बैठी, सोने की वर्षा) और श्रीयंत्र सामने रखें; घी का दीपक, धूप; सोने-चाँदी की वस्तु को दूध-पंचामृत से स्नान कराकर स्वच्छ जल से धोकर पोंछकर कटोरी में रखें।
  5. पूजन: हल्दी-कुंकुम-अक्षत, लाल/गुलाबी फूल (कमल हो तो सर्वोत्तम), इत्र; श्रीयंत्र व लक्ष्मी-चित्र को प्रणाम कर «ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः» 11/21/108 बार; अष्टलक्ष्मी के आठ नामों का स्मरण; श्री-सूक्त/लक्ष्मी-स्तोत्र (हो सके तो)।
  6. कथा व आरती: वैभव लक्ष्मी व्रत-कथा (नीचे — शीला की कथा) पढ़ें/सुनें; «ॐ जय लक्ष्मी माता» आरती; भोग — खीर (चावल-दूध-चीनी-केसर) या दूध की मिठाई/पेड़ा; व्रत-पुस्तिका के अनुसार अंत में लक्ष्मी-स्तवन।
  7. प्रसाद: घर के सबको खीर; कलश का जल तुलसी/पौधों में; चावल पक्षियों को; सोने-चाँदी की वस्तु सुरक्षित रख दें (व्रत-भर यही वस्तु)।
  8. उद्यापन (11वाँ/21वाँ शुक्रवार): वही पूजा + 7 (या 11, 21) सुहागिनों/कन्याओं को बुलाकर कुंकुम-तिलक, वैभव लक्ष्मी व्रत की पुस्तिका व खीर-प्रसाद भेंट (व्रत का प्रचार — यही उद्यापन का सार); श्रद्धानुसार लक्ष्मी-चित्र/श्रीयंत्र/वस्त्र दान; नारियल-चुनरी माता को।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

श्रीयंत्र, सोने/चाँदी की वस्तु, ताम्र-कलश व खीर — वैभव लक्ष्मी की विशेष सूची।

  • लक्ष्मीजी (धनलक्ष्मी) का चित्र/मूर्ति, श्रीयंत्र (चित्र/ताम्र/चाँदी), चौकी, लाल-पीला कपड़ा, आसन
  • चावल (मुट्ठी-भर ढेर के लिए), ताम्र/स्टील कलश (जल), कटोरी; सोने/चाँदी की वस्तु — सिक्का, अँगूठी, नथ, चेन (न हो तो चाँदी/रुपये का सिक्का)
  • पंचामृत (दूध-दही-घी-शहद-चीनी) व दूध — वस्तु के स्नान हेतु; स्वच्छ जल, कपड़ा
  • हल्दी, कुंकुम, अक्षत, मौली, इत्र, गुलाब-जल; लाल/गुलाबी/कमल के फूल, माला
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर, आरती-थाली, घंटी, शंख
  • भोग: खीर (चावल-दूध-चीनी-केसर-इलायची) या दूध की मिठाई/पेड़ा/बर्फ़ी; फल, पान-सुपारी, नारियल
  • कथा-पुस्तिका «वैभव लक्ष्मी व्रत-कथा» (गुजराती/हिन्दी), लक्ष्मी-आरती, श्री-सूक्त
  • उद्यापन: 7/11/21 सुहागिनों के लिए कुंकुम, व्रत-पुस्तिकाएँ, खीर, नारियल-चुनरी, दक्षिणा; लक्ष्मी-चित्र/श्रीयंत्र दान (श्रद्धानुसार)

🛍 पूजा-सामग्री देखें

खीर का भोग, दूध की मिठाई; फलाहार/एक समय भोजन

वैभव लक्ष्मी को खीर (चावल-दूध-चीनी-केसर) या दूध से बनी मिठाई प्रिय — शाम की पूजा में भोग लगाकर सबको प्रसाद। व्रत के दिन फलाहार या एक समय सात्विक भोजन (नमक की मनाही नहीं — संतोषी-व्रत जैसी खट्टे की वर्जना भी नहीं); प्याज़-लहसुन-माँस-मद्य नहीं।

  • भोग: केसर-खीर (बासमती चावल, फुल-क्रीम दूध, चीनी/मिश्री, केसर, इलायची, बादाम-किशमिश), दूध-पेड़ा, बर्फ़ी, रबड़ी, नारियल-लड्डू; कमल-गट्टा (कुछ घर)
  • व्रत-भोजन: फल-दूध, साबूदाना-खिचड़ी/खीर, सिंघाड़े-आटे की पूरी, आलू-सब्ज़ी; या एक समय सादा सात्विक भोजन (दाल-चावल-रोटी-सब्ज़ी) — घर की रीत से
  • उद्यापन-प्रसाद: खीर व पुस्तिका सुहागिनों को; ब्राह्मण/कन्या-भोजन (श्रद्धानुसार) — खीर-पूरी-सब्ज़ी
  • वर्जित: माँस-मद्य-प्याज़-लहसुन; व्रत-दिन किसी की निंदा-चुगली (लक्ष्मी-वार का नियम)

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • संकल्प 11 या 21 शुक्रवार, घर पर ही पूजा, शाम को पूरब मुख; यात्रा का शुक्रवार बाद में जोड़ें
  • श्रीयंत्र + सोने/चाँदी की वस्तु (स्नान) + खीर-भोग + कथा-आरती — चारों अनिवार्य; अष्टलक्ष्मी-नाम स्मरण
  • उद्यापन पर 7 (या 11/21) सुहागिनों/कन्याओं को कुंकुम-पुस्तिका-खीर — व्रत का प्रचार ही उद्यापन
  • पूजा-कक्ष व घर की सफ़ाई, शुक्रवार को लक्ष्मी-दीप; व्रत-दिन दान (श्रद्धानुसार)
  • गर्भवती/बीमार: व्रत की जगह केवल शाम की पूजा-कथा; धन-कामना के साथ कर्म-उद्यम भी

❌ क्या न करें

  • व्रत यात्रा/दूसरे घर में करना; संकल्प के बिना आरंभ; 11 या 21 पूरे बिना उद्यापन
  • संतोषी माता व वैभव लक्ष्मी दोनों व्रत एक साथ — एक ही चुनें (पुस्तिका का निर्देश)
  • सोने/चाँदी की वस्तु उधार की/किसी और की — अपनी वस्तु; व्रत-अवधि में उसे बेचना-गिरवी
  • व्रत-दिन निंदा-क्रोध-झूठ, माँस-मद्य; लक्ष्मी-चित्र फटा/अशुद्ध रखना
  • उद्यापन में सुहागिनों को टालना/कम गिनना — पुस्तिका-कुंकुम कम-से-कम 7

व्रत-कथा

वैभव लक्ष्मी की कथा (शीला की कहानी): एक नगर में शीला नाम की धर्मपरायण स्त्री अपने पति के साथ सुख से रहती थी — दोनों भगवद्भक्त, दान-धर्म में रुचि। समय ने करवट ली — पति बुरी संगत में पड़ा, जुआ-शराब-सट्टा में घर की सारी संप… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वैभव लक्ष्मी व्रत कब से शुरू करें, {Y} में शुक्रवार कब-कब?

किसी भी शुक्रवार से — शुक्ल पक्ष का पहला शुक्रवार श्रेष्ठ; ऊपर सूची में आने वाले 12 शुक्रवार माह-पक्ष सहित हैं। अधिक मास/पितृपक्ष में आरंभ न करें; चलता व्रत जारी रखें।

पूजा सुबह करें या शाम?

पुस्तिका के अनुसार शाम को (सूर्यास्त के बाद — प्रदोष/गोधूलि, ऊपर समय) पूरब मुख करके; सुबह संकल्प-स्नान; दिन में फलाहार।

सोने-चाँदी की वस्तु न हो तो?

चाँदी/रुपये का सिक्का चलता है; कथा में शीला ने नथ से किया — जो अपनी वस्तु हो; उधार की नहीं। वस्तु व्रत-भर वही रहे।

11 या 21 — कितने शुक्रवार?

संकल्प के समय तय करें — सामान्यतः 11; विशेष कामना (ऋण-मुक्ति, विवाह) पर 21। बीच में छूटे तो अगले शुक्रवार से गिनती आगे बढ़े; मासिक-धर्म/यात्रा का शुक्रवार बाद में जोड़ें।

उद्यापन कैसे?

अंतिम शुक्रवार वही पूजा + 7 (या 11/21) सुहागिनों/कन्याओं को कुंकुम-तिलक, वैभव लक्ष्मी व्रत-पुस्तिका व खीर-प्रसाद भेंट; नारियल-चुनरी माता को; श्रद्धानुसार लक्ष्मी-चित्र/श्रीयंत्र/वस्त्र दान।

व्रत में नमक/खट्टा चलता है?

हाँ — यह संतोषी-व्रत नहीं; फलाहार या एक समय सात्विक भोजन, प्याज़-लहसुन-माँस-मद्य वर्जित; खीर का भोग अनिवार्य।

पुरुष रख सकते हैं?

हाँ — व्यापार-ऋण-धन के लिए पुरुष भी रखते हैं; विधि वही; उद्यापन में सुहागिनों को भेंट घर की स्त्री के हाथ से।

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