| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | शुक्रवार, 1 मई 2026 | 6:30 AM – 10:48 AM AEST | 1 मई, 1:43 AM → 2 मई, 3:23 AM AEST |
| मेलबर्न AEST/AEDT | शुक्रवार, 1 मई 2026 | 7:01 AM – 11:14 AM AEST | 1 मई, 1:43 AM → 2 मई, 3:23 AM AEST |
| ब्रिस्बेन AEST | शुक्रवार, 1 मई 2026 | 6:13 AM – 10:39 AM AEST | 1 मई, 1:43 AM → 2 मई, 3:23 AM AEST |
| पर्थ AWST | शुक्रवार, 1 मई 2026 | 6:48 AM – 11:08 AM AWST | 30 अप्रैल, 11:43 PM → 2 मई, 1:23 AM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | शुक्रवार, 1 मई 2026 | 6:52 AM – 11:08 AM ACST | 1 मई, 1:13 AM → 2 मई, 2:53 AM ACST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
वैशाख-स्नान का समापन — जिन्होंने चैत्र पूर्णिमा से रोज़ भोर में स्नान किया, आज पूर्ण; स्कंद-पुराण में वैशाख मास को माधव-मास कहा गया — इस पूर्णिमा को जल-दान (घड़ा, प्याऊ), अन्न, छाता, चप्पल का दान गर्मी में सबसे बड़ा पुण्य।
बुद्ध पूर्णिमा — करुणा, अहिंसा, मध्यम मार्ग; बौद्ध-देश (श्रीलंका-नेपाल-थाईलैंड-भूटान) व भारत में सारनाथ-बोधगया-कुशीनगर में विशेष; भारत में राजकीय अवकाश; हिंदू परंपरा में बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार — इसलिए दोनों में मान्य।
नृसिंह जयंती (चतुर्दशी, प्रदोष) — «न दिन न रात, न घर न बाहर» — संध्या में खंभे से प्रकट हुए नृसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध किया; भय-शत्रु-रोग से रक्षा का व्रत, विशेषकर बच्चों की रक्षा के लिए (प्रह्लाद-भाव); दक्षिण-महाराष्ट्र में बड़ा दिन।
हाँ — शुक्रवार, 1 मई 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:30 AM से 10:48 AM (AEST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
हाँ — वैशाख पूर्णिमा हिंदू परंपरा में कूर्म-अवतार, वैशाख-स्नान-समापन और सत्यनारायण की श्रेष्ठ पूर्णिमा है; बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार माने गए हैं — इसलिए दीप-दान, अहिंसा और करुणा का भाव दोनों में साझा।
हर पूर्णिमा पर मान्य; वैशाख, कार्तिक और माघ की पूर्णिमाएँ श्रेष्ठ — वैशाख पूर्णिमा को माधव-मास का समापन होने से विशेष; प्रदोष-काल या दोपहर, सवा (1¼) की मात्रा में पंजीरी-प्रसाद।
चैत्र पूर्णिमा से वैशाख पूर्णिमा तक रोज़ भोर में नदी/तीर्थ-स्नान, विष्णु-पूजा, जल-दान — स्कंद-पुराण में माधव-मास का व्रत; घर पर गंगाजल से भी मान्य; समापन आज।