| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | 5:38 AM – 11:23 AM AEDT | 13 दिसंबर, 10:18 PM → 15 दिसंबर, 12:47 AM AEDT |
| मेलबर्न AEST/AEDT | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | 5:52 AM – 11:46 AM AEDT | 13 दिसंबर, 10:18 PM → 15 दिसंबर, 12:47 AM AEDT |
| ब्रिस्बेन AEST | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | 4:47 AM – 10:19 AM AEST | 13 दिसंबर, 9:18 PM → 14 दिसंबर, 11:47 PM AEST |
| पर्थ AWST | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | 5:05 AM – 10:46 AM AWST | 13 दिसंबर, 7:18 PM → 14 दिसंबर, 9:47 PM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 | 5:56 AM – 11:44 AM ACDT | 13 दिसंबर, 9:48 PM → 15 दिसंबर, 12:17 AM ACDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
राम-सीता का विवाह आदर्श दांपत्य का प्रतीक है — इस दिन का व्रत विवाह-बाधा दूर करने और पति-पत्नी में प्रेम बनाए रखने के लिए किया जाता है। कुँवारी कन्याएँ राम-जैसा वर पाने की कामना से रखती हैं।
रामचरितमानस के बालकांड का धनुष-यज्ञ और विवाह-प्रसंग इस दिन पढ़ा जाता है — «मंगल भवन अमंगल हारी» और «सिया-राम मय सब जग जानी» के साथ; मानस का पाठ पूरा करना विशेष फलदायी माना गया।
मिथिला में यह दिन ससुराल-मायके की मिठास का पर्व है — सीता मिथिला की बेटी हैं, इसलिए यहाँ राम «जमाई» हैं और बारात की सारी छेड़-छाड़ लोकगीतों में है।
हाँ — सोमवार, 14 दिसंबर 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:38 AM से 11:23 AM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
यह राम-सीता के विवाह का दिन है, पर लोक-परंपरा में इस दिन विवाह से बचा जाता है — क्योंकि राम-सीता को वियोग सहना पड़ा; मिथिला-अवध में यह मान्यता प्रबल है। मुहूर्त-पन्ने पर शुभ तिथियाँ देखें।
सुखी दांपत्य की कामना से विवाहित स्त्रियाँ, और अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ; विवाह में बाधा हो तो इस दिन बालकांड के विवाह-प्रसंग का पाठ विशेष माना गया।
एक मत से तुलसीदास जी ने रामचरितमानस इसी विवाह पंचमी को पूरी की थी, इसलिए इस दिन मानस-पाठ और तुलसी-स्मरण।
जनकपुर (नेपाल) में राम-जानकी विवाह की बारात अयोध्या से पहुँचती है — मंडप, सिंदूरदान, कोहबर, मैथिल विवाह-गीत, हज़ारों श्रद्धालु; अयोध्या में कनक-भवन व राम-मंदिर में विवाह-झाँकी, रामलीला का विवाह-प्रसंग; मिथिला के घरों में सीता को बेटी मानकर «बेटी की विदाई» के गीत गाए जाते हैं।