| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 7:45 PM – 9:44 PM AEDT | 24 नवंबर, 5:13 AM → 25 नवंबर, 1:54 AM AEDT |
| मेलबर्न AEST/AEDT | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 8:19 PM – 10:14 PM AEDT | 24 नवंबर, 5:13 AM → 25 नवंबर, 1:54 AM AEDT |
| ब्रिस्बेन AEST | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 6:24 PM – 8:28 PM AEST | 24 नवंबर, 4:13 AM → 25 नवंबर, 12:54 AM AEST |
| पर्थ AWST | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 7:02 PM – 9:03 PM AWST | 24 नवंबर, 2:13 AM → 24 नवंबर, 10:54 PM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 8:08 PM – 10:06 PM ACDT | 24 नवंबर, 4:43 AM → 25 नवंबर, 1:24 AM ACDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
पद्म-पुराण में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और दीपदान का फल अश्वमेध यज्ञ के बराबर बताया गया है। कार्तिक-स्नान (पूरे महीने ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान) का समापन इसी दिन होता है — जो पूरे महीने न कर सकें, वे इस एक दिन ज़रूर करें।
इस दिन नदी में 365 (या जितने संभव) दीये छोड़ने की परंपरा है — साल के हर दिन के लिए एक; काशी के घाटों की देव दीपावली विश्व-प्रसिद्ध है। यह विष्णु के मत्स्य-अवतार का दिन भी माना गया है।
पूर्णिमा का व्रत और शाम को चंद्रोदय पर अर्घ्य — कार्तिक पूर्णिमा को कृत्तिका नक्षत्र हो तो उसे «महाकार्तिकी» कहते हैं, और भी शुभ।
हाँ — मंगलवार, 24 नवंबर 2026।
प्रदोष काल पूजा: 7:45 PM से 9:44 PM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनुष्यों की लक्ष्मी-पूजा है; देव दीपावली पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं का दीपोत्सव — त्रिपुरासुर-वध की खुशी में, काशी के घाटों पर सबसे भव्य।
घर के आँगन/छत पर बड़े पात्र (परात/टब) में जल भरकर उसमें आटे या मिट्टी के दीये तैराएँ, तुलसी-चौरे पर दीये जलाएँ — फल वही माना गया है। प्लास्टिक की नाव न बनाएँ।
कार्तिक पूर्णिमा सत्यनारायण-कथा के लिए साल की सबसे शुभ पूर्णिमा मानी जाती है; घर पर पंडित से या पुस्तक से स्वयं भी की जा सकती है — पंजीरी-पंचामृत-केले का प्रसाद।
कार्तिक-भर (शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा) रोज़ भोर में स्नान, तुलसी-पूजा और दीपदान का नियम; इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है। पूरा महीना न हो सके तो एकादशी से पूर्णिमा के पाँच दिन (भीष्म पंचक) भी पर्याप्त हैं।