| तारीख | संकष्टी चतुर्थी | तिथि | चंद्रोदय |
|---|---|---|---|
| सोमवार, 25 जनवरी 2027 | लंबोदर (सकट) संकष्टी चतुर्थी | 24 जनवरी, 4:28 PM → 26 जनवरी, 11:31 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:56 PM |
| बुधवार, 24 फ़रवरी 2027 | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी | 24 फ़रवरी, 3:19 AM → 25 फ़रवरी, 2:11 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:20 PM |
| गुरुवार, 25 मार्च 2027 | भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी | 24 मार्च, 6:45 PM → 26 मार्च, 6:14 PM | 🌙 चंद्रोदय 8:23 PM |
| शनिवार, 24 अप्रैल 2027 | विकट संकष्टी चतुर्थी | 23 अप्रैल, 8:08 AM → 25 अप्रैल, 10:12 AM | 🌙 चंद्रोदय 7:24 PM |
| सोमवार, 24 मई 2027 | एकदंत संकष्टी चतुर्थी | 24 मई, 1:12 AM → 25 मई, 3:29 AM | 🌙 चंद्रोदय 7:59 PM |
| मंगलवार, 22 जून 2027 | कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 21 जून, 3:06 PM → 23 जून, 8:13 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:47 PM |
| गुरुवार, 22 जुलाई 2027 | गजानन संकष्टी चतुर्थी | 22 जुलाई, 9:17 AM → 23 जुलाई, 11:27 AM | 🌙 चंद्रोदय 8:30 PM |
| शनिवार, 21 अगस्त 2027 | हेरम्ब (बहुला) संकष्टी चतुर्थी | 20 अगस्त, 11:24 PM → 22 अगस्त, 12:35 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:15 PM |
| रविवार, 19 सितंबर 2027 | विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी | 18 सितंबर, 11:14 AM → 20 सितंबर, 11:39 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:12 PM |
| मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027 | वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 18 अक्टूबर, 11:22 PM → 19 अक्टूबर, 10:13 PM | 🌙 चंद्रोदय 11:19 PM |
| बुधवार, 17 नवंबर 2027 | गणाधिप संकष्टी चतुर्थी | 16 नवंबर, 11:12 AM → 18 नवंबर, 7:06 AM | 🌙 चंद्रोदय 11:08 PM |
| गुरुवार, 16 दिसंबर 2027 | आखुरथ संकष्टी चतुर्थी | 15 दिसंबर, 9:44 PM → 17 दिसंबर, 4:05 PM | 🌙 चंद्रोदय 10:35 PM |
स्थानीय चंद्रोदय पर कृष्ण चतुर्थी; किसी दिन न हो तो उदया-तिथि का दिन।
गणेश-पुराण/नारद-पुराण: कृष्ण चतुर्थी को गणेश-व्रत व चंद्र-अर्घ्य से संकट-नाश, ऋण-मुक्ति, विघ्न-निवारण, संतान-सुख; चंद्रमा को गणेश ने कलंक का शाप देकर संकष्टी पर उसी को अर्घ्य का विधान दिया — चंद्र-दर्शन के बिना संकष्टी पूरी नहीं (विनायक चतुर्थी पर उल्टा — चंद्र-दर्शन वर्जित)।
अंगारकी संकष्टी: मंगल (अंगारक) ने गणेश की तपस्या कर वरदान पाया कि मंगलवार की संकष्टी उनके नाम से हो और उसका फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर — इसलिए महाराष्ट्र-कर्नाटक में अंगारकी पर मंदिरों में लाखों (सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, दगडूशेठ)। संकष्टी की तिथि चंद्रोदय-व्यापिनी — जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी हो; विनायक की मध्याह्न-व्यापिनी।
ऑस्ट्रेलिया (सिडनी) में 12। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
सिडनी के लिए 12 में से 3 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
संकष्टी = कृष्ण पक्ष चतुर्थी (पूर्णिमा के बाद) — व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय, चाँद को अर्घ्य देकर पारण, संकट-निवारण; विनायक = शुक्ल पक्ष चतुर्थी (अमावस्या के बाद) — दोपहर में पूजा, चाँद न देखें (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ; ऊपर सूची में दोनों।
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारक (मंगल) की तपस्या से गणेश का वर कि मंगलवार की संकष्टी का फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर; साल में 1-3 बार; महाराष्ट्र में लाखों उपवास व मंदिर-कतार; मंगल-दोष वालों के लिए विशेष; ऊपर सूची में «(अंगारकी)» लिखा मिलेगा।
चंद्रोदय-समय (ऊपर) के बाद चाँद की दिशा (पूर्व) में अर्घ्य दें या थाली में दर्पण/जल में प्रतिबिंब मानकर — पारण मान्य; व्रत पूरा; रात बहुत देर न करें; चंद्रोदय बहुत देर (10 बजे बाद) हो तो रोगी-गर्भवती पहले फलाहार लें।