| तारीख | संकष्टी चतुर्थी | तिथि | चंद्रोदय |
|---|---|---|---|
| सोमवार, 25 जनवरी 2027 | लंबोदर (सकट) संकष्टी चतुर्थी | 25 जनवरी, 5:41 AM → 26 जनवरी, 3:31 AM | 🌙 चंद्रोदय 8:48 PM |
| मंगलवार, 23 फ़रवरी 2027 | द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 22 फ़रवरी, 9:10 PM → 24 फ़रवरी, 6:11 PM | 🌙 चंद्रोदय 8:34 PM |
| गुरुवार, 25 मार्च 2027 | भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी | 24 मार्च, 10:45 AM → 26 मार्च, 10:14 AM | 🌙 चंद्रोदय 9:23 PM |
| शनिवार, 24 अप्रैल 2027 | विकट संकष्टी चतुर्थी | 24 अप्रैल, 1:51 AM → 25 अप्रैल, 3:12 AM | 🌙 चंद्रोदय 10:05 PM |
| रविवार, 23 मई 2027 | एकदंत संकष्टी चतुर्थी | 22 मई, 4:19 PM → 24 मई, 8:29 PM | 🌙 चंद्रोदय 9:36 PM |
| मंगलवार, 22 जून 2027 | कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) | 21 जून, 8:06 AM → 23 जून, 1:13 PM | 🌙 चंद्रोदय 9:28 PM |
| गुरुवार, 22 जुलाई 2027 | गजानन संकष्टी चतुर्थी | 22 जुलाई, 2:17 AM → 23 जुलाई, 4:27 AM | 🌙 चंद्रोदय 8:57 PM |
| शुक्रवार, 20 अगस्त 2027 | हेरम्ब (बहुला) संकष्टी चतुर्थी | 19 अगस्त, 2:46 PM → 21 अगस्त, 5:35 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:56 PM |
| रविवार, 19 सितंबर 2027 | विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी | 19 सितंबर, 4:40 AM → 20 सितंबर, 4:39 AM | 🌙 चंद्रोदय 7:36 PM |
| सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी | 17 अक्टूबर, 4:14 PM → 19 अक्टूबर, 2:13 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:04 PM |
| बुधवार, 17 नवंबर 2027 | गणाधिप संकष्टी चतुर्थी | 17 नवंबर, 1:12 AM → 17 नवंबर, 11:06 PM | 🌙 चंद्रोदय 7:57 PM |
| गुरुवार, 16 दिसंबर 2027 | आखुरथ संकष्टी चतुर्थी | 15 दिसंबर, 1:44 PM → 17 दिसंबर, 8:05 AM | 🌙 चंद्रोदय 8:01 PM |
स्थानीय चंद्रोदय पर कृष्ण चतुर्थी; किसी दिन न हो तो उदया-तिथि का दिन।
गणेश-पुराण/नारद-पुराण: कृष्ण चतुर्थी को गणेश-व्रत व चंद्र-अर्घ्य से संकट-नाश, ऋण-मुक्ति, विघ्न-निवारण, संतान-सुख; चंद्रमा को गणेश ने कलंक का शाप देकर संकष्टी पर उसी को अर्घ्य का विधान दिया — चंद्र-दर्शन के बिना संकष्टी पूरी नहीं (विनायक चतुर्थी पर उल्टा — चंद्र-दर्शन वर्जित)।
अंगारकी संकष्टी: मंगल (अंगारक) ने गणेश की तपस्या कर वरदान पाया कि मंगलवार की संकष्टी उनके नाम से हो और उसका फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर — इसलिए महाराष्ट्र-कर्नाटक में अंगारकी पर मंदिरों में लाखों (सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, दगडूशेठ)। संकष्टी की तिथि चंद्रोदय-व्यापिनी — जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी हो; विनायक की मध्याह्न-व्यापिनी।
कुवैत (कुवैत सिटी) में 12। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
कुवैत सिटी के लिए 12 में से 1 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
संकष्टी = कृष्ण पक्ष चतुर्थी (पूर्णिमा के बाद) — व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय, चाँद को अर्घ्य देकर पारण, संकट-निवारण; विनायक = शुक्ल पक्ष चतुर्थी (अमावस्या के बाद) — दोपहर में पूजा, चाँद न देखें (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ; ऊपर सूची में दोनों।
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारक (मंगल) की तपस्या से गणेश का वर कि मंगलवार की संकष्टी का फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर; साल में 1-3 बार; महाराष्ट्र में लाखों उपवास व मंदिर-कतार; मंगल-दोष वालों के लिए विशेष; ऊपर सूची में «(अंगारकी)» लिखा मिलेगा।
चंद्रोदय-समय (ऊपर) के बाद चाँद की दिशा (पूर्व) में अर्घ्य दें या थाली में दर्पण/जल में प्रतिबिंब मानकर — पारण मान्य; व्रत पूरा; रात बहुत देर न करें; चंद्रोदय बहुत देर (10 बजे बाद) हो तो रोगी-गर्भवती पहले फलाहार लें।