| शहर | तारीख | होलिका दहन मुहूर्त (भद्रा-पुच्छ में — भद्रा अर्धरात्रि के बाद तक) | तिथि (स्थानीय) |
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| मनामा Arabia Standard Time (AST) | रविवार, 21 मार्च 2027 | 10:57 PM – 12:02 AM AST भद्रा-पुच्छ 10:57 PM–12:02 AM · मुख 12:02 AM–1:51 AM | 21 मार्च, 3:52 PM → 22 मार्च, 1:44 PM AST |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
| रंगवाली होली (धुलंडी) | सोमवार, 22 मार्च 2027 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
फाल्गुन पूर्णिमा प्रदोष (स्थानीय सूर्यास्त के बाद) में; भद्रा पृथ्वी-लोक में हो (चंद्र कर्क/सिंह/कुंभ/मीन) तो टालकर; भद्रा अर्धरात्रि पार करे तो भद्रा-पुच्छ में। दूसरे दिन पूर्णिमा सूर्योदय के बाद साढ़े-तीन प्रहर रहे और प्रतिपदा पूर्णिमा से लंबी हो तो दहन दूसरी शाम।
होलिका दहन का नियम: प्रदोष-काल में, पूर्णिमा तिथि में और **भद्रा-रहित** समय में — भद्रा (विष्टि करण) में दहन वर्जित; भद्रा हो तो उसके बाद (या भद्रा-पुच्छ में)। इसीलिए हर साल का मुहूर्त अलग — ऊपर प्रदोष का समय दिया है; भद्रा का समय अपने शहर के पंचांग-पन्ने पर देखें।
होलाष्टक: होली से आठ दिन पहले (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा) मांगलिक कार्य वर्जित — विवाह, गृह-प्रवेश नहीं; होली के बाद चैत्र-नवरात्रि तक फिर मुहूर्त खुलते हैं।
नई फ़सल: दहन की आग में गेहूँ-जौ-चने की हरी बालियाँ भूनकर (होला) प्रसाद खाना और घर लाना — यही «होली» नाम का एक मूल; दहन की राख/अग्नि घर लाकर चूल्हा जलाना शुभ। बुराई (होलिका) जली, भक्ति (प्रह्लाद) बची — यह भाव।
हाँ — रविवार, 21 मार्च 2027।
होलिका दहन मुहूर्त (भद्रा-पुच्छ में — भद्रा अर्धरात्रि के बाद तक): 10:57 PM से 12:02 AM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (मनामा के लिए Arabia Standard Time (AST))।
होली से पहले के आठ दिन (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा) — इनमें विवाह, गृह-प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते; होली के बाद फिर शुरू।
गोबर की छेद वाली छोटी टिकियाँ (सूखी) जिन्हें सूत में पिरोकर मालाएँ बनाई जाती हैं — पितरों, हनुमान जी, शीतला माता, घर के नाम से — और होलिका दहन में चढ़ाई जाती हैं; उत्तर भारत की स्त्रियों की रीत।
होली के पाँचवें दिन (चैत्र कृष्ण पंचमी) महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश में रंगों का मुख्य दिन — इंदौर-उज्जैन की «गेर», मुंबई-पुणे की रंगपंचमी; ब्रज में इस दिन तक फाग चलता है।
होली के 7-8 दिन बाद चैत्र कृष्ण अष्टमी (या सप्तमी) — शीतला माता को एक दिन पहले बना ठंडा भोजन चढ़ाना, उस दिन चूल्हा न जलाना; बच्चों की चेचक-रक्षा का व्रत (पन्ना अलग है)।