| शहर | तारीख | घटस्थापना मुहूर्त (प्रातःकाल) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 7:22 AM – 9:47 AM EDT | 18 मार्च, 9:37 PM → 19 मार्च, 7:23 PM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 7:24 AM – 9:49 AM EDT | 18 मार्च, 9:24 PM → 19 मार्च, 7:23 PM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 7:17 AM – 9:42 AM PDT | 18 मार्च, 6:32 PM → 19 मार्च, 4:23 PM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 7:41 AM – 10:06 AM MDT | 18 मार्च, 7:26 PM → 19 मार्च, 5:23 PM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 7:38 AM – 10:04 AM MDT | 18 मार्च, 7:38 PM → 19 मार्च, 5:23 PM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | गुरुवार, 19 मार्च 2026 | 6:59 AM – 9:24 AM EDT | 18 मार्च, 9:29 PM → 19 मार्च, 7:23 PM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
| राम नवमी | गुरुवार, 26 मार्च 2026 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
स्थानीय सूर्योदय पर प्रतिपदा (उदया तिथि); घटस्थापना दिन के पहले भाग में।
इसी प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि रचना आरंभ की (ब्रह्म-पुराण) — इसीलिए हिन्दू नव-वर्ष; राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत यहीं से चलाया; इसी नवरात्रि की नवमी को श्रीराम का जन्म।
वासंती नवरात्रि ऋतु-संधि (शीत→ग्रीष्म) पर आती है — नौ दिन का संयम, नीम-गुड़-मिश्री (उगादी पच्चड़ी/गुड़ी पड़वा का नीम) शरीर को नई ऋतु के लिए तैयार करता है; यह भी कारण है कि व्रत में फलाहार-सात्विक।
नौ देवियाँ वही — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री; तृतीया को राजस्थान-मालवा में गणगौर, अष्टमी को दुर्गाष्टमी/अशोकाष्टमी, नवमी को राम नवमी (राम-जन्मोत्सव दोपहर 12 बजे)।
हाँ — गुरुवार, 19 मार्च 2026।
घटस्थापना मुहूर्त (प्रातःकाल): 7:22 AM से 9:47 AM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
इस प्रतिपदा से नया विक्रम संवत (ऊपर तिथि-पट्टी में संवत-संख्या) — ईसवी वर्ष + 57; उसके साथ नया संवत्सर-नाम (60 नामों का चक्र); शक संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (या 22 मार्च) से, ईसवी − 78।
सब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (चंद्र-वर्ष का पहला दिन) पर हैं — महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में उगादी, उत्तर में नवरात्रि-घटस्थापना; कभी-कभी अमावस्या की अवधि से एक दिन का अंतर आ जाता है।
देवी-पूजा एक-सी; चैत्र (वासंती) पर नव-वर्ष और राम नवमी जुड़ते हैं, शारदीय पर दशहरा-दुर्गा-पूजा; शारदीय अधिक धूमधाम से, चैत्र अधिक घरेलू-व्रत-प्रधान। दो और गुप्त नवरात्रि (माघ, आषाढ़) साधकों की।
नई ऋतु के लिए शरीर की तैयारी (नीम रक्त-शोधक, गुड़ शक्ति) और जीवन के कड़वे-मीठे को समान भाव से स्वीकारने का प्रतीक — उगादी पच्चड़ी में छह रस इसी का विस्तार।