| शहर | तारीख | पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 7:19 AM–9:13 AM EST | 19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 7:21 AM–9:14 AM EST | 19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 8:33 AM–10:19 AM MST | 19 नवंबर, 6:46 PM → 20 नवंबर, 6:02 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 8:03 AM–9:47 AM MST | 19 नवंबर, 6:46 PM → 20 नवंबर, 6:02 PM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 8:11 AM–9:50 AM MST | 19 नवंबर, 6:46 PM → 20 नवंबर, 6:02 PM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 | — पारण 7:02 AM–8:53 AM EST | 19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर एकादशी (उदया) — स्मार्त नियम; दशमी अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) को छुए तो वैष्णव अगले दिन। पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद, हरि-वासर के बाद व द्वादशी-अंत से पहले।
साल की 24 एकादशियों में देवउठनी सबसे बड़ी मानी जाती है — इसे «भीष्म पंचक» की शुरुआत और चातुर्मास का समापन दोनों माना गया। इस दिन का व्रत हज़ार यज्ञों के फल के बराबर बताया गया है।
तुलसी विवाह घर की कन्या के विवाह जैसा किया जाता है — जिन घरों में बेटी नहीं, वे तुलसी का कन्यादान करके वह पुण्य पाते हैं, ऐसी मान्यता है। तुलसी विवाह के बाद ही घर में विवाह-कार्य शुभ माने जाते हैं।
एकादशी का व्रत सूर्योदय से अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण तक रहता है — इसलिए ऊपर द्वादशी की तिथि भी दी है। पारण द्वादशी में, हरि-वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) बीतने के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले करना चाहिए।
हाँ — शुक्रवार, 20 नवंबर 2026।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
दोनों प्रचलित हैं — उत्तर भारत में प्रायः एकादशी की शाम, महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण में द्वादशी (क्षीराब्धि द्वादशी) या पूर्णिमा तक कोई भी दिन। अपने कुल की रीत मानें।
चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी) में विष्णु शयन में होते हैं, इसलिए मांगलिक कार्य रुके रहते हैं; देव जागते ही तुलसी विवाह पहला विवाह होता है और फिर शादियों का मौसम खुलता है।
देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिन — भीष्म पितामह ने इन्हीं दिनों शर-शय्या पर पांडवों को उपदेश दिया; इन पाँच दिनों का व्रत-दान विशेष फलदायी माना गया।