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अमेरिका में देवउठनी एकादशी 2026: शुक्रवार, 20 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय

अमेरिका में देवउठनी एकादशी 2026: शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 (न्यूयॉर्क)
भारत के दिन ही। 2026 में देवउठनी एकादशी भारत और अमेरिका के सब शहरों में शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को है।

देवउठनी एकादशी 2026 — अमेरिका के सब शहर

शहरतारीखपूजा-समयतिथि (स्थानीय)
न्यूयॉर्क
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:50 AM–8:47 AM EST
19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST
न्यू जर्सी (एडिसन)
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:51 AM–8:48 AM EST
19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST
शिकागो
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:48 AM–8:43 AM CST
19 नवंबर, 7:46 PM → 20 नवंबर, 7:02 PM CST
ह्यूस्टन
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:51 AM–8:57 AM CST
19 नवंबर, 7:46 PM → 20 नवंबर, 7:02 PM CST
डलास
Central Time (CST/CDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 7:03 AM–9:07 AM CST
19 नवंबर, 7:46 PM → 20 नवंबर, 7:02 PM CST
अटलांटा
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 7:15 AM–9:18 AM EST
19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST
वॉशिंगटन डीसी
Eastern Time (EST/EDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:58 AM–8:56 AM EST
19 नवंबर, 8:46 PM → 20 नवंबर, 8:02 PM EST
लॉस एंजेलेस
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:31 AM–8:34 AM PST
19 नवंबर, 5:46 PM → 20 नवंबर, 5:02 PM PST
सैन होज़े (बे एरिया)
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 6:53 AM–8:53 AM PST
19 नवंबर, 5:46 PM → 20 नवंबर, 5:02 PM PST
सिएटल
Pacific Time (PST/PDT)
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026—
पारण 7:24 AM–9:13 AM PST
19 नवंबर, 5:46 PM → 20 नवंबर, 5:02 PM PST

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

देवउठनी एकादशी की तारीख कैसे तय होती है

स्थानीय सूर्योदय पर एकादशी (उदया) — स्मार्त नियम; दशमी अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) को छुए तो वैष्णव अगले दिन। पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद, हरि-वासर के बाद व द्वादशी-अंत से पहले।

महत्व

साल की 24 एकादशियों में देवउठनी सबसे बड़ी मानी जाती है — इसे «भीष्म पंचक» की शुरुआत और चातुर्मास का समापन दोनों माना गया। इस दिन का व्रत हज़ार यज्ञों के फल के बराबर बताया गया है।

तुलसी विवाह घर की कन्या के विवाह जैसा किया जाता है — जिन घरों में बेटी नहीं, वे तुलसी का कन्यादान करके वह पुण्य पाते हैं, ऐसी मान्यता है। तुलसी विवाह के बाद ही घर में विवाह-कार्य शुभ माने जाते हैं।

एकादशी का व्रत सूर्योदय से अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण तक रहता है — इसलिए ऊपर द्वादशी की तिथि भी दी है। पारण द्वादशी में, हरि-वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) बीतने के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले करना चाहिए।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. दशमी की शाम से सात्विक भोजन, एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान और संकल्प — «मैं देवोत्थान एकादशी का व्रत विष्णु-प्रसन्नता व परिवार-कल्याण हेतु करती हूँ।» दिन में अन्न नहीं; फल-दूध या निर्जला, सामर्थ्य से।
  2. सुबह घर के मंदिर में विष्णु/शालिग्राम व लक्ष्मी की पूजा — पीले फूल, तुलसी-दल, पंचामृत, धूप-दीप; विष्णु-सहस्रनाम या «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय» का जप।
  3. आँगन/छत को लीपकर या धोकर गेरू-चावल के आटे से चौक बनाएँ; उस पर भगवान के चरण-चिह्न और सूर्य-चंद्र-तुलसी-शंख-चक्र की आकृतियाँ बनाएँ (कई घर इसे «भगवान के पाँव» कहते हैं)।
  4. शाम को (प्रदोष-काल में, ऊपर समय) उस चौक पर गन्ने का मंडप बनाएँ — 4-5 गन्ने झुकाकर बाँधें; बीच में तुलसी का गमला और शालिग्राम/विष्णु-चित्र; चारों ओर दीये, सिंघाड़ा, मूली, शकरकंद, बेर, आँवला, गन्ना, नई फ़सल (गुड़-खील) रखें।
  5. देव-जगाना: शंख-घंटी बजाकर, थाली/सूप बजाकर गाएँ — «उठो देव, बैठो देव, पाँव पसारो देव… हल्दी-कुमकुम लगाओ देव»; भगवान को स्नान कराकर नए वस्त्र, हल्दी-कुमकुम, तिलक।
  6. तुलसी विवाह: तुलसी को लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर से सजाएँ; शालिग्राम को पीले वस्त्र; दोनों के बीच पर्दा रखकर मंगलाष्टक/विवाह-गीत, फिर पर्दा हटाकर वरमाला, सात फेरे (गमले की परिक्रमा), कन्यादान (घर की स्त्री या दंपत्ति), सिंदूर-दान; लावा-खील और मिठाई का प्रसाद।
  7. आरती — «ॐ जय जगदीश हरे» और तुलसी-आरती; रात-भर घर के दीये और मंडप के दीये जलते रहें।
  8. पारण (व्रत खोलना): द्वादशी को सूर्योदय के बाद, ऊपर दिए पारण-समय में — पहले तुलसी-दल के साथ जल/भोजन, ब्राह्मण/ज़रूरतमंद को भोजन-दान, फिर स्वयं; एकादशी का पारण द्वादशी के भीतर ज़रूरी है।

प्रश्नोत्तर

क्या देवउठनी एकादशी 2026 अमेरिका और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — शुक्रवार, 20 नवंबर 2026।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (न्यूयॉर्क के लिए Eastern Time (EST/EDT))।

तुलसी विवाह एकादशी को करें या द्वादशी को?

दोनों प्रचलित हैं — उत्तर भारत में प्रायः एकादशी की शाम, महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण में द्वादशी (क्षीराब्धि द्वादशी) या पूर्णिमा तक कोई भी दिन। अपने कुल की रीत मानें।

देवउठनी के बाद विवाह क्यों शुरू होते हैं?

चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी) में विष्णु शयन में होते हैं, इसलिए मांगलिक कार्य रुके रहते हैं; देव जागते ही तुलसी विवाह पहला विवाह होता है और फिर शादियों का मौसम खुलता है।

भीष्म पंचक क्या है?

देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिन — भीष्म पितामह ने इन्हीं दिनों शर-शय्या पर पांडवों को उपदेश दिया; इन पाँच दिनों का व्रत-दान विशेष फलदायी माना गया।

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