| शहर | तारीख | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 5:25 PM – 7:11 PM EST | 6 नवंबर, 12:01 AM → 7 नवंबर, 12:18 AM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 5:26 PM – 7:12 PM EST | 6 नवंबर, 12:01 AM → 7 नवंबर, 12:18 AM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 6:02 PM – 7:42 PM MST | 5 नवंबर, 10:01 PM → 6 नवंबर, 10:18 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 5:20 PM – 6:58 PM MST | 5 नवंबर, 10:01 PM → 6 नवंबर, 10:18 PM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 5:07 PM – 6:41 PM MST | 5 नवंबर, 10:01 PM → 6 नवंबर, 10:18 PM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 4:56 PM – 6:41 PM EST | 6 नवंबर, 12:01 AM → 7 नवंबर, 12:18 AM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद के प्रदोष-काल में अमावस्या तिथि हो; लक्ष्मी-पूजा प्रदोष-काल में स्थिर वृषभ लग्न में।
धन + तेरस = त्रयोदशी को धन की पूजा। मान्यता है कि इस दिन ख़रीदी धातु/वस्तु तेरह गुना बढ़ती है — इसलिए बर्तन (विशेषकर पीतल-ताँबा-चाँदी), सोना और नया सामान लेने का चलन है। झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक मानकर ख़रीदा जाता है और धनिया के बीज दीवाली के बाद बोए जाते हैं।
यम-दीपदान: कथा के अनुसार इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के लिए दीपक जलाने से परिवार पर अकाल-मृत्यु का संकट टलता है — यह इस दिन की सबसे ज़रूरी घरेलू रीत है, जो ख़रीदारी की चमक में अक्सर छूट जाती है।
हाँ — शुक्रवार, 6 नवंबर 2026।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 5:25 PM से 7:11 PM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
धातु का बर्तन (पीतल-ताँबा-चाँदी), सोना-चाँदी का सिक्का/गहना, नई झाड़ू, धनिया, दीये, रसोई का नया बर्तन। ख़रीद श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार — एक छोटा बर्तन या झाड़ू भी पर्याप्त है।
अनिवार्य नहीं; कई स्त्रियाँ त्रयोदशी का प्रदोष-व्रत रखती हैं — दिन में फल, प्रदोष-पूजा के बाद भोजन। धन्वंतरि-पूजा और यम-दीपक बिना व्रत के भी पूर्ण मान्य हैं।