| शहर | तारीख | चंद्रोदय (करवा चौथ का चाँद) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 8:05 PM EDT | 18 अक्टूबर, 8:22 AM → 19 अक्टूबर, 7:13 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 8:06 PM EDT | 18 अक्टूबर, 8:22 AM → 19 अक्टूबर, 7:13 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 7:39 PM MST | 18 अक्टूबर, 5:22 AM → 19 अक्टूबर, 4:13 AM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 7:51 PM MDT | 18 अक्टूबर, 6:22 AM → 19 अक्टूबर, 5:13 AM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 7:32 PM MDT | 18 अक्टूबर, 6:22 AM → 19 अक्टूबर, 5:13 AM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 | 7:33 PM EDT | 18 अक्टूबर, 8:22 AM → 19 अक्टूबर, 7:13 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय चंद्रोदय पर कार्तिक कृष्ण चतुर्थी हो; चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खुलता है।
करवा का अर्थ है मिट्टी का छोटा घड़ा (टोंटीदार लोटा) और चौथ यानी चतुर्थी तिथि। इस दिन गणेश जी, शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो स्त्री श्रद्धा से यह व्रत रखती है, उसके पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य-जीवन में प्रेम बना रहता है।
हाँ — सोमवार, 18 अक्टूबर 2027।
चंद्रोदय (करवा चौथ का चाँद): 8:05 PM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
ऊपर «चंद्रोदय» में दिल्ली का समय है। पूर्व के शहरों (लखनऊ, पटना) में चाँद कुछ मिनट पहले और पश्चिम (जयपुर, मुंबई) में कुछ मिनट बाद निकलता है — अपने शहर का समय पंचांग-पन्ने पर देखें।
चंद्रोदय के समय के बाद चंद्रमा की दिशा (पूर्व) की ओर मुख करके अर्घ्य दे दें और शिव जी के मस्तक के चंद्रमा का स्मरण करें। कई परिवार ऐसी स्थिति में तुलसी या मंदिर के शिखर को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं।
हाँ, अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ भी व्रत रखती हैं; वे चंद्रमा की जगह तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं और छलनी से चाँद नहीं देखतीं।
फल, दूध और जल लेकर व्रत रखें — शास्त्रों में रोगी, गर्भवती व वृद्ध के लिए यह छूट है। श्रद्धा से कथा सुनना और चंद्र-अर्घ्य देना ही मुख्य है।