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ऑस्ट्रेलिया में करवा चौथ 2027: मंगलवार, 19 अक्टूबर — शहर-वार पूजा-समय

ऑस्ट्रेलिया में करवा चौथ 2027: मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027 (सिडनी)
चंद्रोदय (करवा चौथ का चाँद): 11:19 PM AEDT
भारत से अलग। भारत में करवा चौथ 2027 सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को है; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027 — एक दिन बाद। कारण: जिस दिन स्थानीय चंद्रोदय पर कार्तिक कृष्ण चतुर्थी हो; चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खुलता है। सिडनी में तिथि स्थानीय समय 10:13 PM AEDT पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है। ध्यान दें: इस वर्ष सब शहरों की तारीख एक नहीं — सारणी देखें।

करवा चौथ 2027 — ऑस्ट्रेलिया के सब शहर

शहरतारीखचंद्रोदय (करवा चौथ का चाँद)तिथि (स्थानीय)
सिडनी
AEST/AEDT
मंगलवार, 19 अक्टूबर 202711:19 PM AEDT18 अक्टूबर, 11:22 PM → 19 अक्टूबर, 10:13 PM AEDT
मेलबर्न
AEST/AEDT
मंगलवार, 19 अक्टूबर 202711:59 PM AEDT18 अक्टूबर, 11:22 PM → 19 अक्टूबर, 10:13 PM AEDT
ब्रिस्बेन
AEST
मंगलवार, 19 अक्टूबर 20279:52 PM AEST18 अक्टूबर, 10:22 PM → 19 अक्टूबर, 9:13 PM AEST
पर्थ
AWST
सोमवार, 18 अक्टूबर 20279:36 PM AWST18 अक्टूबर, 8:22 PM → 19 अक्टूबर, 7:13 PM AWST
एडिलेड
ACST/ACDT
मंगलवार, 19 अक्टूबर 202711:45 PM ACDT18 अक्टूबर, 10:52 PM → 19 अक्टूबर, 9:43 PM ACDT

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

करवा चौथ की तारीख कैसे तय होती है

जिस दिन स्थानीय चंद्रोदय पर कार्तिक कृष्ण चतुर्थी हो; चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खुलता है।

महत्व

करवा का अर्थ है मिट्टी का छोटा घड़ा (टोंटीदार लोटा) और चौथ यानी चतुर्थी तिथि। इस दिन गणेश जी, शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो स्त्री श्रद्धा से यह व्रत रखती है, उसके पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य-जीवन में प्रेम बना रहता है।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में) स्नान करके सास की दी हुई सरगी — फेनी, मिठाई, फल, मेवे, मठरी — खाएँ और जल पिएँ। सरगी के बाद पूरे दिन अन्न-जल नहीं लिया जाता।
  2. संकल्प लें: «मैं अपने पति की दीर्घायु व सौभाग्य के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत करती हूँ।»
  3. दिन में सोलह श्रृंगार करें — लाल/गुलाबी साड़ी या लहँगा, मेहंदी, चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, पायल, बिछिया।
  4. शाम को पूजा-स्थान पर दीवार या पटरे पर करवा चौथ का कैलेंडर/चित्र (गौरी, गणेश, चंद्रमा, करवा) लगाएँ। मिट्टी या ताँबे के करवे में जल भरकर उस पर ढक्कन में चावल-शक्कर रखें; करवे पर स्वस्तिक बनाएँ, मौली बाँधें।
  5. थाली सजाएँ — दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई, फल, सुहाग का सामान, सींक (करवे में डालने के लिए), छलनी।
  6. सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में, मोहल्ले-परिवार की सुहागिनें एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और थाली फेरती हैं (फेरी) — हर फेरी पर «वीरो कुड़िए करवड़ा…» या «करवा चौथ माता की जय» का गीत।
  7. गणेश जी, शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा करें; करवे का जल चंद्रमा को अर्पित करने के लिए अलग रखें।
  8. चंद्रोदय होने पर (ऊपर दिया समय) छत या आँगन में चंद्रमा को छलनी से देखें, फिर उसी छलनी से पति का मुख देखें। ताँबे/मिट्टी के करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दें और दीपक दिखाएँ।
  9. पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें। पति के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
  10. सास (या घर की बड़ी सुहागिन) को बाया — सूखे मेवे, कपड़े, श्रृंगार का सामान, मिठाई — देकर पैर छुएँ। फिर परिवार के साथ भोजन करें।

प्रश्नोत्तर

क्या करवा चौथ 2027 ऑस्ट्रेलिया और भारत में एक ही दिन है?

नहीं। भारत: सोमवार, 18 अक्टूबर 2027; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।

सिडनी में करवा चौथ 2027 का पूजा-समय?

चंद्रोदय (करवा चौथ का चाँद): 11:19 PM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।

करवा चौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा?

ऊपर «चंद्रोदय» में दिल्ली का समय है। पूर्व के शहरों (लखनऊ, पटना) में चाँद कुछ मिनट पहले और पश्चिम (जयपुर, मुंबई) में कुछ मिनट बाद निकलता है — अपने शहर का समय पंचांग-पन्ने पर देखें।

चाँद न दिखे तो क्या करें?

चंद्रोदय के समय के बाद चंद्रमा की दिशा (पूर्व) की ओर मुख करके अर्घ्य दे दें और शिव जी के मस्तक के चंद्रमा का स्मरण करें। कई परिवार ऐसी स्थिति में तुलसी या मंदिर के शिखर को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं।

क्या कुँवारी लड़कियाँ करवा चौथ रख सकती हैं?

हाँ, अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ भी व्रत रखती हैं; वे चंद्रमा की जगह तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं और छलनी से चाँद नहीं देखतीं।

गर्भवती या बीमार महिला व्रत कैसे रखे?

फल, दूध और जल लेकर व्रत रखें — शास्त्रों में रोगी, गर्भवती व वृद्ध के लिए यह छूट है। श्रद्धा से कथा सुनना और चंद्र-अर्घ्य देना ही मुख्य है।

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