| शहर | तारीख | निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 12:05 AM – 12:58 AM EST | 15 फ़रवरी, 6:35 AM → 16 फ़रवरी, 7:05 AM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 12:06 AM – 12:59 AM EST | 15 फ़रवरी, 6:35 AM → 16 फ़रवरी, 7:05 AM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 11:58 PM – 12:54 AM PST | 15 फ़रवरी, 3:35 AM → 16 फ़रवरी, 4:05 AM PST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 12:22 AM – 1:18 AM MST | 15 फ़रवरी, 4:35 AM → 16 फ़रवरी, 5:05 AM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 12:19 AM – 1:16 AM MST | 15 फ़रवरी, 4:35 AM → 16 फ़रवरी, 5:05 AM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 11:40 PM – 12:35 AM EST | 15 फ़रवरी, 6:35 AM → 16 फ़रवरी, 7:05 AM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन के निशीथ-काल (स्थानीय रात्रि का मध्य) में तिथि हो।
शिवरात्रि की पूजा रात में होती है — विशेषकर निशीथ-काल (मध्य-रात्रि, ऊपर समय) में, जब शिव-पार्वती का विवाह/लिंगोद्भव माना गया। इसलिए तिथि वही दिन है जिस रात निशीथ में चतुर्दशी हो।
चार प्रहर की पूजा: पहला प्रहर सूर्यास्त से (दूध से अभिषेक), दूसरा (दही), तीसरा (घी), चौथा (शहद/जल) — हर प्रहर में बेलपत्र, धूप-दीप, «ॐ नमः शिवाय»; एक प्रहर भी कर सकें तो पहला या निशीथ का।
यह व्रत मोक्ष-दायक और वैवाहिक जीवन के लिए विशेष माना गया — पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत रखा था; मांगलिक-दोष/विवाह-बाधा वाली कन्याओं के लिए शिवरात्रि का व्रत उपाय के रूप में बताया जाता है।
हाँ — रविवार, 15 फ़रवरी 2026।
निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि): 12:05 AM से 12:58 AM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
तीन पत्तियों वाला साबुत, कटा-फटा नहीं; चिकनी सतह शिवलिंग की ओर, डंठल अपनी ओर; अनामिका-अँगूठे से; जल की धार के साथ «ॐ नमः शिवाय»। बेलपत्र न मिले तो पहले चढ़ा हुआ धोकर दोबारा चढ़ा सकते हैं (शास्त्र-मान्य)।
पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत रखा था — इसलिए मनचाहे/उत्तम वर के लिए; विवाह में देरी या मांगलिक-दोष में शिवरात्रि व सोलह सोमवार का व्रत उपाय के रूप में बताया जाता है।
हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है (रात्रि-पूजा); फाल्गुन की चतुर्दशी «महा» — शिव-पार्वती विवाह और लिंगोद्भव की रात, साल की मुख्य।