सिंगापुर में महाशिवरात्रि 2026: रविवार, 15 फ़रवरी — शहर-वार पूजा-समय
सिंगापुर में महाशिवरात्रि 2026: रविवार, 15 फ़रवरी 2026 (सिंगापुर)
निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि): 12:55 AM – 1:43 AM SGT
भारत के दिन ही। 2026 में महाशिवरात्रि भारत और सिंगापुर में रविवार, 15 फ़रवरी 2026 को है।
महाशिवरात्रि 2026 — सिंगापुर
| शहर | तारीख | निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि) | तिथि (स्थानीय) |
|---|
सिंगापुर Singapore Time (SGT) | रविवार, 15 फ़रवरी 2026 | 12:55 AM – 1:43 AM SGT | 15 फ़रवरी, 7:35 PM → 16 फ़रवरी, 8:05 PM SGT |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
महाशिवरात्रि की तारीख कैसे तय होती है
जिस दिन के निशीथ-काल (स्थानीय रात्रि का मध्य) में तिथि हो।
महत्व
शिवरात्रि की पूजा रात में होती है — विशेषकर निशीथ-काल (मध्य-रात्रि, ऊपर समय) में, जब शिव-पार्वती का विवाह/लिंगोद्भव माना गया। इसलिए तिथि वही दिन है जिस रात निशीथ में चतुर्दशी हो।
चार प्रहर की पूजा: पहला प्रहर सूर्यास्त से (दूध से अभिषेक), दूसरा (दही), तीसरा (घी), चौथा (शहद/जल) — हर प्रहर में बेलपत्र, धूप-दीप, «ॐ नमः शिवाय»; एक प्रहर भी कर सकें तो पहला या निशीथ का।
यह व्रत मोक्ष-दायक और वैवाहिक जीवन के लिए विशेष माना गया — पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत रखा था; मांगलिक-दोष/विवाह-बाधा वाली कन्याओं के लिए शिवरात्रि का व्रत उपाय के रूप में बताया जाता है।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- सुबह स्नान, संकल्प — «मैं महाशिवरात्रि का व्रत (निर्जला/फलाहार) शिव-कृपा व दांपत्य-सुख/उत्तम वर हेतु करती हूँ; कल सुबह पारण करूँगी।»
- दिन में शिव-मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल-दूध-बेलपत्र; घर पर पूजा हो तो मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाएँ (या घर का शिवलिंग/चित्र); पूजा-स्थान उत्तर/पूर्व मुख।
- शाम — पहला प्रहर (सूर्यास्त से, ऊपर प्रदोष-समय): शिवलिंग को जल फिर दूध से अभिषेक, बेलपत्र (3 पत्तियों वाला, उल्टा — चिकनी ओर लिंग पर), धतूरा, भाँग, आक, सफ़ेद फूल, चंदन, अक्षत, भस्म; «ॐ नमः शिवाय» 108; शिव-चालीसा/रुद्राष्टक; आरती «ॐ जय शिव ओंकारा»।
- दूसरा प्रहर (रात ~9): दही से अभिषेक, बेलपत्र, मंत्र; तीसरा प्रहर (निशीथ ~12, ऊपर समय — मुख्य): घी/शहद से अभिषेक, शिव-पार्वती विवाह का स्मरण, «शिवाय नमः» जाप, यही मुख्य पूजा; चौथा प्रहर (~3 बजे): जल-गंगाजल, अंतिम आरती।
- पार्वती जी को भी पूजें — सुहाग की चीज़ें (चूड़ी, सिंदूर, चुनरी) चढ़ाएँ — विवाहित पति की आयु, कुँवारी उत्तम वर की कामना से।
- रात-जागरण — शिव-भजन, शिव-पुराण/शिवरात्रि-कथा, महामृत्युंजय जप; सो न सकें तो कम-से-कम निशीथ की पूजा तक जागें।
- पारण: अगली सुबह (अमावस्या से पहले, चतुर्दशी समाप्त होने के बाद) स्नान करके शिव को प्रणाम, ब्राह्मण/ज़रूरतमंद को भोजन-दान, फिर स्वयं भोजन; कई घर सुबह पूजा के बाद फलाहार से पारण करते हैं।
- पार्थिव शिवलिंग व चढ़ा हुआ बेलपत्र-फूल जल/पौधे में विसर्जित करें; शिव का प्रसाद (शिव-निर्माल्य) परंपरा में खाया नहीं जाता — भोग अलग रखा प्रसाद ही बाँटें।
प्रश्नोत्तर
क्या महाशिवरात्रि 2026 सिंगापुर और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — रविवार, 15 फ़रवरी 2026।
सिंगापुर में महाशिवरात्रि 2026 का पूजा-समय?
निशीथ काल पूजा (अर्धरात्रि): 12:55 AM से 1:43 AM (SGT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सिंगापुर के लिए Singapore Time (SGT))।
बेलपत्र कैसे चढ़ाएँ?
तीन पत्तियों वाला साबुत, कटा-फटा नहीं; चिकनी सतह शिवलिंग की ओर, डंठल अपनी ओर; अनामिका-अँगूठे से; जल की धार के साथ «ॐ नमः शिवाय»। बेलपत्र न मिले तो पहले चढ़ा हुआ धोकर दोबारा चढ़ा सकते हैं (शास्त्र-मान्य)।
कुँवारी कन्याएँ यह व्रत क्यों रखती हैं?
पार्वती ने शिव को पाने के लिए यही व्रत रखा था — इसलिए मनचाहे/उत्तम वर के लिए; विवाह में देरी या मांगलिक-दोष में शिवरात्रि व सोलह सोमवार का व्रत उपाय के रूप में बताया जाता है।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि में क्या अंतर?
हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है (रात्रि-पूजा); फाल्गुन की चतुर्दशी «महा» — शिव-पार्वती विवाह और लिंगोद्भव की रात, साल की मुख्य।
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