| तारीख | पूर्णिमा | तिथि | नोट |
|---|---|---|---|
| शनिवार, 3 जनवरी 2026 | पौष पूर्णिमा व्रत | 2 जनवरी, 9:24 PM → 3 जनवरी, 6:03 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| रविवार, 1 फ़रवरी 2026 | माघ पूर्णिमा व्रत | 31 जनवरी, 10:56 AM → 2 फ़रवरी, 6:09 AM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| मंगलवार, 3 मार्च 2026 | फाल्गुन पूर्णिमा व्रत | 2 मार्च, 8:26 PM → 3 मार्च, 7:38 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| बुधवार, 1 अप्रैल 2026 | चैत्र पूर्णिमा व्रत | 1 अप्रैल, 9:37 AM → 2 अप्रैल, 10:12 AM | स्नान-दान (उदया): 2 अप्रैल |
| शुक्रवार, 1 मई 2026 | वैशाख पूर्णिमा व्रत | 30 अप्रैल, 11:43 PM → 2 मई, 1:23 AM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| रविवार, 31 मई 2026 | ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत | 30 मई, 2:28 PM → 31 मई, 4:45 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| सोमवार, 29 जून 2026 | ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत | 29 जून, 5:37 AM → 30 जून, 7:57 AM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| बुधवार, 29 जुलाई 2026 | आषाढ़ पूर्णिमा व्रत | 28 जुलाई, 8:49 PM → 29 जुलाई, 10:36 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| गुरुवार, 27 अगस्त 2026 | श्रावण पूर्णिमा व्रत | 27 अगस्त, 11:39 AM → 28 अगस्त, 12:19 PM | स्नान-दान (उदया): 28 अगस्त |
| शनिवार, 26 सितंबर 2026 | भाद्रपद पूर्णिमा व्रत | 26 सितंबर, 1:37 AM → 27 सितंबर, 12:49 AM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 | आश्विन पूर्णिमा व्रत | 25 अक्टूबर, 2:27 PM → 26 अक्टूबर, 12:12 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | कार्तिक पूर्णिमा व्रत | 24 नवंबर, 2:13 AM → 24 नवंबर, 10:54 PM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
| गुरुवार, 24 दिसंबर 2026 | मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत | 23 दिसंबर, 1:18 PM → 24 दिसंबर, 9:28 AM | व्रत व स्नान-दान एक दिन |
व्रत/सत्यनारायण-पूजा जिस दिन स्थानीय मध्याह्न में पूर्णिमा; स्नान-दान उदया-तिथि के दिन।
पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्ण-बली — मन (चंद्र) पर प्रभाव तीव्र, इसलिए व्रत-संयम व चंद्र-अर्घ्य; विष्णु-पूजा व सत्यनारायण-कथा (स्कंद-पुराण, रेवा-खंड) का सबसे शुभ दिन — कथा किसी भी दिन हो सकती है पर पूर्णिमा व संक्रांति श्रेष्ठ; पूर्णिमा-स्नान (गंगा-यमुना-नर्मदा) व दान का फल गुना।
व्रत-नियम: पूर्णिमा उदया-तिथि या चंद्रोदय-व्यापिनी — उपवास उदया-तिथि वाले दिन, सत्यनारायण-कथा व चंद्र-अर्घ्य उस शाम जब पूर्णिमा चंद्रोदय के समय हो (प्रायः वही दिन; कभी एक दिन पहले — ऊपर सूची उदया-नियम से, तिथि-खिड़की देखकर कथा की शाम चुनें); पारण चंद्र-दर्शन के बाद या अगली सुबह।
सिंगापुर (सिंगापुर) में 13। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
सिंगापुर के लिए 13 में से 3 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
कथा किसी भी शुभ दिन हो सकती है (गृह-प्रवेश, विवाह, जन्मदिन, मन्नत-पूर्ति) — पर पूर्णिमा, संक्रांति, एकादशी व गुरुवार श्रेष्ठ; पूर्णिमा को विष्णु-लक्ष्मी व चंद्र दोनों बली; मासिक कथा का संकल्प हो तो हर पूर्णिमा की शाम; पंडित न हों तो घर का कोई भी पढ़ सकता है।
सत्यनारायण-कथा में «सवाया» प्रसाद (सवा पाव/सवा किलो/सवा पाँच) — पूर्णता से थोड़ा अधिक — कृतज्ञता व वृद्धि का प्रतीक; कथा में साधु-वैश्य ने मन्नत भूलकर कष्ट पाया, इसलिए मन्नत का प्रसाद सवाया; पंजीरी (सूजी-घी-शक्कर-केला-तुलसी) का माप, पंचामृत भी सवा।
हाँ — पूर्णिमा को एकादशी जैसा चावल-वर्जन नहीं; व्रत में फलाहार (फल-दूध-साबूदाना-मखाना), चंद्र-दर्शन के बाद खीर-पूड़ी-सब्ज़ी-चावल; निर्जला केवल स्वस्थ व संकल्पित; प्रसाद (पंजीरी-पंचामृत) पहले।