| तारीख | प्रदोष व्रत | पूजा-समय |
|---|---|---|
| गुरुवार, 1 जनवरी 2026 | गुरु प्रदोष (पौष शुक्ल) | प्रदोष काल 7:10 PM – 9:33 PM |
| शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 | शुक्र प्रदोष (माघ कृष्ण) | प्रदोष काल 7:16 PM – 9:39 PM |
| शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 | शुक्र प्रदोष (माघ शुक्ल) | प्रदोष काल 7:20 PM – 9:43 PM |
| शनिवार, 14 फ़रवरी 2026 | शनि प्रदोष (फाल्गुन कृष्ण) | प्रदोष काल 7:21 PM – 9:44 PM |
| रविवार, 1 मार्च 2026 | रवि प्रदोष (फाल्गुन शुक्ल) | प्रदोष काल 7:20 PM – 9:40 PM |
| सोमवार, 16 मार्च 2026 | सोम प्रदोष (चैत्र कृष्ण) | प्रदोष काल 7:16 PM – 9:39 PM |
| सोमवार, 30 मार्च 2026 | सोम प्रदोष (चैत्र शुक्ल) | प्रदोष काल 7:13 PM – 9:35 PM |
| बुधवार, 15 अप्रैल 2026 | बुध प्रदोष (वैशाख कृष्ण) | प्रदोष काल 7:09 PM – 9:31 PM |
| बुधवार, 29 अप्रैल 2026 | बुध प्रदोष (वैशाख शुक्ल) | प्रदोष काल 7:07 PM – 9:29 PM |
| गुरुवार, 14 मई 2026 | गुरु प्रदोष (ज्येष्ठ कृष्ण) | प्रदोष काल 7:06 PM – 9:28 PM |
| गुरुवार, 28 मई 2026 | गुरु प्रदोष (ज्येष्ठ शुक्ल) | प्रदोष काल 7:08 PM – 9:30 PM |
| शनिवार, 27 जून 2026 | शनि प्रदोष (ज्येष्ठ शुक्ल) | प्रदोष काल 7:14 PM – 9:36 PM |
| रविवार, 12 जुलाई 2026 | रवि प्रदोष (आषाढ़ कृष्ण) | प्रदोष काल 7:16 PM – 9:38 PM |
| रविवार, 26 जुलाई 2026 | रवि प्रदोष (आषाढ़ शुक्ल) | प्रदोष काल 7:17 PM – 9:39 PM |
| सोमवार, 10 अगस्त 2026 | सोम प्रदोष (श्रावण कृष्ण) | प्रदोष काल 7:15 PM – 9:37 PM |
| मंगलवार, 25 अगस्त 2026 | भौम प्रदोष (श्रावण शुक्ल) | प्रदोष काल 7:11 PM – 9:33 PM |
| मंगलवार, 8 सितंबर 2026 | भौम प्रदोष (भाद्रपद कृष्ण) | प्रदोष काल 7:06 PM – 9:28 PM |
| गुरुवार, 24 सितंबर 2026 | गुरु प्रदोष (भाद्रपद शुक्ल) | प्रदोष काल 7:00 PM – 9:23 PM |
| गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 | गुरु प्रदोष (आश्विन कृष्ण) | प्रदोष काल 6:55 PM – 9:18 PM |
| शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | शुक्र प्रदोष (आश्विन शुक्ल) | प्रदोष काल 6:51 PM – 9:14 PM |
| शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | शुक्र प्रदोष (कार्तिक कृष्ण) | प्रदोष काल 6:50 PM – 9:13 PM |
| रविवार, 22 नवंबर 2026 | रवि प्रदोष (कार्तिक शुक्ल) | प्रदोष काल 6:52 PM – 9:15 PM |
| रविवार, 6 दिसंबर 2026 | रवि प्रदोष (मार्गशीर्ष कृष्ण) | प्रदोष काल 6:57 PM – 9:21 PM |
| सोमवार, 21 दिसंबर 2026 | सोम प्रदोष (मार्गशीर्ष शुक्ल) | प्रदोष काल 8:07 PM – 9:28 PM |
प्रदोष-काल (सूर्यास्त से रात्रि के पाँचवें भाग तक) में त्रयोदशी; दो संध्याओं में हो तो अधिक देर वाली।
प्रदोष-काल का महत्त्व: समुद्र-मंथन में विष पीकर शिव त्रयोदशी के प्रदोष में स्वस्थ हुए/देवताओं ने इसी काल में शिव की स्तुति की (स्कंद-पुराण); त्रयोदशी में प्रदोष-व्यापिनी तिथि का दिन व्रत का — यदि त्रयोदशी शाम को शुरू हो तो वही दिन, सुबह से हो पर सूर्यास्त से पहले ख़त्म तो पिछला दिन; ऊपर की तिथियाँ प्रदोष-नियम से।
वार-भेद: रवि प्रदोष — आयु-आरोग्य; सोम — इच्छा-पूर्ति, मन-शांति; भौम — ऋण-रोग-मुक्ति, मंगल-दोष; बुध — विद्या-बुद्धि; गुरु — शत्रु-नाश, पितृ-कृपा; शुक्र — सौभाग्य-धन; शनि प्रदोष — संतान-प्राप्ति, शनि-साढ़ेसाती-शांति (सबसे प्रसिद्ध — शनिवार का प्रदोष)।
सिंगापुर (सिंगापुर) में 24। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
सिंगापुर के लिए 24 में से 1 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
वार से फल: सोम (सोमवार) — मनोकामना व चंद्र-शांति; भौम (मंगलवार) — ऋण-रोग-मुक्ति, मंगल-दोष; शनि (शनिवार) — संतान, शनि-साढ़ेसाती-शांति; रवि — आयु; बुध — विद्या; गुरु — शत्रु-नाश; शुक्र — धन-सौभाग्य; विधि वही, दान वार-अनुसार; ऊपर सूची में हर तिथि का वार-नाम।
जिस दिन प्रदोष-काल (सूर्यास्त के बाद) में त्रयोदशी तिथि हो — प्रदोष-व्यापिनी; दोनों दिन हो तो पहला दिन; न किसी दिन हो (त्रयोदशी दोपहर में ख़त्म) तो जिस दिन अधिक — ऊपर सूची इसी नियम से बनी है।
हाँ — सुहाग-रक्षा, संतान (शनि प्रदोष 11 बार), पति-स्वास्थ्य, मन-शांति (सोम प्रदोष); पार्वती-पूजन विशेष; मासिक-धर्म में पूजा नहीं, स्मरण-जप; गर्भवती फलाहार; कन्याएँ मनचाहे वर हेतु सोम प्रदोष व सावन-सोमवार।