| शहर | तारीख | पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 7:48 AM – 5:05 PM EST | 14 जनवरी, 7:23 AM → 15 जनवरी, 9:47 AM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 7:50 AM – 5:07 PM EST | 14 जनवरी, 7:23 AM → 15 जनवरी, 9:47 AM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 8:03 AM – 4:41 PM PST | 14 जनवरी, 4:23 AM → 15 जनवरी, 6:47 AM PST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 8:34 AM – 4:57 PM MST | 14 जनवरी, 5:23 AM → 15 जनवरी, 7:47 AM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 8:43 AM – 4:44 PM MST | 14 जनवरी, 5:23 AM → 15 जनवरी, 7:47 AM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 7:31 AM – 4:36 PM EST | 14 जनवरी, 7:23 AM → 15 जनवरी, 9:47 AM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
सूर्य का मकर (निरयण) में प्रवेश — सौर घटना, इसलिए तारीख लगभग सब जगह एक; मध्यरात्रि के पास हो तो बदल सकती है।
उत्तरायण देवताओं का दिन माना गया है — भीष्म पितामह ने शर-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी और मकर संक्रांति के बाद देह छोड़ी। इस दिन का स्नान-दान (विशेषकर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल) अक्षय-फल देता है।
पुण्यकाल: संक्रांति के क्षण से उस दिन सूर्यास्त तक (या 16 घटी); संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो अगला दिन पर्व-दिन। इसीलिए कभी 14 और कभी 15 जनवरी — ऊपर दी तिथि इंजन से है। महापुण्यकाल संक्रांति के तुरंत बाद की लगभग 2 घटी (48 मिनट)।
स्त्रियों की रीत: तिल-गुड़ बाँटना («तिळगुळ घ्या, गोड बोला»), हल्दी-कुमकुम, सुहागिनों को बायना/वाण देना, नई बहू-बच्चे को «बोरन्हाण»; बिहार-पूर्वांचल में दही-चूड़ा-तिलकुट, घर की बड़ी स्त्री सबको तिल देकर आशीर्वाद।
हाँ — बुधवार, 14 जनवरी 2026।
पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी): 7:48 AM से 5:05 PM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
तिल और गुड़ ठंड में गर्मी और शक्ति देते हैं (आयुर्वेद); कथा में शनि ने पिता सूर्य का स्वागत तिल-गुड़ से किया; तिल का दान पितरों-मोक्ष से जुड़ा है — इसलिए खाओ, बाँटो, दान करो।
सब सूर्य के मकर-प्रवेश और नई फ़सल के उत्सव हैं — लोहड़ी एक रात पहले (पंजाब), पोंगल चार दिन (तमिलनाडु), माघ बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (यूपी-बिहार) — नाम और पकवान अलग, सूर्य एक।
सूर्य के धनु राशि में रहने का महीना (दिसंबर-मध्य से मकर संक्रांति तक) खरमास/मलमास — विवाह-गृहप्रवेश वर्जित; मकर-प्रवेश से उत्तरायण और शुभ कार्य फिर शुरू। विवाह-तिथियाँ मुहूर्त-पन्ने पर।