| शहर | तारीख | पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिडनी AEST/AEDT | गुरुवार, 15 जनवरी 2026 | 6:00 AM – 8:09 PM AEDT | 14 जनवरी, 11:23 PM → 16 जनवरी, 1:47 AM AEDT |
| मेलबर्न AEST/AEDT | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 8:35 PM – 8:44 PM AEDT पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक) | 13 जनवरी, 8:48 PM → 14 जनवरी, 11:23 PM AEDT |
| ब्रिस्बेन AEST | गुरुवार, 15 जनवरी 2026 | 5:06 AM – 6:48 PM AEST | 14 जनवरी, 10:23 PM → 16 जनवरी, 12:47 AM AEST |
| पर्थ AWST | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 5:35 PM – 7:26 PM AWST पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक) | 13 जनवरी, 5:48 PM → 14 जनवरी, 8:23 PM AWST |
| एडिलेड ACST/ACDT | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 8:05 PM – 8:32 PM ACDT पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक) | 13 जनवरी, 8:18 PM → 14 जनवरी, 10:53 PM ACDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
सूर्य का मकर (निरयण) में प्रवेश — सौर घटना, इसलिए तारीख लगभग सब जगह एक; मध्यरात्रि के पास हो तो बदल सकती है।
उत्तरायण देवताओं का दिन माना गया है — भीष्म पितामह ने शर-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी और मकर संक्रांति के बाद देह छोड़ी। इस दिन का स्नान-दान (विशेषकर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल) अक्षय-फल देता है।
पुण्यकाल: संक्रांति के क्षण से उस दिन सूर्यास्त तक (या 16 घटी); संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो अगला दिन पर्व-दिन। इसीलिए कभी 14 और कभी 15 जनवरी — ऊपर दी तिथि इंजन से है। महापुण्यकाल संक्रांति के तुरंत बाद की लगभग 2 घटी (48 मिनट)।
स्त्रियों की रीत: तिल-गुड़ बाँटना («तिळगुळ घ्या, गोड बोला»), हल्दी-कुमकुम, सुहागिनों को बायना/वाण देना, नई बहू-बच्चे को «बोरन्हाण»; बिहार-पूर्वांचल में दही-चूड़ा-तिलकुट, घर की बड़ी स्त्री सबको तिल देकर आशीर्वाद।
नहीं। भारत: बुधवार, 14 जनवरी 2026; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): गुरुवार, 15 जनवरी 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी): 6:00 AM से 8:09 PM (AEDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (सिडनी के लिए AEST/AEDT)।
तिल और गुड़ ठंड में गर्मी और शक्ति देते हैं (आयुर्वेद); कथा में शनि ने पिता सूर्य का स्वागत तिल-गुड़ से किया; तिल का दान पितरों-मोक्ष से जुड़ा है — इसलिए खाओ, बाँटो, दान करो।
सब सूर्य के मकर-प्रवेश और नई फ़सल के उत्सव हैं — लोहड़ी एक रात पहले (पंजाब), पोंगल चार दिन (तमिलनाडु), माघ बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (यूपी-बिहार) — नाम और पकवान अलग, सूर्य एक।
सूर्य के धनु राशि में रहने का महीना (दिसंबर-मध्य से मकर संक्रांति तक) खरमास/मलमास — विवाह-गृहप्रवेश वर्जित; मकर-प्रवेश से उत्तरायण और शुभ कार्य फिर शुरू। विवाह-तिथियाँ मुहूर्त-पन्ने पर।