फ़िजी में अनंत चतुर्दशी 2027: बुधवार, 15 सितंबर — शहर-वार पूजा-समय
फ़िजी में अनंत चतुर्दशी 2027: बुधवार, 15 सितंबर 2027 (सुवा)
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:03 AM – 10:50 AM FJT
भारत से अलग। भारत में अनंत चतुर्दशी 2027 मंगलवार, 14 सितंबर 2027 को है; सुवा (फ़िजी) में बुधवार, 15 सितंबर 2027 — एक दिन बाद। कारण: स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)। सुवा में तिथि स्थानीय समय 9:19 AM FJT पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है।
अनंत चतुर्दशी 2027 — सुवा
| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|
सुवा Fiji Time (FJT) | बुधवार, 15 सितंबर 2027 | 6:03 AM – 10:50 AM FJT | 14 सितंबर, 7:10 AM → 15 सितंबर, 9:19 AM FJT |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
अनंत चतुर्दशी की तारीख कैसे तय होती है
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
महत्व
अनंत = विष्णु का वह रूप जिसका आदि-अंत नहीं (शेषनाग भी «अनंत»); 14 गाँठें = 14 लोक (सात ऊपर, सात नीचे) — अनंत-सूत्र पहनने वाले पर विष्णु की सब लोकों में रक्षा; अग्नि-पुराण/भविष्य-पुराण में युधिष्ठिर को कृष्ण ने खोया राज्य पाने के लिए यह व्रत बताया — कठिनाई-ऋण-रोग से मुक्ति, खोया वैभव लौटना।
व्रत का नियम: 14 वर्ष लगातार, हर वर्ष नया सूत्र, पुराना जल में; बीच में छूटे तो दोबारा; 14वें वर्ष उद्यापन — 14 ब्राह्मण-भोजन, 14 वस्तुओं का दान; स्त्रियाँ पति-संतान की रक्षा व अखंड सौभाग्य के लिए, पुरुष खोए धन-पद-स्वास्थ्य के लिए; कथा में कौंडिन्य ऋषि ने पत्नी शीला का सूत्र फेंका, सब नष्ट — फिर अनंत की खोज (नीचे)।
गणेश-विसर्जन: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पधारे गणपति का दसवें दिन (चतुर्दशी) विसर्जन — मुंबई-पुणे की विशाल शोभायात्राएँ (लालबागचा राजा), ढोल-ताशा-गुलाल; अनंत चतुर्दशी की पूजा सुबह, विसर्जन दोपहर-शाम; दोनों एक साथ होने से यह दिन उत्तर व पश्चिम भारत को जोड़ता है; अगले दिन से पितृ-पक्ष — इसलिए आज ही सब मांगलिक समापन।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- सुबह स्नान, पीले/सफ़ेद वस्त्र; संकल्प — «अनंत-व्रत (कितना-वाँ वर्ष) परिवार-रक्षा/खोया वैभव हेतु»; पूजा-स्थान पर कलश, उस पर कुशा से बना शेषनाग (7 फन) या विष्णु-चित्र, अनंत-सूत्र (14 गाँठ, हल्दी-रंगा) सामने।
- अनंत-सूत्र: कच्चे सूत/रेशम के 14 तार (या मौली), हल्दी-जल में रंगकर 14 गाँठें — हर गाँठ पर «ॐ अनंताय नमः»; परिवार के हर सदस्य के लिए अलग; पूजा में विष्णु के आगे रखें।
- पूजा: कलश-शेषनाग/विष्णु को पंचामृत, चंदन-अक्षत, तुलसी, पीले फूल, धूप-दीप; अनंत-सूत्र को हल्दी-कुमकुम-अक्षत-फूल; नैवेद्य — खीर-पूड़ी/14 प्रकार के पकवान (हो सके तो), केला, पान; मंत्र — «अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव, अनन्तरूपे विनियोजयस्व ह्यनन्तसूत्राय नमो नमस्ते»; विष्णु-सहस्रनाम/अनंत-कथा (नीचे)।
- सूत्र-बंधन: कथा के बाद पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ पर — पति पत्नी को, माँ बच्चों को बाँधे; पुराने वर्ष का सूत्र उतारकर जल/पीपल में; सूत्र साल-भर या कम-से-कम 14 दिन पहनें (घर-रीत)।
- 14 वस्तुएँ: कई घर 14 फल, 14 पूड़ी-पकवान, 14 पान-सुपारी अनंत को अर्पित करते हैं — फिर ब्राह्मण/बहन-बुआ को; 14वें वर्ष उद्यापन में 14 ब्राह्मण-भोजन।
- व्रत-भोजन: एक समय, बिना नमक (कठोर रूप) या फलाहार; शाम आरती के बाद खीर-पूड़ी; रात जागरण (हो सके तो)।
- गणपति-विसर्जन (जहाँ स्थापना हुई): सुबह अनंत-पूजा, फिर गणपति की उत्तर-पूजा (आरती, मोदक, नारियल, दक्षिणा, «पुनरागमनाय च»), दही-भात का बंडल यात्रा के लिए, शोभायात्रा, जल-विसर्जन (कृत्रिम तालाब/घर की बाल्टी — पर्यावरण), मिट्टी पेड़ में।
- अगले दिन से पितृ-पक्ष: आज सब मांगलिक सामान समेटें, कल से श्राद्ध-तर्पण; अनंत-सूत्र पहने रहना ठीक।
प्रश्नोत्तर
क्या अनंत चतुर्दशी 2027 फ़िजी और भारत में एक ही दिन है?
नहीं। भारत: मंगलवार, 14 सितंबर 2027; सुवा (फ़िजी): बुधवार, 15 सितंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
सुवा में अनंत चतुर्दशी 2027 का पूजा-समय?
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:03 AM से 10:50 AM (FJT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सुवा के लिए Fiji Time (FJT))।
अनंत-सूत्र किस हाथ में, कितने दिन?
पुरुष दाहिने हाथ (बाजू/कलाई), स्त्री बाएँ हाथ; 14 गाँठें; कम-से-कम 14 दिन, शास्त्र में अगले वर्ष तक पहनें और नया बाँधते समय पुराना जल/पीपल में; टूट जाए तो जल में डालकर नया (पूजा किया हुआ) बाँधें।
14 वर्ष ही क्यों? बीच में छूट जाए तो?
14 लोक (इसीलिए 14 गाँठें) — कृष्ण ने युधिष्ठिर को 14 वर्ष का व्रत बताया; कौंडिन्य ने भी 14 वर्ष; छूट जाए तो अगले वर्ष प्रायश्चित्त (दान/ब्राह्मण-भोजन) करके फिर से गिनती; उद्यापन 14वें वर्ष — 14 ब्राह्मण, 14 वस्तु-दान।
स्त्रियाँ यह व्रत क्यों रखती हैं?
कथा में शीला (कौंडिन्य-पत्नी) ने रखा — घर वैभव से भरा; पति-संतान की रक्षा, ऋण-रोग-कठिनाई से मुक्ति, खोया धन-पद लौटना; बिहार-कर्नाटक-महाराष्ट्र में स्त्री-पुरुष दोनों; नवविवाहिता पहला अनंत ससुराल में।
अनंत चतुर्दशी और गणेश-विसर्जन का क्या संबंध?
गणेशोत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से दस दिन — दसवाँ दिन यही चतुर्दशी; लोकमान्य तिलक (1893) ने सार्वजनिक गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर रखा; इसलिए महाराष्ट्र-गुजरात-तेलंगाना में यह विसर्जन-दिन; अनंत-पूजा (विष्णु) व विसर्जन (गणेश) अलग-अलग विधान, एक दिन।
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