| तारीख | मासिक शिवरात्रि | पूजा-समय |
|---|---|---|
| बुधवार, 6 जनवरी 2027 | पौष मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:50 PM – 12:34 AM |
| गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027 | माघ मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:58 PM – 12:43 AM |
| शनिवार, 6 मार्च 2027 | फाल्गुन मासिक शिवरात्रि — महाशिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:55 PM – 12:41 AM |
| सोमवार, 5 अप्रैल 2027 | चैत्र मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:45 PM – 12:34 AM |
| बुधवार, 5 मई 2027 | वैशाख मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:38 PM – 12:28 AM |
| गुरुवार, 3 जून 2027 | ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:39 PM – 12:30 AM |
| शुक्रवार, 2 जुलाई 2027 | आषाढ़ मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:44 PM – 12:36 AM |
| रविवार, 1 अगस्त 2027 | श्रावण मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:47 PM – 12:38 AM |
| सोमवार, 30 अगस्त 2027 | भाद्रपद मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:42 PM – 12:32 AM |
| मंगलवार, 28 सितंबर 2027 | आश्विन मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:33 PM – 12:21 AM |
| गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 | कार्तिक मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:27 PM – 12:13 AM |
| शुक्रवार, 26 नवंबर 2027 | मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:32 PM – 12:15 AM |
| रविवार, 26 दिसंबर 2027 | पौष मासिक शिवरात्रि | निशीथ पूजा 11:45 PM – 12:28 AM |
स्थानीय निशीथ (अर्धरात्रि) में कृष्ण चतुर्दशी।
शिव-पुराण/स्कंद-पुराण: कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि शिव को प्रिय — इसी रात अग्नि-स्तंभ (लिंगोद्भव) प्रकट हुआ जिसे ब्रह्मा-विष्णु न नाप सके; इस रात का जागरण-अभिषेक वर्ष-भर के पापों को हरता; मासिक शिवरात्रि का व्रत 12/14 वर्ष लगातार रखने से विवाह-संतान-मोक्ष (लोक-मान्यता); चतुर्दशी निशीथ-व्यापिनी — जिस रात के मध्य में चतुर्दशी हो वही व्रत-दिन (ऊपर सूची इसी नियम से — कभी त्रयोदशी की शाम से आरंभ)।
चार प्रहर की पूजा: पहला प्रहर (शाम — दूध से अभिषेक), दूसरा (रात — दही), तीसरा (मध्य-रात्रि — घी), चौथा (भोर — शहद/शक्कर); हर प्रहर «ॐ नमः शिवाय», बेलपत्र, आरती; गृहस्थ कम-से-कम निशीथ-काल (आधी रात ± 24 मिनट — ऊपर) में एक बार पूजा करें।
फ़िजी (सुवा) में 13। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
सुवा के लिए 13 में से 5 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
मासिक शिवरात्रि हर कृष्ण चतुर्दशी (12 बार); महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी-मार्च) — शिव-पार्वती विवाह/लिंगोद्भव की रात, चार-प्रहर व जागरण सबसे बड़ा, कावड़, मेले; विधि एक, महाशिवरात्रि पर फल गुना; श्रावण की मासिक शिवरात्रि दूसरी बड़ी (कावड़-जलाभिषेक)।
रात का मध्य बिंदु (सूर्यास्त से सूर्योदय का आधा) ± एक घड़ी (24 मिनट) — लगभग 11:40-12:30; शिवरात्रि «रात्रि-व्रत» है — लिंगोद्भव व शिव-विवाह मध्य-रात्रि को, इसलिए मुख्य पूजा निशीथ में; चार प्रहर = सूर्यास्त से सूर्योदय के चार भाग; ऊपर निशीथ व प्रदोष दोनों समय।
पहला प्रहर (सूर्यास्त ~6-9) दूध-अभिषेक, दूसरा (9-12) दही, तीसरा (12-3 — निशीथ) घी/पंचामृत, चौथा (3-6 भोर) शहद-शक्कर; हर बार बेलपत्र-«ॐ नमः शिवाय»-आरती; न हो सके तो निशीथ की एक पूजा पर्याप्त; अलार्म लगाकर उठें; स्वास्थ्य हो तो जागरण।