🌙 मासिक शिवरात्रि 2026
अगली मासिक शिवरात्रि कब है — हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात (निशीथ-काल) शिव-पूजा, चार प्रहर का अभिषेक, रात्रि-जागरण; फाल्गुन की महाशिवरात्रि इसका महारूप; कन्याओं व सुहागिनों का व्रत; ऊपर निशीथ-काल व आने वाली तिथियाँ।
- आश्विन मासिक शिवरात्रि — गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
- कार्तिक मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 7 नवंबर 2026
- मार्गशीर्ष मासिक शिवरात्रि — सोमवार, 7 दिसंबर 2026
- पौष मासिक शिवरात्रि — मंगलवार, 5 जनवरी 2027
- माघ मासिक शिवरात्रि — गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027
- महाशिवरात्रि (फाल्गुन) — शनिवार, 6 मार्च 2027
- चैत्र मासिक शिवरात्रि — सोमवार, 5 अप्रैल 2027
- वैशाख मासिक शिवरात्रि — मंगलवार, 4 मई 2027
- ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि — गुरुवार, 3 जून 2027
- आषाढ़ मासिक शिवरात्रि — शुक्रवार, 2 जुलाई 2027
- श्रावण मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 31 जुलाई 2027
- भाद्रपद मासिक शिवरात्रि — सोमवार, 30 अगस्त 2027
मासिक शिवरात्रि हर चंद्र-मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को होती है — अमावस्या से एक दिन पहले, जब चंद्रमा लगभग लुप्त होता है; यह तिथि निशीथ-काल (आधी रात) में हो — उसी रात शिवरात्रि। पूजा रात में — निशीथ-काल (ऊपर समय) व चार प्रहरों में अभिषेक; व्रत सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, पारण चतुर्दशी समाप्त होने पर।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की **महाशिवरात्रि** इसका वार्षिक महारूप है (अलग पन्ना); श्रावण की मासिक शिवरात्रि दूसरी बड़ी। शास्त्र-कथा है कि शिवरात्रि की रात शिव लिंग-रूप में प्रकट हुए/शिव-पार्वती विवाह — इसलिए कन्याएँ मनचाहे वर व सुहागिनें सुहाग-हेतु रखती हैं। ऊपर अगली मासिक शिवरात्रि की तिथि, निशीथ-प्रदोष-समय (दिल्ली) व आने वाली 12 तिथियाँ माह-नाम सहित; नीचे विधि, चार-प्रहर पूजा, सामग्री, कथा, भोजन व इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
शिव-पुराण/स्कंद-पुराण: कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि शिव को प्रिय — इसी रात अग्नि-स्तंभ (लिंगोद्भव) प्रकट हुआ जिसे ब्रह्मा-विष्णु न नाप सके; इस रात का जागरण-अभिषेक वर्ष-भर के पापों को हरता; मासिक शिवरात्रि का व्रत 12/14 वर्ष लगातार रखने से विवाह-संतान-मोक्ष (लोक-मान्यता); चतुर्दशी निशीथ-व्यापिनी — जिस रात के मध्य में चतुर्दशी हो वही व्रत-दिन (ऊपर सूची इसी नियम से — कभी त्रयोदशी की शाम से आरंभ)।
चार प्रहर की पूजा: पहला प्रहर (शाम — दूध से अभिषेक), दूसरा (रात — दही), तीसरा (मध्य-रात्रि — घी), चौथा (भोर — शहद/शक्कर); हर प्रहर «ॐ नमः शिवाय», बेलपत्र, आरती; गृहस्थ कम-से-कम निशीथ-काल (आधी रात ± 24 मिनट — ऊपर) में एक बार पूजा करें।
महाशिवरात्रि व श्रावण-शिवरात्रि पर कावड़ियों का जलाभिषेक; मासिक शिवरात्रि पर शिवालय की रात्रि-आरती; कुंडली में चंद्र-दोष/मंगल/शनि-पीड़ा, विवाह-विलंब में मासिक शिवरात्रि का व्रत लोक-प्रसिद्ध उपाय; प्रदोष (त्रयोदशी) + शिवरात्रि (चतुर्दशी) लगातार दो दिन शिव के — «प्रदोष-शिवरात्रि युग्म»।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह मासिक शिवरात्रि की घरेलू विधि है — दिन का व्रत, रात निशीथ-काल में शिव-पूजा (चार प्रहर हो सके तो), जागरण, अगली सुबह पारण।
- सुबह: स्नान, शिव-स्मरण, संकल्प — «मासिक शिवरात्रि व्रत, (कामना) हेतु, रात्रि-पूजा व जागरण, कल सूर्योदय के बाद पारण»; दिन में फलाहार/निर्जला (सामर्थ्य); शिवालय-दर्शन, जल-बेलपत्र।
- शाम (प्रदोष — ऊपर समय): पूजा-स्थान पर शिवलिंग (पार्थिव — मिट्टी का बनाकर भी) या शिव-पार्वती चित्र, उत्तर-पूर्व; कलश, दीप; पहला प्रहर — दूध से अभिषेक, बेलपत्र, «ॐ नमः शिवाय» 108, शिव-चालीसा।
- रात (दूसरा प्रहर): दही से अभिषेक, धतूरा-आक-शमी-भाँग, चंदन-भस्म; रुद्राष्टक/शिव-तांडव-स्तोत्र; शिवरात्रि-कथा (नीचे — शिकारी/लिंगोद्भव) सुनना।
- निशीथ-काल (ऊपर समय — तीसरा प्रहर): घी/पंचामृत से अभिषेक, गंगाजल, बेलपत्र 108 (हो सके तो — हर पत्ते पर «ॐ नमः शिवाय»), जनेऊ, सफ़ेद फूल, इत्र; पार्वती को सुहाग-सामग्री; महामृत्युंजय 108/11; आरती «ॐ जय शिव ओंकारा», कपूर; यह पूजा अनिवार्य — बाक़ी प्रहर सामर्थ्य से।
- भोर (चौथा प्रहर): शहद/शक्कर/गन्ना-रस से अभिषेक, फिर जल; अंतिम आरती; जागरण — रात-भर भजन-कीर्तन/शिव-नाम (न हो सके तो निशीथ-पूजा के बाद सोएँ, भोर में उठकर चौथा प्रहर)।
- पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने पर (अमावस्या लगने के बाद — ऊपर तिथि-खिड़की); पहले शिव-प्रसाद (फल-पंचामृत), फिर सात्विक भोजन; ब्राह्मण/ग़रीब को दान।
- पार्थिव शिवलिंग (कई घर): गीली मिट्टी (नदी/शुद्ध) से अँगूठे-भर शिवलिंग बनाकर पूजा, अगली सुबह जल में विसर्जन — श्रावण-शिवरात्रि व महाशिवरात्रि पर विशेष।
- स्त्री-रीत: कन्याएँ मनचाहे वर (पार्वती-पूजा, 108 बेलपत्र), सुहागिनें सुहाग-रक्षा; 12/14 मासिक शिवरात्रि का संकल्प → महाशिवरात्रि पर उद्यापन (शिव-हवन, दंपति-भोजन); मासिक-धर्म में पूजा नहीं — स्मरण-जप; गर्भवती फलाहार, जागरण नहीं।
पूजा-सामग्री की सूची
चार प्रहर का अभिषेक-द्रव्य, बेलपत्र 108, पार्थिव मिट्टी, जागरण की कथा-पुस्तक — मासिक शिवरात्रि की सूची।
- शिवलिंग (पारद/नर्मदेश्वर/स्फटिक) या पार्थिव (शुद्ध मिट्टी) या शिव-पार्वती चित्र, चौकी, सफ़ेद कपड़ा, कलश
- चार प्रहर का अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गन्ने का रस, गंगाजल, नारियल-पानी, पंचामृत
- बेलपत्र 108 (3-पत्ती, साबुत), धतूरा-फल-फूल, आक (मदार), शमी, भाँग, दूब, सफ़ेद फूल (चमेली-कनेर), नीलकमल (हो सके तो)
- चंदन, भस्म, अक्षत, जनेऊ, मौली, रोली-हल्दी-कुमकुम, इत्र (केवड़ा-चंदन), पान-सुपारी-लौंग-इलायची
- पार्वती: सुहाग-सामग्री (चूड़ी-बिंदी-सिंदूर-चुनरी), लाल फूल
- दीपक (घी — रात-भर अखंड, हो सके तो), धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी-डमरू
- नैवेद्य: फल (बेर-केला-सेब — महाशिवरात्रि पर बेर), पंचमेवा, खीर, हलवा, ठंडाई/भाँग-दूध, मिश्री
- कथा/स्तोत्र: शिवरात्रि-कथा, रुद्राष्टक, शिव-तांडव, महामृत्युंजय, शिव-चालीसा; रुद्राक्ष-माला; भजन
- फलाहार: फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सेंधा नमक; पारण: सात्विक भोजन, दान-सामग्री
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शिकारी की कथा (शिव-पुराण): एक शिकारी शिकार न मिलने पर रात बेल के पेड़ पर बैठा, जिसके नीचे शिवलिंग था; जागते रहने व नीचे देखने के लिए वह पत्ते तोड़-तोड़कर गिराता रहा — अनजाने 108 बेलपत्र शिवलिंग पर; रात-भर भूखा-प्यासा (अनजाने व्रत-जागरण); चार बार हिरण-परिवार आया, हर बार दया कर छोड़ा (चार प्रहर); भोर में शिव प्रकट — «अनजाने की गई शिवरात्रि-पूजा से तेरा पाप कटा»; शिकारी को मोक्ष, हिरण-परिवार तारे (मृग-शिरा)। सीख — शिवरात्रि की रात बेलपत्र-जागरण-दया का फल अनजाने भी अनंत।
लिंगोद्भव: ब्रह्मा और विष्णु में «बड़ा कौन» का विवाद हुआ; फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि एक अनंत अग्नि-स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) प्रकट हुआ — विष्णु वराह बनकर नीचे, ब्रह्मा हंस बनकर ऊपर, कोई छोर न पा सके; ब्रह्मा ने केतकी को झूठा गवाह बनाया — शिव ने केतकी को शाप (शिव-पूजा में वर्जित) और ब्रह्मा को पूजा-हीन; तभी से शिवरात्रि लिंग-पूजा की रात, अरुणाचल (तिरुवण्णामलै) वही अग्नि-स्तंभ।
शिव-पार्वती विवाह व समुद्र-मंथन: महाशिवरात्रि को शिव-पार्वती विवाह (कई पुराण) — इसलिए कन्याएँ वर हेतु; विष-पान के बाद शिव को जगाए रखने के लिए देवताओं ने रात-भर जागरण-स्तुति की — इसलिए शिवरात्रि पर जागरण; हर मासिक शिवरात्रि उसी रात की मासिक स्मृति — पुराण कहते हैं जो वर्ष की 12 शिवरात्रियाँ (महाशिवरात्रि सहित 13) व्रत-सहित रखे, वह शिव-लोक पाए।
फल-पंचामृत-ठंडाई, बेर, कुट्टू — शिवरात्रि का फलाहार व पारण
शिवरात्रि पर दिन-रात व्रत — फलाहार (फल-दूध-साबूदाना-कुट्टू-सेंधा नमक) या निर्जला; शिव को फल (बेर-केला), पंचमेवा, खीर, ठंडाई/भाँग-दूध (कुछ रीत), धतूरा-भाँग (शिव-प्रिय, खाने की नहीं); अगली सुबह पारण सात्विक — खिचड़ी/दाल-चावल-सब्ज़ी, हलवा; अन्न रात में नहीं।
- फलाहार: फल (सेब-केला-अमरूद-बेर), दूध-दही-छाछ, मखाना, साबूदाना-खिचड़ी/खीर, कुट्टू/सिंघाड़े की पूड़ी-पकौड़ी, आलू-शकरकंद, सेंधा नमक; निर्जला वाले — कुछ नहीं
- शिव-नैवेद्य: पंचामृत, फल, पंचमेवा, खीर (चावल/मखाना), हलवा, मिश्री, ठंडाई (बादाम-सौंफ-काली मिर्च-गुलाब — भाँग वैकल्पिक, केवल परंपरा-अनुसार)
- चार प्रहर: पहला दूध, दूसरा दही, तीसरा घी, चौथा शहद/शक्कर — अभिषेक-द्रव्य ही प्रसाद-रूप (पंचामृत)
- पारण (अगली सुबह): खिचड़ी (मूँग-चावल) / दाल-चावल-सब्ज़ी, हलवा-पूड़ी, दही; ब्राह्मण/ग़रीब को अन्न-दान पहले
- क्षेत्रीय: महाराष्ट्र (शिवरात्र) — साबूदाणा-खिचड़ी, रताळे, भगर; दक्षिण (मासिक शिवरात्रि/शिवरात्रि) — फल-दूध, अगली सुबह पोंगल-पायसम; बंगाल (शिव-चतुर्दशी) — फल-दूध-मिश्री, पारण खिचुड़ी; गुजरात (शिवरात्रि) — फराळ, सोमनाथ-पालकी
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
काशी-उज्जैन की रात्रि-आरती, दक्षिण की चार-प्रहर पूजा, बंगाल की शिव-चतुर्दशी, कावड़ की श्रावण-शिवरात्रि — हर महीने की शिव-रात।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा रात में — निशीथ-काल (ऊपर समय) अनिवार्य; चार प्रहर हो सके तो; जागरण
- बेलपत्र (108 — साबुत, उल्टा), दूध-दही-घी-शहद क्रम से अभिषेक; «ॐ नमः शिवाय»/महामृत्युंजय
- पारण अगली सुबह चतुर्दशी समाप्त होने पर (तिथि-खिड़की); पहले दान
- कन्याएँ पार्वती-पूजा (वर-हेतु), 12/14 शिवरात्रि का संकल्प → महाशिवरात्रि पर उद्यापन
- रोगी/गर्भवती फलाहार व निशीथ-पूजा भर; जागरण नहीं
❌ क्या न करें
- शिवलिंग पर तुलसी, केतकी, हल्दी, सिंदूर, शंख-जल; टूटा बेलपत्र; कुमकुम (शिव पर — पार्वती पर ठीक)
- व्रत-रात सोना (जागरण-नियम — पर स्वास्थ्य पहले), अन्न-भोजन, तामसिक, नशा (भाँग-मद्य — शिव-प्रसाद के नाम पर नशा नहीं)
- पूजा दिन में करके रात छोड़ना (शिवरात्रि रात्रि-व्रत है)
- काले वस्त्र, क्रोध, झूठ, कलह; अमावस्या लगने के बाद अभिषेक-पूजा जारी रखना (पारण-समय)
- पार्थिव शिवलिंग नाली/कूड़े में — जल/पेड़ की जड़ में विसर्जन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगली मासिक शिवरात्रि कब है? 2026 की तिथियाँ?
ऊपर अगली मासिक शिवरात्रि की तिथि, निशीथ-काल व प्रदोष-समय (दिल्ली) और आने वाली 12 शिवरात्रियाँ माह-नाम सहित (फाल्गुन की महाशिवरात्रि अलग लिखी) — निशीथ-व्यापिनी चतुर्दशी नियम से; कभी सूर्योदय-तिथि त्रयोदशी होती है और रात में चतुर्दशी — व्रत उसी रात; अपने शहर का पंचांग मिला लें।
मासिक और महाशिवरात्रि में क्या अंतर?
मासिक शिवरात्रि हर कृष्ण चतुर्दशी (12 बार); महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फरवरी-मार्च) — शिव-पार्वती विवाह/लिंगोद्भव की रात, चार-प्रहर व जागरण सबसे बड़ा, कावड़, मेले; विधि एक, महाशिवरात्रि पर फल गुना; श्रावण की मासिक शिवरात्रि दूसरी बड़ी (कावड़-जलाभिषेक)।
निशीथ-काल क्या है और पूजा रात में ही क्यों?
रात का मध्य बिंदु (सूर्यास्त से सूर्योदय का आधा) ± एक मुहूर्त (24 मिनट) — लगभग 11:40-12:30; शिवरात्रि «रात्रि-व्रत» है — लिंगोद्भव व शिव-विवाह मध्य-रात्रि को, इसलिए मुख्य पूजा निशीथ में; चार प्रहर = सूर्यास्त से सूर्योदय के चार भाग; ऊपर निशीथ व प्रदोष दोनों समय।
चार प्रहर की पूजा घर में कैसे करें?
पहला प्रहर (सूर्यास्त ~6-9) दूध-अभिषेक, दूसरा (9-12) दही, तीसरा (12-3 — निशीथ) घी/पंचामृत, चौथा (3-6 भोर) शहद-शक्कर; हर बार बेलपत्र-«ॐ नमः शिवाय»-आरती; न हो सके तो निशीथ की एक पूजा पर्याप्त; अलार्म लगाकर उठें; स्वास्थ्य हो तो जागरण।
कन्याएँ मासिक शिवरात्रि क्यों रखती हैं?
शिवरात्रि शिव-पार्वती विवाह की रात — पार्वती ने शिव को व्रत से पाया; कन्याएँ मनचाहे वर व शीघ्र-विवाह हेतु 12/14 मासिक शिवरात्रि (या केवल महाशिवरात्रि + सावन की) रखती हैं, पार्वती को सुहाग-सामग्री, 108 बेलपत्र; विवाह-विलंब में लोक-प्रसिद्ध — कुंडली-जाँच साथ।
पारण कब और क्या?
अगली सुबह सूर्योदय के बाद, जब चतुर्दशी समाप्त होकर अमावस्या लगे (ऊपर तिथि-खिड़की); चतुर्दशी सूर्योदय के बाद देर तक रहे तो उसके समाप्त होने पर; पहले शिव-प्रसाद व दान, फिर सात्विक भोजन (खिचड़ी-दाल-चावल); रात में अन्न नहीं।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
यह भी पढ़ें: महाशिवरात्रि (फाल्गुन) · प्रदोष व्रत (एक दिन पहले) · सोमवार / सावन-सोमवार · अमावस्या (अगले दिन)
⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। निशीथ-समय दिल्ली का है — अपने शहर का पंचांग देखें; जागरण/निर्जला स्वास्थ्य-अनुसार; भाँग आदि नशा नहीं।
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