केतु महादशा में राहु अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
केतु महादशा में राहु अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है — यह काल मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर राहु की अंतर्दशा 1 वर्ष 18 दिन की होती है (सूत्र: 7×18÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय राहु (माया, विदेश, तकनीक, अचानक घटनाएँ, भ्रम, महत्वाकांक्षा) तय करता है।
संक्षेप-सूत्र: विरक्त केतु-काल में राहु की भूख — भीतर खिंचाव; आध्यात्मिक अनुशासन रखें।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: राहु जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; केतु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
सूक्ष्म समय के लिए प्रत्यंतर-दशा और गोचर (विशेषतः गुरु-शनि) साथ देखे जाते हैं — हमारी निःशुल्क कुंडली में पाँच स्तर की दशा-तालिका व घटना-समय विश्लेषण दोनों हैं।
इस अवधि के सामान्य उपाय
राहु (अंतर्दशा-स्वामी): राहु को शांत करने हेतु 'ॐ रां राहवे नमः' जप, दुर्गा/भैरव-पूजन, सरस्वती-आराधना तथा शनिवार सेवा श्रेष्ठ है। रत्न गोमेद (Hessonite) चाँदी/पंचधातु में — तीव्र-प्रभावी, अतः बिना परामर्श न धारण करें। नीले-भूरे वस्त्र, तिल, नारियल व उड़द का दान, कोढ़ी/निर्धनों की सेवा तथा व्यसन-त्याग विशेष लाभकारी है।
यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।
निःशुल्क कुंडली बनाएँ →विंशोत्तरी दशा-प्रणाली समझें · केतु ग्रह का विस्तृत लेख · राहु ग्रह का विस्तृत लेख · अपनी दशा-तालिका देखें (निःशुल्क)