राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है — यह काल माया, विदेश, तकनीक, अचानक घटनाएँ, भ्रम, महत्वाकांक्षा के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर गुरु की अंतर्दशा 2 वर्ष 4 माह 24 दिन की होती है (सूत्र: 18×16÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय गुरु (ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन, भाग्य, विवेक) तय करता है।
संक्षेप-सूत्र: राहु-काल की सबसे राहत-भरी अंतर्दशा — «राहु का विष गुरु उतारता है»; अटके काम खुलते हैं, विदेश-शिक्षा योग।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: गुरु जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; राहु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
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इस अवधि के सामान्य उपाय
गुरु (अंतर्दशा-स्वामी): गुरु को बल देने हेतु गुरुवार व्रत, 'ॐ गुरवे नमः' या बृहस्पति-स्तोत्र, विष्णु-पूजन तथा गुरुजनों-ब्राह्मणों का सम्मान श्रेष्ठ है। रत्न पुखराज (Yellow Sapphire) सोने में, तर्जनी में, गुरुवार धारण किया जाता है। पीली वस्तुएँ (चना-दाल, हल्दी, केसर) का दान, ज्ञान-दान तथा धर्म-ग्रंथों का अध्ययन विशेष लाभकारी है।
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