क़तर में दिवाली 2027: रविवार, 14 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय
क़तर में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027: रविवार, 14 नवंबर 2027 (दोहा)
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 4:51 PM – 6:48 PM AST
भारत से अलग। भारत में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है; दोहा (क़तर) में रविवार, 14 नवंबर 2027 — +16 दिन। कारण: जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद के प्रदोष-काल में अमावस्या तिथि हो; लक्ष्मी-पूजा प्रदोष-काल में स्थिर वृषभ लग्न में। दोहा में तिथि स्थानीय समय 6:26 AM AST पर ख़त्म होती है, इसलिए निर्णायक क्षण दूसरे दिन पड़ता है।
दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 — दोहा
| शहर | तारीख | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न) | तिथि (स्थानीय) |
|---|
दोहा Arabia Standard Time (AST) | रविवार, 14 नवंबर 2027 | 4:51 PM – 6:48 PM AST | 13 नवंबर, 7:26 AM → 14 नवंबर, 6:26 AM AST |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जुड़े दिन (दोहा)
| नरक चतुर्दशी / अभ्यंग स्नान (छोटी दिवाली) | गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 |
| गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) | शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 |
| भाई दूज | रविवार, 31 अक्टूबर 2027 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
दिवाली (लक्ष्मी पूजा) की तारीख कैसे तय होती है
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद के प्रदोष-काल में अमावस्या तिथि हो; लक्ष्मी-पूजा प्रदोष-काल में स्थिर वृषभ लग्न में।
महत्व
अमावस्या की सबसे अँधेरी रात में दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। समुद्र-मंथन से इसी दिन लक्ष्मी प्रकट हुईं, इसलिए लक्ष्मी-पूजन; साथ में गणेश (बुद्धि), सरस्वती (विद्या) और कुबेर (कोष) की पूजा। व्यापारियों का नया वर्ष (बही-खाता) यहीं से शुरू होता है।
दीवाली की रात घर की स्त्री को «गृहलक्ष्मी» कहा जाता है — पूजा वही करवाती है, दीये वही जलाती है, और अहोई-करवा चौथ के करवे का जल वही घर में छिड़कती है। यह पर्व घर की स्त्री का ही है।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- सुबह स्नान; घर की अंतिम सफ़ाई; मुख्य द्वार पर रंगोली, तोरण (आम/अशोक के पत्ते-गेंदा), दोनों ओर लक्ष्मी-पद (दहलीज़ से भीतर की ओर), स्वस्तिक व शुभ-लाभ।
- शाम को पूजा-स्थान: उत्तर-पूर्व (ईशान) या पूर्व दिशा में चौकी पर लाल/पीला कपड़ा; बीच में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति (गणेश लक्ष्मी के दाएँ), साथ में कुबेर, सरस्वती का चित्र, कलश (जल-सुपारी-सिक्का-आम के पत्ते-नारियल), चाँदी/ताँबे का सिक्का, बही-खाता, तिजोरी की चाबी।
- प्रदोष-काल (ऊपर समय) में परिवार सहित बैठें; हाथ में जल-अक्षत-फूल लेकर संकल्प — «मैं परिवार की सुख-समृद्धि हेतु लक्ष्मी-गणेश का पूजन करती/करता हूँ।»
- पहले गणेश-पूजन (दूर्वा, मोदक/लड्डू, सिंदूर), फिर कलश-पूजन, फिर लक्ष्मी-पूजन — स्नान (जल-पंचामृत), वस्त्र, कमल/गुलाब-पुष्प, इत्र, रोली-अक्षत, खील-बताशे, मिठाई, फल, पान-सुपारी, लौंग-इलायची; «ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः» का जप या श्रीसूक्त/लक्ष्मी-चालीसा का पाठ।
- कुबेर-सरस्वती-बही-खाता और तिजोरी का पूजन; नए सिक्के-गहने पूजा में रखें। घर के औज़ार/वाहन पर भी रोली-अक्षत।
- आरती — «ॐ जय लक्ष्मी माता», फिर «जय गणेश देवा»; कपूर-आरती; परिवार के सब सदस्य पैर छूएँ, बड़े छोटों को आशीर्वाद और शगुन दें।
- दीपदान: पूजा के दीये से घर के सब दीये जलाएँ — द्वार पर सबसे पहले, फिर तुलसी, रसोई, जल-स्थान, छत, हर कमरा, बाहर की गली/नाली तक; एक बड़ा दीपक (या अखंड) रात-भर पूजा-स्थान पर। कुल दीयों की संख्या 11, 21, 51 या घर की रीत से।
- अहोई/करवा चौथ का करवा हो तो उसका जल घर में छिड़कें और अहोई माता का चित्र पोंछें। प्रसाद बाँटें, पड़ोसियों-सफ़ाईकर्मियों-काम करने वालों को मिठाई-शगुन दें।
- रात में लक्ष्मी-आगमन के लिए घर का मुख्य द्वार खुला/दीपों से रोशन रखें; अगली सुबह (गोवर्धन/प्रतिपदा) पूजा-स्थान की सफ़ाई और अन्नकूट।
प्रश्नोत्तर
क्या दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 क़तर और भारत में एक ही दिन है?
नहीं। भारत: शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027; दोहा (क़तर): रविवार, 14 नवंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
दोहा में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2027 का पूजा-समय?
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 4:51 PM से 6:48 PM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (दोहा के लिए Arabia Standard Time (AST))।
दीवाली की पूजा में कौन-कौन से देवता?
गणेश (पहले), लक्ष्मी (मुख्य), कुबेर, सरस्वती, कलश (वरुण), और घर की रीत से काली/दुर्गा या कुल-देवी; बही-खाता, तिजोरी, औज़ार भी पूजे जाते हैं।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कैसी हो और पुरानी का क्या करें?
मिट्टी की, बैठी हुई (कमल पर), गणेश लक्ष्मी के दाएँ; हर साल नई। पुरानी मूर्ति अगली दीवाली से पहले जल या पौधे की मिट्टी में विसर्जित करें, कूड़े में नहीं।
क्या दीवाली पर व्रत रखते हैं?
अनिवार्य नहीं; कई स्त्रियाँ अमावस्या को दिन में फलाहार रखकर लक्ष्मी-पूजा के बाद भोजन करती हैं। पूजा, दीपदान और परिवार का साथ मुख्य है।
बंगाल में दीवाली की रात काली पूजा क्यों?
कार्तिक अमावस्या की मध्य-रात्रि शक्ति-साधना की रात मानी गई है; बंगाल-असम में लक्ष्मी पूजा पहले (कोजागरी पूर्णिमा को) हो चुकी होती है, इसलिए अमावस्या माँ काली की। दोनों एक ही रात, अलग परंपरा।
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