सऊदी अरब में हरतालिका तीज 2027: शुक्रवार, 3 सितंबर — शहर-वार पूजा-समय
सऊदी अरब में हरतालिका तीज 2027: शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 (रियाद)
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:35 AM – 10:37 AM AST
भारत के दिन ही। 2027 में हरतालिका तीज भारत और सऊदी अरब के सब शहरों में शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है।
हरतालिका तीज 2027 — सऊदी अरब के सब शहर
| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|
रियाद Arabia Standard Time (AST) | शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 | 5:35 AM – 10:37 AM AST | 2 सितंबर, 2:21 PM → 3 सितंबर, 11:50 AM AST |
जेद्दा Arabia Standard Time (AST) | शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 | 6:07 AM – 11:07 AM AST | 2 सितंबर, 2:21 PM → 3 सितंबर, 11:50 AM AST |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
हरतालिका तीज की तारीख कैसे तय होती है
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
महत्व
निर्जला व्रत का नियम — दिन-रात जल तक नहीं (कुछ परंपराएँ आचमन मानती हैं); एक बार रखा तो हर साल रखना पड़ता है (छोड़ना अशुभ माना गया — बीमार हों तो किसी और से उद्यापन/या फलाहार से); इसलिए पहला व्रत सोच-समझकर। पार्वती ने यही तप किया था।
पूजा शाम/प्रदोष में मुख्य और फिर रात के चारों प्रहर — शिव-पार्वती-गणेश की मिट्टी/रेत/काली मिट्टी की प्रतिमाएँ (हाथ से बनाई — «पार्थिव»), फुलेरा (फूलों की छत), सुहाग की 16 वस्तुएँ; कथा तीन बार; अगली सुबह प्रतिमाएँ जल में विसर्जित कर पारण।
छत्तीसगढ़ में «तीजा» — बेटियाँ मायके बुलाई जाती हैं, एक दिन पहले «करू भात» (करेले की सब्ज़ी-भात); बिहार-यूपी में नई बहू का पहला तीज मायके में; महाराष्ट्र में «हरतालिका» की एक-दिवसीय रात-पूजा; नेपाल में तीन दिन का «तीज» — दर, निर्जला, ऋषि पंचमी।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- द्वितीया (एक दिन पहले): शाम/रात को भरपेट सात्विक भोजन — «सरगी/दर/करू भात» की तरह (छत्तीसगढ़ में करेला-भात, बिहार में दही-चूड़ा-फल, नेपाल में «दर» की दावत); मेहंदी; आधी रात के बाद कुछ नहीं।
- तृतीया: सूर्योदय से पहले स्नान, संकल्प — «मैं अखंड सौभाग्य/मनचाहे वर हेतु हरतालिका तीज का निर्जला व्रत करती हूँ, कल सूर्योदय के बाद पारण करूँगी»; सोलह श्रृंगार, लाल/हरी साड़ी, नई चूड़ियाँ, सिंदूर; दिन में जल नहीं, आराम-भजन, कम बोलना।
- दिन में तैयारी: फुलेरा — बाँस/लकड़ी की चौकी के ऊपर केले के खंभे व फूलों-पत्तियों की छत; हाथ से मिट्टी/काली मिट्टी/रेत के शिव, पार्वती (गौरी), गणेश और (कई घर) रिद्धि-सिद्धि की छोटी प्रतिमाएँ (या बाज़ार की मिट्टी की); केले के पत्ते पर स्थापना; कलश।
- प्रदोष-पूजा (सूर्यास्त के बाद — ऊपर समय — पहला प्रहर): गणेश-पूजन; शिव को जल-दूध-बेलपत्र-धतूरा-भस्म-सफ़ेद फूल; पार्वती को सुहाग की 16 वस्तुएँ (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, कंघी, शीशा, चुनरी, बिछिया, आलता, इत्र, फूल-माला…); «ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः»; हरतालिका व्रत-कथा (नीचे) — 3 बार/हर प्रहर; आरती «जय पार्वती माता»।
- चार प्रहर की पूजा (रात ~9, ~12, ~3 बजे): हर प्रहर में प्रतिमाओं पर फूल-अक्षत, नया दीप, मंत्र, आरती; बीच में भजन-गीत (तीज के लोकगीत), सहेलियों-सुहागिनों का सामूहिक जागरण; सोना नहीं।
- बाया: पूजा के बाद सास/जेठानी को सुहाग-सामग्री, मिठाई, फल, दक्षिणा — पैर छूकर; कन्याएँ बड़ी सुहागिनों से आशीर्वाद।
- चतुर्थी की सुबह (सूर्योदय के बाद): अंतिम पूजा-आरती, पार्वती को चढ़ा सिंदूर अपनी माँग में, प्रतिमाओं व पूजा-सामग्री का विसर्जन (नदी-तालाब या घर के गमले/जल-पात्र में), फुलेरा उतारना; फिर पारण — पहले पूजा का जल/तुलसी-जल, दही-चूड़ा/फल, फिर भोजन (कई घर पारण पति के हाथ से)।
- नई बहू का पहला तीज मायके में (बिहार-यूपी-छत्तीसगढ़) या ससुराल में सास के साथ — रीत से; एक बार शुरू किया व्रत हर साल; बीमार/गर्भवती हों तो फल-जल से या घर की दूसरी स्त्री द्वारा पूजा — भाव अखंड रहे।
प्रश्नोत्तर
क्या हरतालिका तीज 2027 सऊदी अरब और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — शुक्रवार, 3 सितंबर 2027।
रियाद में हरतालिका तीज 2027 का पूजा-समय?
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:35 AM से 10:37 AM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (रियाद के लिए Arabia Standard Time (AST))।
हरतालिका और हरियाली तीज में क्या अंतर?
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (सावन — हरी चूड़ी, झूले, उत्सव, फलाहार); हरतालिका भाद्रपद शुक्ल तृतीया (एक महीने बाद — 24 घंटे निर्जला, रात-जागरण, मिट्टी की प्रतिमाएँ, सबसे कठोर); कजरी तीज बीच में (भाद्रपद कृष्ण तृतीया)।
क्या सचमुच पानी भी नहीं पी सकते?
शास्त्रीय विधान निर्जला (आचमन कुल-रीत से मान्य); सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। यह कठोर है — स्वस्थ स्त्रियाँ ही; गर्भवती, रोगी, दूध पिलाने वाली फल-जल से रखें; तबीयत बिगड़े तो जल-भोजन लें — व्रत पार्वती का तप है, प्राण-संकट नहीं।
एक बार शुरू किया तो हर साल ज़रूरी?
लोक-परंपरा में हाँ — इसलिए पहला व्रत सोचकर; पर बीमारी/गर्भावस्था/शोक में छूट जाए तो फलाहार से रखें या घर की दूसरी स्त्री पूजा करे, बाद में उद्यापन — अशुभ कुछ नहीं होता, भाव मुख्य है।
चार प्रहर की पूजा कैसे?
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक रात के चार बराबर भाग (~3 घंटे) — पहला प्रहर प्रदोष (मुख्य पूजा-कथा), फिर ~9, ~12, ~3 बजे — हर बार फूल-अक्षत-दीप-मंत्र-आरती-कथा; सहेलियों के साथ गीत-भजन से जागरण आसान; एक प्रहर भी न हो सके तो प्रदोष-पूजा और सुबह की पूजा पर्याप्त।
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