| शहर | तारीख | पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| सिंगापुर Singapore Time (SGT) | गुरुवार, 9 दिसंबर 2027 | — पारण 2:10 PM–4:34 PM SGT | 9 दिसंबर, 5:29 AM → 10 दिसंबर, 5:50 AM SGT |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर एकादशी (उदया) — स्मार्त नियम; दशमी अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) को छुए तो वैष्णव अगले दिन। पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद, हरि-वासर के बाद व द्वादशी-अंत से पहले।
पद्म-पुराण में इसे सब एकादशियों में «मोक्ष-प्रदायिनी» कहा गया — व्रती के साथ उसके पितरों तक को गति। जिनके पितर अशांत लगें, या श्राद्ध छूट गया हो, वे इस दिन का व्रत विशेष रूप से रखते हैं।
गीता जयंती — कुरुक्षेत्र में विशाल उत्सव, गीता-पाठ, «श्रीमद्भगवद्गीता की जय»; घर में गीता के 18 अध्यायों में से एक (प्रायः 12वाँ भक्ति-योग या 15वाँ पुरुषोत्तम-योग) पढ़ना पर्याप्त माना गया।
मार्गशीर्ष को कृष्ण ने «मासानां मार्गशीर्षोऽहम्» कहा है — यह उनका अपना महीना है; इसकी शुक्ल एकादशी विशेष फलदायी। एकादशी-व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी में — ऊपर तिथि दी है।
हाँ — गुरुवार, 9 दिसंबर 2027।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सिंगापुर के लिए Singapore Time (SGT))।
दक्षिण भारत की वैकुंठ एकादशी धनुर्मास (सौर-मार्गशीर्ष) की शुक्ल एकादशी है — कई वर्षों में यही तिथि होती है, कुछ वर्षों में पौष की। उत्तर भारत में मोक्षदा नाम चलता है।
पूजा के अंत में हाथ में जल-तिल लेकर बोलें — «मेरे इस व्रत का पुण्य मेरे पितरों (नाम) को प्राप्त हो, उन्हें मोक्ष मिले» — और जल दक्षिण दिशा में छोड़ दें; साथ में उनके नाम से अन्न-वस्त्र दान।
पूरी न हो सके तो 12वाँ (भक्ति-योग, 20 श्लोक) या 15वाँ (पुरुषोत्तम-योग, 20 श्लोक) — छोटे और सार-रूप; या 2रा अध्याय (सांख्य-योग)। बच्चों से 47वाँ श्लोक (कर्मण्येवाधिकारस्ते) कंठस्थ कराना अच्छी रीत है।