| तारीख | अमावस्या | तिथि | नोट |
|---|---|---|---|
| रविवार, 18 जनवरी 2026 | माघ अमावस्या | 17 जनवरी, 8:34 PM → 18 जनवरी, 9:52 PM | |
| मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 | फाल्गुन अमावस्या | 16 फ़रवरी, 2:05 PM → 17 फ़रवरी, 2:08 PM | दर्श अमावस्या (संध्या): 16 फ़रवरी |
| बुधवार, 18 मार्च 2026 | चैत्र अमावस्या | 18 मार्च, 4:56 AM → 19 मार्च, 3:28 AM | |
| शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 | वैशाख अमावस्या | 16 अप्रैल, 4:42 PM → 17 अप्रैल, 1:56 PM | दर्श अमावस्या (संध्या): 16 अप्रैल |
| शनिवार, 16 मई 2026 | शनि ज्येष्ठ अमावस्या | 16 मई, 1:42 AM → 16 मई, 10:04 PM | |
| रविवार, 14 जून 2026 | आषाढ़ अमावस्या | 13 जून, 12:38 PM → 15 जून, 5:00 AM | |
| मंगलवार, 14 जुलाई 2026 | आषाढ़ अमावस्या | 13 जुलाई, 3:20 PM → 14 जुलाई, 11:50 AM | दर्श अमावस्या (संध्या): 13 जुलाई |
| बुधवार, 12 अगस्त 2026 | श्रावण अमावस्या | 11 अगस्त, 10:24 PM → 12 अगस्त, 7:42 PM | |
| गुरुवार, 10 सितंबर 2026 | भाद्रपद अमावस्या | 9 सितंबर, 9:01 AM → 11 सितंबर, 5:34 AM | |
| शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 | शनि आश्विन अमावस्या | 9 अक्टूबर, 6:06 PM → 10 अक्टूबर, 5:54 PM | |
| सोमवार, 9 नवंबर 2026 | सोमवती कार्तिक अमावस्या | 8 नवंबर, 7:58 AM → 9 नवंबर, 9:06 AM | दर्श अमावस्या (संध्या): 8 नवंबर |
| मंगलवार, 8 दिसंबर 2026 | मार्गशीर्ष अमावस्या | 8 दिसंबर, 12:43 AM → 9 दिसंबर, 2:58 AM |
स्नान-दान उदया-तिथि के दिन; दर्श अमावस्या (पितृ-कार्य) जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त पर अमावस्या।
पितृ-दिन: गरुड़-पुराण/मनुस्मृति — अमावस्या को पितर वायु-रूप में वंशजों के द्वार पर आकर तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं; अमावस्या का तर्पण/श्राद्ध पितृ-दोष (कुंडली में सूर्य-राहु/शनि) की शांति का मासिक उपाय; दर्श-श्राद्ध (अमावस्या का श्राद्ध) पितृ-पक्ष के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण।
चंद्र-हीन दिन — मन (चंद्र) निर्बल, इसलिए शुभ-कार्य (विवाह-यात्रा-नया आरंभ) टालते हैं, पर जप-तप-दान-ध्यान (मौनी) व तांत्रिक/काली-साधना का श्रेष्ठ काल; सोमवती (चंद्र-वार + अमावस्या) पर पीपल-परिक्रमा से सुहाग-संतान; शनिश्चरी पर शनि-शांति (साढ़ेसाती-ढैया), शनि-मंदिर (शिंगणापुर-कोकिलावन-तिरुनल्लार) की भीड़।
दक्षिण अफ़्रीका (डरबन) में 12। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
डरबन के लिए 12 में से 3 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या — साल में 1-3; सुहागिनें व्रत रखकर पीपल की 108 परिक्रमा कच्चा सूत लपेटते हुए करती हैं, फल-मिठाई-सिक्के चढ़ाकर, सोना-धोबिन/साहूकार-बहू की कथा सुनकर, फिर भोजन — पति-संतान की दीर्घायु व अखंड सुहाग; तीर्थ-स्नान (हरिद्वार-प्रयाग) का विशेष फल; ऊपर सूची में «(सोमवती)» लिखा है।
शनिवार की अमावस्या — शनि-शांति का श्रेष्ठ दिन: शनि-मंदिर/पीपल पर सरसों-तेल का दीप, काले तिल-उड़द-तेल-लोहा-काला वस्त्र दान (ग़रीब/सफ़ाई-कर्मी को), «ॐ शं शनैश्चराय नमः» 108, हनुमान-चालीसा, शनि-स्तोत्र (दशरथ-कृत), पितृ-तर्पण साथ; साढ़ेसाती-ढैया वाले विशेष; कुंडली-जाँच (साढ़ेसाती-रिपोर्ट) से पहले पुष्टि।
स्नान कर दक्षिण मुख बैठें, तांबे के लोटे में जल-काले तिल-(कुशा); अँगूठे की ओर से जल छोड़ते हुए «(गोत्र) (पिता/दादा का नाम) तृप्यताम्» 3-3 बार, फिर «सर्वे पितरः तृप्यन्ताम्»; अंत में गाय-कौए को खीर-रोटी, ग़रीब को अन्न — यही सरल दर्श-तर्पण; स्त्री भी कर सकती है (पुत्र न हो तो); पूर्ण विधि के लिए पितृ-पक्ष पन्ना।