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फ़िजी में अमावस्या 2026 की तारीखें — तिथि-समय सहित

फ़िजी में अमावस्या 2026: 12 तारीखें · 3 भारत से अलग
सब समय स्थानीय।
शहर-पन्ने: सुवा
तारीखअमावस्यातिथिनोट
सोमवार, 19 जनवरी 2026सोमवती माघ अमावस्या18 जनवरी, 6:34 AM → 19 जनवरी, 7:55 AMदर्श अमावस्या (संध्या): 18 जनवरी
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026फाल्गुन अमावस्या17 फ़रवरी, 12:05 AM → 18 फ़रवरी, 12:10 AM
गुरुवार, 19 मार्च 2026चैत्र अमावस्या18 मार्च, 2:56 PM → 19 मार्च, 1:30 PMदर्श अमावस्या (संध्या): 18 मार्च
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्या17 अप्रैल, 2:42 AM → 17 अप्रैल, 11:56 PM
रविवार, 17 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्या16 मई, 11:42 AM → 17 मई, 8:05 AMदर्श अमावस्या (संध्या): 16 मई
सोमवार, 15 जून 2026सोमवती आषाढ़ अमावस्या14 जून, 6:50 PM → 15 जून, 2:55 PM
मंगलवार, 14 जुलाई 2026आषाढ़ अमावस्या14 जुलाई, 1:20 AM → 14 जुलाई, 9:48 PM
बुधवार, 12 अगस्त 2026श्रावण अमावस्या11 अगस्त, 11:25 AM → 13 अगस्त, 5:44 AM
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026भाद्रपद अमावस्या10 सितंबर, 5:04 PM → 11 सितंबर, 3:36 PMदर्श अमावस्या (संध्या): 10 सितंबर
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026शनि आश्विन अमावस्या10 अक्टूबर, 4:06 AM → 11 अक्टूबर, 3:51 AM
सोमवार, 9 नवंबर 2026सोमवती कार्तिक अमावस्या8 नवंबर, 5:58 PM → 9 नवंबर, 7:04 PMदर्श अमावस्या (संध्या): 8 नवंबर
बुधवार, 9 दिसंबर 2026मार्गशीर्ष अमावस्या8 दिसंबर, 10:43 AM → 9 दिसंबर, 12:53 PMदर्श अमावस्या (संध्या): 8 दिसंबर

नियम

स्नान-दान उदया-तिथि के दिन; दर्श अमावस्या (पितृ-कार्य) जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त पर अमावस्या।

अमावस्या के बारे में

पितृ-दिन: गरुड़-पुराण/मनुस्मृति — अमावस्या को पितर वायु-रूप में वंशजों के द्वार पर आकर तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं; अमावस्या का तर्पण/श्राद्ध पितृ-दोष (कुंडली में सूर्य-राहु/शनि) की शांति का मासिक उपाय; दर्श-श्राद्ध (अमावस्या का श्राद्ध) पितृ-पक्ष के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण।

चंद्र-हीन दिन — मन (चंद्र) निर्बल, इसलिए शुभ-कार्य (विवाह-यात्रा-नया आरंभ) टालते हैं, पर जप-तप-दान-ध्यान (मौनी) व तांत्रिक/काली-साधना का श्रेष्ठ काल; सोमवती (चंद्र-वार + अमावस्या) पर पीपल-परिक्रमा से सुहाग-संतान; शनिश्चरी पर शनि-शांति (साढ़ेसाती-ढैया), शनि-मंदिर (शिंगणापुर-कोकिलावन-तिरुनल्लार) की भीड़।

प्रश्नोत्तर

2026 में कितनी अमावस्या हैं?

फ़िजी (सुवा) में 12। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।

क्या ये तारीखें भारत जैसी हैं?

सुवा के लिए 12 में से 3 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।

सोमवती अमावस्या क्या है और स्त्रियाँ क्या करती हैं?

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या — साल में 1-3; सुहागिनें व्रत रखकर पीपल की 108 परिक्रमा कच्चा सूत लपेटते हुए करती हैं, फल-मिठाई-सिक्के चढ़ाकर, सोना-धोबिन/साहूकार-बहू की कथा सुनकर, फिर भोजन — पति-संतान की दीर्घायु व अखंड सुहाग; तीर्थ-स्नान (हरिद्वार-प्रयाग) का विशेष फल; ऊपर सूची में «(सोमवती)» लिखा है।

शनिश्चरी (शनि) अमावस्या पर क्या करें?

शनिवार की अमावस्या — शनि-शांति का श्रेष्ठ दिन: शनि-मंदिर/पीपल पर सरसों-तेल का दीप, काले तिल-उड़द-तेल-लोहा-काला वस्त्र दान (ग़रीब/सफ़ाई-कर्मी को), «ॐ शं शनैश्चराय नमः» 108, हनुमान-चालीसा, शनि-स्तोत्र (दशरथ-कृत), पितृ-तर्पण साथ; साढ़ेसाती-ढैया वाले विशेष; कुंडली-जाँच (साढ़ेसाती-रिपोर्ट) से पहले पुष्टि।

तर्पण कैसे करें, पंडित न हो तो?

स्नान कर दक्षिण मुख बैठें, तांबे के लोटे में जल-काले तिल-(कुशा); अँगूठे की ओर से जल छोड़ते हुए «(गोत्र) (पिता/दादा का नाम) तृप्यताम्» 3-3 बार, फिर «सर्वे पितरः तृप्यन्ताम्»; अंत में गाय-कौए को खीर-रोटी, ग़रीब को अन्न — यही सरल दर्श-तर्पण; स्त्री भी कर सकती है (पुत्र न हो तो); पूर्ण विधि के लिए पितृ-पक्ष पन्ना।

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