यूके (ब्रिटेन) में छठ पूजा 2026: रविवार, 15 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय
यूके (ब्रिटेन) में छठ पूजा 2026: रविवार, 15 नवंबर 2026 (लंदन)
संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त: 4:11 PM GMT
भारत के दिन ही। 2026 में छठ पूजा भारत और यूके (ब्रिटेन) के सब शहरों में रविवार, 15 नवंबर 2026 को है।
छठ पूजा 2026 — यूके (ब्रिटेन) के सब शहर
| शहर | तारीख | संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त | तिथि (स्थानीय) |
|---|
लंदन UK time (GMT/BST) | रविवार, 15 नवंबर 2026 | 4:11 PM GMT | 14 नवंबर, 5:54 PM → 15 नवंबर, 8:32 PM GMT |
लेस्टर UK time (GMT/BST) | रविवार, 15 नवंबर 2026 | 4:11 PM GMT | 14 नवंबर, 5:54 PM → 15 नवंबर, 8:32 PM GMT |
बर्मिंघम UK time (GMT/BST) | रविवार, 15 नवंबर 2026 | 4:15 PM GMT | 14 नवंबर, 5:54 PM → 15 नवंबर, 8:32 PM GMT |
मैनचेस्टर UK time (GMT/BST) | रविवार, 15 नवंबर 2026 | 4:12 PM GMT | 14 नवंबर, 5:54 PM → 15 नवंबर, 8:32 PM GMT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जुड़े दिन (लंदन)
| नहाय-खाय | शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 |
| खरना | शनिवार, 14 नवंबर 2026 |
| उषा अर्घ्य (प्रातः) | सोमवार, 16 नवंबर 2026 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
छठ पूजा की तारीख कैसे तय होती है
संध्या अर्घ्य स्थानीय सूर्यास्त पर षष्ठी; उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर।
महत्व
छठ में सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी — ब्रह्मा की मानस-पुत्री, संतान की रक्षक) की पूजा होती है। मान्यता है कि छठ का व्रत संतान-सुख, परिवार के आरोग्य और सौभाग्य के लिए सबसे फलदायी है — और यह उन गिने-चुने पर्वों में है जहाँ डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, यानी उतार में भी कृतज्ञता।
इसमें कोई पंडित, मूर्ति, मंदिर नहीं — सिर्फ़ जल, सूर्य, बाँस का सूप-दउरा, मिट्टी का चूल्हा, गेहूँ-गुड़-घी का ठेकुआ और लोकगीत। शुद्धता का नियम कड़ा है: चार दिन लहसुन-प्याज़ नहीं, नया चूल्हा, ज़मीन पर सोना, हाथ से बना प्रसाद।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- दिन 1 — नहाय-खाय (चतुर्थी): व्रती सुबह नदी/तालाब या घर में स्नान, घर की धुलाई-लिपाई; दोपहर में नए/मिट्टी के चूल्हे पर एक बार का सात्विक भोजन — कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी, चने की दाल, अरवा चावल, सेंधा नमक, घी — पहले सूर्य को भोग, फिर व्रती, फिर परिवार। इसी दिन से लहसुन-प्याज़-मांस बंद।
- दिन 2 — खरना/लोहंडा (पंचमी): व्रती पूरे दिन निर्जला; शाम को सूर्यास्त के बाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़-चावल की खीर (रसियाव), घी लगी रोटी और केला बनाकर छठी मैया को भोग; व्रती एकांत में प्रसाद खाती है (शोर हुआ तो वहीं रुक जाती है), फिर सबको प्रसाद। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू।
- दिन 3 — संध्या अर्घ्य (षष्ठी): दिन में ठेकुआ, कसार (चावल के लड्डू), फल, नारियल, गन्ना, हल्दी-अदरक की गाँठ, सिंघाड़ा, केला का घवद, नींबू (डाभ), सुथनी, मूली आदि बाँस के सूप और दउरा (टोकरी) में सजाएँ; दउरा घर का पुरुष सिर पर उठाकर घाट ले जाता है।
- घाट पर मिट्टी की सूर्य-वेदी/कोसी (हाथी वाला मिट्टी का दीप-स्तंभ, मन्नत पूरी होने पर) सजाएँ; सूर्यास्त (ऊपर समय) से पहले व्रती जल में कमर तक खड़ी होकर सूप उठाए; परिवार के लोग दूध-जल से डूबते सूर्य को अर्घ्य दें — «ॐ घृणि सूर्याय नमः» या छठ के गीत; सूप की पाँच/सात परिक्रमा।
- रात में घाट या घर पर जागरण, कोसी भरना (मन्नत वालों के लिए — गन्नों के मंडप में मिट्टी के 12/24 दीये), छठ के लोकगीत — «केलवा के पात पर उगेलन सूरज मल झुके-झुके», «काँच ही बाँस के बहँगिया»।
- दिन 4 — उषा अर्घ्य व पारण (सप्तमी): भोर में (ब्रह्म मुहूर्त में) वही सूप-दउरा लेकर घाट; सूर्योदय (ऊपर समय) पर उगते सूर्य को अर्घ्य; व्रती जल से निकलकर बड़ों के पैर छूए, प्रसाद (ठेकुआ) बाँटे।
- पारण: घाट से लौटकर व्रती छठी मैया को प्रणाम कर अदरक-गुड़/ठेकुआ-जल से 36 घंटे का व्रत खोले; फिर हल्का भोजन। सूप का प्रसाद मोहल्ले-रिश्तेदारों में बाँटना अनिवार्य — छठ का प्रसाद माँगकर खाना भी शुभ माना जाता है।
- व्रत का संकल्प प्रायः मन्नत या परिवार की परंपरा से लिया जाता है और फिर हर साल निभाया जाता है; कोई साल छूटे तो किसी और परवैतिन से सूप उठवाकर पूजा पूरी की जाती है।
प्रश्नोत्तर
क्या छठ पूजा 2026 यूके (ब्रिटेन) और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — रविवार, 15 नवंबर 2026।
लंदन में छठ पूजा 2026 का पूजा-समय?
संध्या अर्घ्य — सूर्यास्त: 4:11 PM (GMT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (लंदन के लिए UK time (GMT/BST))।
छठी मैया कौन हैं?
षष्ठी देवी — ब्रह्मा की मानस-पुत्री और सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं; बालकों की रक्षक देवी। छठ में सूर्य और छठी मैया दोनों की पूजा है।
क्या पुरुष छठ का व्रत रख सकते हैं?
हाँ — छठ में स्त्री-पुरुष दोनों व्रती होते हैं; बिहार में बहुत-से पुरुष परवैत हैं। मन्नत और शुद्धता का नियम सबके लिए एक है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों?
छठ उन इने-गिने पर्वों में है जहाँ अस्त होते सूर्य की भी पूजा है — सिखाता है कि उतार में भी कृतज्ञ रहो; शाम का अर्घ्य सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा और सुबह का उषा को समर्पित माना जाता है।
ठेकुआ कैसे बनता है?
गेहूँ का आटा, पिघला गुड़, घी का मोयन, सौंफ-नारियल कड़ा गूँथकर लकड़ी के साँचे में दबाएँ और धीमी आँच पर घी में सुनहरा तलें — ऊपर भोग-खंड में मात्रा दी है। बाज़ार का आटा नहीं, घर में धोकर-सुखाकर पिसवाया आटा।
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