| शहर | तारीख | लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न) | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| लंदन UK time (GMT/BST) | रविवार, 8 नवंबर 2026 | 4:35 PM – 6:13 PM GMT | 8 नवंबर, 5:58 AM → 9 नवंबर, 7:06 AM GMT |
| लेस्टर UK time (GMT/BST) | रविवार, 8 नवंबर 2026 | 4:35 PM – 6:11 PM GMT | 8 नवंबर, 5:58 AM → 9 नवंबर, 7:04 AM GMT |
| बर्मिंघम UK time (GMT/BST) | रविवार, 8 नवंबर 2026 | 4:39 PM – 6:15 PM GMT | 8 नवंबर, 5:58 AM → 9 नवंबर, 7:07 AM GMT |
| मैनचेस्टर UK time (GMT/BST) | रविवार, 8 नवंबर 2026 | 4:36 PM – 6:10 PM GMT | 8 नवंबर, 5:58 AM → 9 नवंबर, 7:11 AM GMT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
| नरक चतुर्दशी / अभ्यंग स्नान (छोटी दिवाली) | शनिवार, 7 नवंबर 2026 |
| गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 |
| भाई दूज | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद के प्रदोष-काल में अमावस्या तिथि हो; लक्ष्मी-पूजा प्रदोष-काल में स्थिर वृषभ लग्न में।
अमावस्या की सबसे अँधेरी रात में दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। समुद्र-मंथन से इसी दिन लक्ष्मी प्रकट हुईं, इसलिए लक्ष्मी-पूजन; साथ में गणेश (बुद्धि), सरस्वती (विद्या) और कुबेर (कोष) की पूजा। व्यापारियों का नया वर्ष (बही-खाता) यहीं से शुरू होता है।
दीवाली की रात घर की स्त्री को «गृहलक्ष्मी» कहा जाता है — पूजा वही करवाती है, दीये वही जलाती है, और अहोई-करवा चौथ के करवे का जल वही घर में छिड़कती है। यह पर्व घर की स्त्री का ही है।
हाँ — रविवार, 8 नवंबर 2026।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 4:35 PM से 6:13 PM (GMT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (लंदन के लिए UK time (GMT/BST))।
गणेश (पहले), लक्ष्मी (मुख्य), कुबेर, सरस्वती, कलश (वरुण), और घर की रीत से काली/दुर्गा या कुल-देवी; बही-खाता, तिजोरी, औज़ार भी पूजे जाते हैं।
मिट्टी की, बैठी हुई (कमल पर), गणेश लक्ष्मी के दाएँ; हर साल नई। पुरानी मूर्ति अगली दीवाली से पहले जल या पौधे की मिट्टी में विसर्जित करें, कूड़े में नहीं।
अनिवार्य नहीं; कई स्त्रियाँ अमावस्या को दिन में फलाहार रखकर लक्ष्मी-पूजा के बाद भोजन करती हैं। पूजा, दीपदान और परिवार का साथ मुख्य है।
कार्तिक अमावस्या की मध्य-रात्रि शक्ति-साधना की रात मानी गई है; बंगाल-असम में लक्ष्मी पूजा पहले (कोजागरी पूर्णिमा को) हो चुकी होती है, इसलिए अमावस्या माँ काली की। दोनों एक ही रात, अलग परंपरा।