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जर्मनी में दिवाली 2026: रविवार, 8 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय

जर्मनी में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026: रविवार, 8 नवंबर 2026 (बर्लिन)
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 4:37 PM – 6:13 PM CET
भारत के दिन ही। 2026 में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) भारत और जर्मनी के सब शहरों में रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026 — जर्मनी के सब शहर

शहरतारीखलक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न)तिथि (स्थानीय)
बर्लिन
CET/CEST
रविवार, 8 नवंबर 20264:37 PM – 6:13 PM CET8 नवंबर, 6:58 AM → 9 नवंबर, 8:05 AM CET
फ्रैंकफर्ट
CET/CEST
रविवार, 8 नवंबर 20265:05 PM – 6:45 PM CET8 नवंबर, 6:58 AM → 9 नवंबर, 8:07 AM CET
म्यूनिख
CET/CEST
रविवार, 8 नवंबर 20265:01 PM – 6:42 PM CET8 नवंबर, 6:58 AM → 9 नवंबर, 8:10 AM CET

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

जुड़े दिन (बर्लिन)

नरक चतुर्दशी / अभ्यंग स्नान (छोटी दिवाली)रविवार, 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)सोमवार, 9 नवंबर 2026
भाई दूजमंगलवार, 10 नवंबर 2026

अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) की तारीख कैसे तय होती है

जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद के प्रदोष-काल में अमावस्या तिथि हो; लक्ष्मी-पूजा प्रदोष-काल में स्थिर वृषभ लग्न में।

महत्व

अमावस्या की सबसे अँधेरी रात में दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। समुद्र-मंथन से इसी दिन लक्ष्मी प्रकट हुईं, इसलिए लक्ष्मी-पूजन; साथ में गणेश (बुद्धि), सरस्वती (विद्या) और कुबेर (कोष) की पूजा। व्यापारियों का नया वर्ष (बही-खाता) यहीं से शुरू होता है।

दीवाली की रात घर की स्त्री को «गृहलक्ष्मी» कहा जाता है — पूजा वही करवाती है, दीये वही जलाती है, और अहोई-करवा चौथ के करवे का जल वही घर में छिड़कती है। यह पर्व घर की स्त्री का ही है।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सुबह स्नान; घर की अंतिम सफ़ाई; मुख्य द्वार पर रंगोली, तोरण (आम/अशोक के पत्ते-गेंदा), दोनों ओर लक्ष्मी-पद (दहलीज़ से भीतर की ओर), स्वस्तिक व शुभ-लाभ।
  2. शाम को पूजा-स्थान: उत्तर-पूर्व (ईशान) या पूर्व दिशा में चौकी पर लाल/पीला कपड़ा; बीच में लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति (गणेश लक्ष्मी के दाएँ), साथ में कुबेर, सरस्वती का चित्र, कलश (जल-सुपारी-सिक्का-आम के पत्ते-नारियल), चाँदी/ताँबे का सिक्का, बही-खाता, तिजोरी की चाबी।
  3. प्रदोष-काल (ऊपर समय) में परिवार सहित बैठें; हाथ में जल-अक्षत-फूल लेकर संकल्प — «मैं परिवार की सुख-समृद्धि हेतु लक्ष्मी-गणेश का पूजन करती/करता हूँ।»
  4. पहले गणेश-पूजन (दूर्वा, मोदक/लड्डू, सिंदूर), फिर कलश-पूजन, फिर लक्ष्मी-पूजन — स्नान (जल-पंचामृत), वस्त्र, कमल/गुलाब-पुष्प, इत्र, रोली-अक्षत, खील-बताशे, मिठाई, फल, पान-सुपारी, लौंग-इलायची; «ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः» का जप या श्रीसूक्त/लक्ष्मी-चालीसा का पाठ।
  5. कुबेर-सरस्वती-बही-खाता और तिजोरी का पूजन; नए सिक्के-गहने पूजा में रखें। घर के औज़ार/वाहन पर भी रोली-अक्षत।
  6. आरती — «ॐ जय लक्ष्मी माता», फिर «जय गणेश देवा»; कपूर-आरती; परिवार के सब सदस्य पैर छूएँ, बड़े छोटों को आशीर्वाद और शगुन दें।
  7. दीपदान: पूजा के दीये से घर के सब दीये जलाएँ — द्वार पर सबसे पहले, फिर तुलसी, रसोई, जल-स्थान, छत, हर कमरा, बाहर की गली/नाली तक; एक बड़ा दीपक (या अखंड) रात-भर पूजा-स्थान पर। कुल दीयों की संख्या 11, 21, 51 या घर की रीत से।
  8. अहोई/करवा चौथ का करवा हो तो उसका जल घर में छिड़कें और अहोई माता का चित्र पोंछें। प्रसाद बाँटें, पड़ोसियों-सफ़ाईकर्मियों-काम करने वालों को मिठाई-शगुन दें।
  9. रात में लक्ष्मी-आगमन के लिए घर का मुख्य द्वार खुला/दीपों से रोशन रखें; अगली सुबह (गोवर्धन/प्रतिपदा) पूजा-स्थान की सफ़ाई और अन्नकूट।

प्रश्नोत्तर

क्या दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026 जर्मनी और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — रविवार, 8 नवंबर 2026।

बर्लिन में दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 2026 का पूजा-समय?

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल + वृषभ लग्न): 4:37 PM से 6:13 PM (CET)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (बर्लिन के लिए CET/CEST)।

दीवाली की पूजा में कौन-कौन से देवता?

गणेश (पहले), लक्ष्मी (मुख्य), कुबेर, सरस्वती, कलश (वरुण), और घर की रीत से काली/दुर्गा या कुल-देवी; बही-खाता, तिजोरी, औज़ार भी पूजे जाते हैं।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कैसी हो और पुरानी का क्या करें?

मिट्टी की, बैठी हुई (कमल पर), गणेश लक्ष्मी के दाएँ; हर साल नई। पुरानी मूर्ति अगली दीवाली से पहले जल या पौधे की मिट्टी में विसर्जित करें, कूड़े में नहीं।

क्या दीवाली पर व्रत रखते हैं?

अनिवार्य नहीं; कई स्त्रियाँ अमावस्या को दिन में फलाहार रखकर लक्ष्मी-पूजा के बाद भोजन करती हैं। पूजा, दीपदान और परिवार का साथ मुख्य है।

बंगाल में दीवाली की रात काली पूजा क्यों?

कार्तिक अमावस्या की मध्य-रात्रि शक्ति-साधना की रात मानी गई है; बंगाल-असम में लक्ष्मी पूजा पहले (कोजागरी पूर्णिमा को) हो चुकी होती है, इसलिए अमावस्या माँ काली की। दोनों एक ही रात, अलग परंपरा।

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