यूके (ब्रिटेन) में पोंगल 2026: बुधवार, 14 जनवरी — शहर-वार पूजा-समय
यूके (ब्रिटेन) में पोंगल 2026: बुधवार, 14 जनवरी 2026 (लंदन)
पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक): 9:35 AM – 4:19 PM GMT
भारत के दिन ही। 2026 में पोंगल भारत और यूके (ब्रिटेन) के सब शहरों में बुधवार, 14 जनवरी 2026 को है।
पोंगल 2026 — यूके (ब्रिटेन) के सब शहर
| शहर | तारीख | पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक) | तिथि (स्थानीय) |
|---|
लंदन UK time (GMT/BST) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 9:35 AM – 4:19 PM GMT | 13 जनवरी, 9:48 AM → 14 जनवरी, 12:23 PM GMT |
लेस्टर UK time (GMT/BST) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 9:35 AM – 4:18 PM GMT | 13 जनवरी, 9:48 AM → 14 जनवरी, 12:23 PM GMT |
बर्मिंघम UK time (GMT/BST) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 9:35 AM – 4:22 PM GMT | 13 जनवरी, 9:48 AM → 14 जनवरी, 12:23 PM GMT |
मैनचेस्टर UK time (GMT/BST) | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | 9:35 AM – 4:19 PM GMT | 13 जनवरी, 9:48 AM → 14 जनवरी, 12:23 PM GMT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
पोंगल की तारीख कैसे तय होती है
सूर्य का मकर (निरयण) में प्रवेश — सौर घटना, इसलिए तारीख लगभग सब जगह एक; मध्यरात्रि के पास हो तो बदल सकती है।
महत्व
सूर्य-कृतज्ञता व उत्तरायण: थाई माह का आरंभ = सूर्य का मकर-प्रवेश, उत्तरायण (देवताओं का दिन) — «थाई पिरंदाल वळि पिरक्कुम» (थाई आते ही रास्ता खुलता है): विवाह-नए काम की शुभ ऋतु; धान की कटाई पूरी — किसान-परिवार सूर्य, वर्षा, भूमि व पशु को धन्यवाद देते हैं; यही मकर संक्रांति का सार।
चार दिन: भोगी — इंद्र (भोगी = इंद्र, वर्षा-देव) का दिन, पुरानी-टूटी वस्तुएँ भोर में जलाकर नई शुरुआत, घर की सफ़ाई-लिपाई; थाई पोंगल — सूर्य को उफनता पोंगल; मट्टु पोंगल — गाय-बैल (कृषि-सहायक) को स्नान-सींग-रंग-माला, जल्लीकट्टु/मंजु-विरट्टु; काणुम पोंगल — «काणुम» = देखना: रिश्तेदारों से मिलना, बहनें भाइयों की मंगल-कामना (कणु पिड़ि), नदी-किनारे भोजन।
स्त्रियों का पर्व: भोर का कोलम (चावल-आटे की रंगोली — चींटी-पक्षियों को भोजन भी), नए मिट्टी के बर्तन पर हल्दी-अदरक की ताज़ी गाँठ बाँधना, गन्ना, पोंगल पकाना — घर की देवी-रूप स्त्री द्वारा; काणुम पोंगल की «कणु पिड़ि» में बहनें बचे पोंगल-रंगीन चावल पक्षियों को रखकर भाई की दीर्घायु माँगती हैं।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- भोगी (पहला दिन): भोर में घर की पुरानी-टूटी वस्तुएँ (चटाई-कपड़े-झाड़ू — प्लास्टिक/टायर नहीं) आँगन में अलाव में जलाना (नए की शुरुआत — «भोगी मंडलु»), ढोल-गीत; घर की सफ़ाई-लिपाई-सफ़ेदी, नए वस्त्र-बर्तन ख़रीदना, आम-पत्तों का तोरण; आंध्र-तेलंगाना में बच्चों पर «भोगी पळ्ळु» (बेर-फूल-सिक्के) की वर्षा; इंद्र-पूजा (कुछ घर)।
- थाई पोंगल — भोर: सूर्योदय से पहले स्नान, नए वस्त्र; द्वार-आँगन धोकर बड़ा **कोलम** (चावल-आटे/रंग की रंगोली — सूर्य-गन्ना-कलश की आकृतियाँ), बीच में गोबर के गोले पर पीले कद्दू (परंगिक्काय) का फूल; आँगन/छत पर खुले में (सूर्य के सामने) चूल्हा — ईंटों का।
- पोंगल-बर्तन: नया मिट्टी (या पीतल) का बर्तन — उस पर हल्दी-चंदन-कुंकुम की तीन धारियाँ, गले पर ताज़ी हल्दी-अदरक की गाँठ (पत्तों सहित) व आम-पत्ते बाँधना; बर्तन के पास गन्ने की जोड़ी, केले का पत्ता, नारियल, केला, सूर्य-देव का चित्र (या सूर्य की ओर मुख)।
- पोंगल पकाना (सूर्योदय के बाद, अभिजित तक — ऊपर समय): बर्तन में दूध-जल उबालें — जैसे ही दूध **उफने** (शुभ: उत्तर/पूर्व दिशा में), पूरा परिवार «पोंगलो पोंगल!» पुकारे, शंख/ढोल; तब नया चावल (धान की पहली फ़सल), मूँग-दाल, गुड़, घी, काजू-किशमिश, इलायची डालकर सक्करै (मीठा) पोंगल; साथ वेण (नमकीन — काली मिर्च-जीरा-अदरक) पोंगल।
- सूर्य-पूजा: केले के पत्ते पर पोंगल, गन्ना, केला, नारियल, हल्दी-गाँठ रखकर सूर्य को अर्पण — «सूर्याय नमः», आदित्य-हृदय/सूर्य-मंत्र, कपूर-आरती; सूर्य को अर्घ्य; पोंगल को पहले सूर्य, फिर घर के देवता, गाय, कौवे (कणु), फिर परिवार — केले के पत्ते पर भोजन।
- मट्टु पोंगल (तीसरा दिन): गाय-बैल को स्नान, सींगों पर रंग-पीतल के खोल, माला-घंटी, माथे पर कुंकुम-हल्दी, गले में फूल; उन्हें पोंगल-गुड़-गन्ना-केला खिलाना, आरती; गोशाला-पूजा; गाँवों में जल्लीकट्टु (बैल-दौड़) व मंजु-विरट्टु; घर में पालतू पशु-पक्षियों को भोजन।
- काणुम पोंगल (चौथा दिन): परिवार-रिश्तेदार मिलना, नदी/समुद्र-तट पर पिकनिक; **कणु पिड़ि** — घर की स्त्रियाँ/बहनें भोर में आँगन में हल्दी-पत्ते पर बचा पोंगल, रंगीन चावल (हल्दी-कुंकुम), गन्ना, केला रखकर कौवों को अर्पित करती हैं और भाइयों की दीर्घायु-समृद्धि माँगती हैं (भाई बहन को उपहार); बड़ों का आशीर्वाद, नए कपड़े।
- समापन: गन्ना चूसना-बाँटना, कोलम अगले दिन तक; पोंगल-बर्तन साल-भर पूजा में; बचे चावल पक्षियों को; उत्तरायण से नए काम-विवाह के मुहूर्त देखना।
प्रश्नोत्तर
क्या पोंगल 2026 यूके (ब्रिटेन) और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — बुधवार, 14 जनवरी 2026।
लंदन में पोंगल 2026 का पूजा-समय?
पुण्य काल (संक्रांति-क्षण से सूर्यास्त तक): 9:35 AM से 4:19 PM (GMT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (लंदन के लिए UK time (GMT/BST))।
सक्करै पोंगल कैसे बनाएँ?
नया चावल 1 कप + भुनी मूँग-दाल ¼ कप, दूध-जल में गलने तक; गुड़ ¾-1 कप पिघलाकर छानकर डालें, घी 3-4 चम्मच, काजू-किशमिश घी में भूनकर, इलायची; बर्तन में दूध पहले उफनने दें (शगुन), फिर चावल डालें।
हल्दी-अदरक की गाँठ बर्तन पर क्यों?
ताज़ी हल्दी (मंजल) शुभता-शुद्धि व फ़सल का प्रतीक — पत्तों सहित गाँठ बर्तन के गले पर बाँधी जाती है (अदरक-गाँठ साथ), आम-पत्ते; यह बर्तन को «कलश» का रूप देती है; गन्ना समृद्धि, केला शुभ।
काणुम पोंगल की कणु पिड़ि क्या है?
चौथे दिन भोर में स्त्रियाँ/बहनें हल्दी-पत्ते पर बचा पोंगल, रंगीन (हल्दी-कुंकुम) चावल, गन्ना-केला रखकर कौवों को अर्पित करती हैं — भाइयों की दीर्घायु-समृद्धि की प्रार्थना; भाई बहनों को उपहार; परिवार-भ्रमण का दिन।
पोंगल और मकर संक्रांति में अंतर?
एक ही सौर-संक्रमण (सूर्य का मकर-प्रवेश) — तमिलनाडु में थाई पोंगल (चार दिन, उफनता पोंगल), उत्तर में मकर संक्रांति (खिचड़ी-तिल-स्नान-पतंग), पंजाब में लोहड़ी (एक दिन पहले), असम में माघ बिहू; मकर संक्रांति का अलग पन्ना — रीतें वहाँ।
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