अमेरिका में बैसाखी 2026: मंगलवार, 14 अप्रैल — शहर-वार पूजा-समय

अमेरिका में बैसाखी 2026: मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 (न्यूयॉर्क)
भारत के दिन ही। 2026 में बैसाखी भारत और अमेरिका के सब शहरों में मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को है।

बैसाखी 2026 — अमेरिका के सब शहर

शहरतारीखपूजा-समयतिथि (स्थानीय)
न्यूयॉर्क
Eastern Time (EST/EDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 3:39 PM → 14 अप्रैल, 2:43 PM EDT
न्यू जर्सी (एडिसन)
Eastern Time (EST/EDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 3:39 PM → 14 अप्रैल, 2:43 PM EDT
शिकागो
Central Time (CST/CDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 2:39 PM → 14 अप्रैल, 1:43 PM CDT
ह्यूस्टन
Central Time (CST/CDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 2:39 PM → 14 अप्रैल, 1:43 PM CDT
डलास
Central Time (CST/CDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 2:39 PM → 14 अप्रैल, 1:43 PM CDT
अटलांटा
Eastern Time (EST/EDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 3:39 PM → 14 अप्रैल, 2:43 PM EDT
वॉशिंगटन डीसी
Eastern Time (EST/EDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 3:39 PM → 14 अप्रैल, 2:43 PM EDT
लॉस एंजेलेस
Pacific Time (PST/PDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 12:39 PM → 14 अप्रैल, 11:43 AM PDT
सैन होज़े (बे एरिया)
Pacific Time (PST/PDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 12:39 PM → 14 अप्रैल, 11:43 AM PDT
सिएटल
Pacific Time (PST/PDT)
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026—13 अप्रैल, 12:39 PM → 14 अप्रैल, 11:43 AM PDT

समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

महत्व

खगोल: सूर्य निरयण मेष में — वैदिक सौर-वर्ष का आरंभ (महाविषुव — कभी दिन-रात बराबर का बिंदु, अयनांश से अब 14 अप्रैल के आसपास); सौर पंचांग (तमिल, मलयालम, बंगाली, असमिया, ओडिया, पंजाबी-नानकशाही, नेपाली विक्रम-सौर) सब यहीं से गिनते हैं; संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो पर्व अगले दिन (14) — ऊपर तिथि इसी नियम से।

बैसाखी 1699: गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा-पंथ की स्थापना की (पंज-प्यारे) — सिखों के लिए धार्मिक नववर्ष-सा; 1919 जलियाँवाला बाग़ भी बैसाखी को; किसानों की रबी-कटाई का उत्सव — «जट्टा आई बैसाखी»; हरिद्वार-ऋषिकेश में मेष-संक्रांति का गंगा-स्नान (सतयुग-आरंभ की मान्यता), गंगा-अवतरण से जुड़ा गंगा-सप्तमी अलग।

विषु: सुबह सबसे पहले «कणि» (कृष्ण-प्रतिमा, कोन्ना (अमलतास) के पीले फूल, चावल, फल, सोना-सिक्के, दर्पण, दीप — उरुली में) देखना = साल-भर समृद्धि; बड़ों से कैनीट्टम (सिक्के); बिहू: गाय की पूजा (गोरु बिहू — कटाई के बाद), नया साल (मानुह बिहू — बड़ों को गमोसा), बिहू-गीत-नृत्य (ढोल-पेपा), पीठा; पुथांडु: कणि (तमिल), मांगा-पचड़ी (छह रस), पंचांग-श्रवण; पोहेला बोइशाख: हालखाता (नया बही-खाता), प्रभात-फेरी (कोलकाता), पंता-भात (बांग्लादेश)।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. साझा: ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय पर स्नान (नदी — गंगा-हरिद्वार, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, महानदी — या घर पर गंगाजल), सूर्य-अर्घ्य (जल-लाल फूल-अक्षत, «ॐ घृणि सूर्याय नमः»), नए/साफ़ वस्त्र; घर के मंदिर में कुल-देवता/विष्णु-सूर्य पूजा, नया पंचांग/कैलेंडर स्थापन (पंचांग-श्रवण — वर्ष-फल पढ़ना); पितरों को जल; दान — सत्तू, जल-घड़ा, पंखा, छाता, गुड़, चना (गर्मी-आरंभ का दान), अन्न-वस्त्र।
  2. विषु (केरल): पिछली रात विषुक्कणि सजाना — उरुली (पीतल-थाल) में कच्चा चावल, कोन्ना-फूल (कणिक्कोन्ना — अमलतास), खीरा-कटहल-आम-केला, सोने का आभूषण, सिक्के, दर्पण (वाल्कण्णाड़ि), नया कपड़ा, ग्रंथ, निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन की मूर्ति के सामने; सुबह घर की बड़ी स्त्री सबसे पहले कणि देखती है, फिर एक-एक को आँखें बंद कराकर कणि के सामने लाती है (पहला दर्शन); कैनीट्टम — बड़े छोटों को सिक्के; विषु-सद्या (विषुक्कट्टा, मांगा-पचड़ी — छह रस), पटाखे (विषुप्पड़क्कम), गाय-पक्षियों को कणि का अंश; शबरीमला-गुरुवायूर में विषुक्कणि-दर्शन।
  3. बोहाग/रोंगाली बिहू (असम): चैत्र-संक्रांति (13 अप्रैल — बिहू-1) «गोरु बिहू» — गाय-बैल को नदी में नहलाना, हल्दी-उड़द-लौकी-बैंगन से, नई रस्सी, «लाउ खा, बेंगेना खा…» गीत; मेष-संक्रांति (14 — बिहू-2) «मानुह बिहू» — स्नान, नए कपड़े, बड़ों को गमोसा-प्रणाम (बिहुवान), पीठा (तिल-नारियल), लारू, दही-चिड़ा; तीसरा «गोसाईं बिहू» — घर के देवता, नामघर; सात दिन बिहू-नृत्य (ढोल-पेपा-गगना), हुसोरी (घर-घर गीत-आशीर्वाद), मुकोली बिहू; बिहू-मंच।
  4. पुथांडु (तमिलनाडु): पिछली रात «कणि» — थाल में फल (आम-कटहल-केला), फूल, सुपारी, सोना-चाँदी, दर्पण, नया पंचांग; सुबह कणि-दर्शन, स्नान, मंदिर, «पंचांग-पड़नम» (वर्ष-फल श्रवण), मांगा-पचड़ी (कच्चा आम-नीम-गुड़-मिर्च-नमक-इमली — छह रस = जीवन के छह स्वाद), वड़ई-पायसम, मदुरै-मीनाक्षी में चित्तिरै-तिरुविळा आरंभ; तमिल नववर्ष «इनिय पुत्ताण्डु नल्वाळ्त्तुक्कळ्»।
  5. पोहेला बोइशाख (बंगाल-त्रिपुरा-बांग्लादेश): सुबह प्रभात-फेरी (रवीन्द्र-संगीत «एसो हे बोइशाख»), नए कपड़े (लाल-सफ़ेद साड़ी), लक्ष्मी-गणेश पूजा व **हालखाता** — व्यापारी नया बही-खाता (स्वस्तिक-सिंदूर), ग्राहकों को मिठाई-कैलेंडर; घर में पायेस-लुची-मिष्टि, कालीघाट-दक्षिणेश्वर; बांग्लादेश में मंगल-शोभायात्रा (ढाका), पंता-इलिश; «शुभो नोबोबोर्षो»।
  6. पणा/महा-विषुव संक्रांति (ओडिशा): «पणा» (बेल-दही-गुड़-दूध-केले का शरबत) बनाकर तुलसी-चौरा पर घड़ा टाँगना (बसुंधरा-थेकी — बूँद-बूँद पौधे को जल — गर्मी में), छतुआ (सत्तू) दान, हनुमान-जयंती (ओडिशा में इसी दिन), झामु-यात्रा (अग्नि-पथ), नया ओडिया वर्ष; सतुआनी/जुड़-शीतल (बिहार-मिथिला-नेपाल-तराई): सत्तू-गुड़-आम की चटनी-टिकोरा, «जुड़-शीतल» पर बड़े बच्चों के सिर पर बासी जल (शीतलता-आशीर्वाद), पेड़-पौधों को जल, घर की लिपाई; नेपाल में नववर्ष (बैसाख 1) — भक्तपुर बिस्केट-जात्रा, स्नान-दान।
  7. उत्तराखंड-हिमाचल-कश्मीर: बिखौती (उत्तराखंड — मेले, गंगा-अलकनंदा स्नान, नया अन्न), बिशु/बैसाखी (हिमाचल — देव-मेले), नवरेह (कश्मीरी पंडित — चैत्र में, सौर से अलग); तेलुगु-कन्नड़ में उगादी चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा (चंद्र) पर — इस पन्ने का नहीं; सब जगह सत्तू-जल-आम का नया अन्न।

प्रश्नोत्तर

क्या बैसाखी 2026 अमेरिका और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — मंगलवार, 14 अप्रैल 2026।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (न्यूयॉर्क के लिए Eastern Time (EST/EDT))।

बैसाखी और खालसा का क्या संबंध?

1699 की बैसाखी को गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में पंज-प्यारों को अमृत छकाकर खालसा-पंथ की स्थापना की — इसलिए सिखों के लिए बैसाखी खालसा-सिरजना दिवस (नानकशाही कैलेंडर में वैसाख-1); गुरुद्वारों में नगर-कीर्तन, अखंड-पाठ, लंगर; साथ ही रबी-कटाई का किसान-पर्व — दोनों एक दिन।

विषुक्कणि क्या है और कैसे सजाएँ?

«कणि» = साल का पहला दर्शन — विषु की भोर में आँख खोलते ही शुभ-वस्तुएँ देखना ताकि साल शुभ हो; रात को उरुली (पीतल-थाल) में कच्चा चावल, कोन्ना (अमलतास) के पीले फूल, खीरा-कटहल-आम-केला-नारियल, सोने का गहना, सिक्के, दर्पण (जिसमें कणि व अपना चेहरा), नया कपड़ा, ग्रंथ, जलता निलविलक्कु — कृष्ण/गुरुवायूरप्पन की मूर्ति के सामने; भोर में घर की बड़ी स्त्री पहले देखती है, फिर सबको आँख बंद कराकर लाती है; फिर कैनीट्टम (सिक्के)।

बिहू के सात दिन कौन-से हैं?

बोहाग/रोंगाली बिहू: 1 गोरु बिहू (चैत्र-संक्रांति — गाय-बैल को नहलाना-पूजना), 2 मानुह बिहू (मेष-संक्रांति — नववर्ष, स्नान, नए कपड़े, गमोसा-प्रणाम, पीठा), 3 गोसाईं बिहू (घर-देवता/नामघर), 4 तातोर बिहू (करघा-वस्त्र), 5 नांगोलोर बिहू (हल-औज़ार), 6 घरोसिया-जीबोर बिहू (पालतू पशु), 7 चेरा बिहू (समापन) — क्रम-नाम इलाक़े से बदलते; पूरे सात दिन बिहू-नृत्य-हुसोरी।

मांगा-पचड़ी में छह रस क्यों?

तमिल पुथांडु व केरल-विषु की पचड़ी में कच्चा आम (खट्टा), नीम-फूल (कड़वा), गुड़ (मीठा), मिर्च (तीखा), नमक (नमकीन), इमली/कच्चा केला (कसैला) — छह स्वाद = जीवन के सुख-दुःख-सब का स्वीकार; नए साल के पहले कौर में — उगादी-पचड़ी (तेलुगु-कन्नड़) भी यही भाव (नीम-गुड़)।

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