🪔 पूजा-विधि

🌅 चैती छठ (चैत्र शुक्ल षष्ठी — सूर्य षष्ठी) पूजा-विधि — कैसे करें (चरण-दर-चरण)

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

यह चैती छठ के चार दिनों की घरेलू विधि है — कार्तिक-छठ जैसी ही; गर्मी में जल-सावधानी के साथ।

चैती छठ (चैत्र शुक्ल षष्ठी — सूर्य षष्ठी) कैसे करें — पूजा के चरण

  1. नहाय-खाय (चतुर्थी): व्रती सुबह नदी/तालाब/घर पर स्नान, घर-रसोई की शुद्धि, नया मिट्टी का चूल्हा या शुद्ध चूल्हा; एक समय सात्विक भोजन — अरवा चावल, चने की दाल, कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी सेंधा नमक-घी में (प्याज़-लहसुन नहीं); परिवार भी वही; व्रती ज़मीन पर सोएँ।
  2. खरना/लोहंडा (पंचमी): दिन-भर निर्जला व्रत; शाम सूर्यास्त के बाद (ऊपर समय) मिट्टी के चूल्हे-आम की लकड़ी पर गुड़-चावल-दूध की रसियाव-खीर व रोटी (घी-चुपड़ी) — पहले छठी मैया-सूर्य को भोग (केले के पत्ते पर), फिर व्रती एकांत-शांति में प्रसाद ग्रहण (शोर न हो — व्रती को आवाज़ सुनने पर वहीं रोक देने की रीत), फिर परिवार-पड़ोस को; इसके बाद 36 घंटे निर्जला।
  3. षष्ठी — दिन: प्रसाद-निर्माण — ठेकुआ (गेहूँ-आटा-गुड़/चीनी-घी, साँचे से, आम की लकड़ी पर), कसार (चावल-आटा-गुड़ के लड्डू), चावल के लड्डू; सूप-दउरा (बाँस की टोकरी) सजाना — गन्ना (5/7, पत्ते-सहित), नारियल (जटा-सहित), डाभ (हरा नारियल), नींबू (बड़ा — डाभ-नींबू), केला (घौद), सेब-संतरा-अमरूद-शरीफ़ा, सिंघाड़ा, हल्दी-अदरक के पौधे, मूली, सुथनी, गन्ने-केले-नींबू के साथ, दीप, पान-सुपारी, कुमकुम-सिंदूर, अरवा चावल, धूप; नए पीले-लाल वस्त्र।
  4. संध्या-अर्घ्य (षष्ठी — सूर्यास्त, ऊपर समय): परिवार सूप-दउरा सिर पर लेकर गीत गाते घाट (नदी/तालाब/घर का कृत्रिम कुंड) पर; व्रती कमर-भर जल में पश्चिम मुख; डूबते सूर्य को दूध-जल से अर्घ्य (सूप हाथ में लेकर, परिवार के लोग बारी-बारी), «ॐ घृणि सूर्याय नमः»/छठ-गीत («केलवा के पात पर…», «काँच ही बाँस के बहँगिया»); दीप जलाकर घाट पर रात; व्रती निर्जला, कुछ रात-भर घाट पर (कोसी-भराई — मन्नत वालों की: मिट्टी के हाथी-कलश-12/24 दीप गन्ने के मंडप में)।
  5. उषा-अर्घ्य (सप्तमी — सूर्योदय, ऊपर समय): भोर में फिर घाट, पूर्व मुख, उगते सूर्य को अर्घ्य; प्रसाद बाँटना (ठेकुआ-फल — माँगने वाला कोई भी, «छठ का प्रसाद» माँगना शुभ); घर लौटकर छठी मैया की पूजा, व्रती का पारण — अदरक-गुड़-जल/ठेकुआ से, फिर भोजन (सादा — कद्दू-भात या खीर); परिवार को प्रसाद, पड़ोस-गाँव।
  6. गर्मी-सावधानी: चैत्र में तापमान 35°+ — 36 घंटे निर्जला में चक्कर/लू का ख़तरा — व्रती छाया में रहें, अत्यंत कमज़ोरी पर जल (देवी क्षमा करती हैं — प्राण पहले); घाट पर पानी की गहराई-फिसलन देखें; बुज़ुर्ग व्रती परिवार साथ।
  7. मन्नत: संतान/रोग-मुक्ति/विवाह की मन्नत पूरी होने पर चैती या कार्तिक छठ; कोसी-भराई (गन्ने का मंडप, मिट्टी का हाथी, 12/24 दीप — संध्या-अर्घ्य के बाद घर व उषा-अर्घ्य पर घाट); दंडवत-यात्रा (घर से घाट तक लेटकर — मन्नत-रीत, स्वास्थ्य देखकर)।
  8. घर पर घाट: नदी न हो तो आँगन/छत पर कृत्रिम कुंड (प्लास्टिक-टब/गड्ढा), पश्चिम-पूर्व खुला हो; सूर्य दिखे — बादल में समय पर अर्घ्य; प्रवासी परिवार (दिल्ली-मुंबई-बेंगलुरु) — छठ-घाट/यमुना/समुद्र-तट/सोसाइटी-कुंड।

पूजा-सामग्री की सूची (checklist)

सूप-दउरा, गन्ना, ठेकुआ-कसार, डाभ-नींबू, मिट्टी का चूल्हा — चैती छठ की सूची (कार्तिक जैसी)।

  • बाँस का सूप (2-4), दउरा/डलिया (टोकरी), मिट्टी का चूल्हा, आम की लकड़ी, पीतल/मिट्टी के बर्तन, केले के पत्ते
  • गन्ना (5-7 पत्ते-सहित), नारियल (जटा), डाभ (हरा नारियल), बड़ा नींबू (डाभ-नींबू), केला (घौद), सेब-संतरा-अमरूद-शरीफ़ा-अनानास, सिंघाड़ा, मूली, सुथनी, हल्दी-अदरक (पौधे-सहित), शकरकंद, पान-सुपारी
  • ठेकुआ: गेहूँ का आटा, गुड़/चीनी, घी, सौंफ, नारियल, साँचा; कसार/लड्डू: चावल का आटा, गुड़; खरना: अरवा चावल, गुड़, दूध, गेहूँ-आटा (रोटी), घी
  • नहाय-खाय: अरवा चावल, चने की दाल, कद्दू/लौकी, सेंधा नमक, घी
  • पूजा: सिंदूर (लंबा — नाक तक, व्रती), कुमकुम, हल्दी, अरवा चावल, धूप-दीप (मिट्टी के दिये, घी/सरसों), कपूर, अगरबत्ती, चंदन, फूल (गेंदा-कमल), मौली, पीला-लाल नया वस्त्र (साड़ी/धोती)
  • अर्घ्य: पीतल/तांबे का लोटा (दूध-जल), सूप में प्रसाद-फल-दीप; कोसी (मन्नत): मिट्टी का हाथी, कलश, 12/24 दिये, गन्ने का मंडप
  • छठ-गीत/कथा; गर्मी: छाता-छाया, ORS (पारण के बाद), पानी परिवार के लिए

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ठेकुआ, कसार, रसियाव-खीर, कद्दू-भात, फल-गन्ना — छठ का प्रसाद

छठ का प्रसाद पूरी शुद्धता से — मिट्टी के चूल्हे/आम की लकड़ी पर, पीतल-मिट्टी के बर्तन, स्नान-शुद्ध वस्त्र में; नहाय-खाय कद्दू-भात, खरना गुड़-खीर-रोटी, अर्घ्य में ठेकुआ-कसार-फल-गन्ना; गर्मी में फल (तरबूज़-खरबूज़ा-अनानास-गन्ना) ज़्यादा; पारण अदरक-गुड़ से।

  • नहाय-खाय: अरवा चावल का भात, चने की दाल, कद्दू (सीताफल)/लौकी की सब्ज़ी सेंधा नमक-घी, आम-टिकोरा (चैत्र)
  • खरना: रसियाव (गुड़-चावल-दूध की खीर — मिट्टी के चूल्हे पर), घी-रोटी, केला; व्रती एकांत में, फिर सबको
  • ठेकुआ (खजूरिया): गेहूँ-आटा + गुड़ का पानी/चीनी + घी + सौंफ-नारियल — साँचे में दबाकर घी में तला; कसार: चावल-आटा + गुड़ के लड्डू; चावल के लड्डू
  • सूप के फल: केला, सेब, संतरा, अमरूद, शरीफ़ा, अनानास, तरबूज़-खरबूज़ा (चैत्र), नारियल, डाभ, डाभ-नींबू, गन्ना, सिंघाड़ा, मूली, सुथनी, शकरकंद, अदरक-हल्दी
  • पारण (उषा-अर्घ्य के बाद): अदरक-गुड़-जल, ठेकुआ, फल; फिर कद्दू-भात/खीर — सादा; गर्मी में नींबू-पानी-ORS
  • नेपाल-तराई: वही ठेकुआ-भुसवा (चावल-गुड़), सेल-रोटी (कुछ घर); झारखंड: ठेकुआ-कसार, अरसा

नियम — क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • चारों दिन क्रम से — नहाय-खाय, खरना (शाम खीर के बाद निर्जला), संध्या-अर्घ्य (सूर्यास्त — ऊपर समय), उषा-अर्घ्य (सूर्योदय)
  • प्रसाद मिट्टी-चूल्हे/आम-लकड़ी पर, पीतल-मिट्टी के बर्तन, शुद्ध वस्त्र; प्याज़-लहसुन घर में नहीं
  • गर्मी में व्रती छाया-विश्राम, कमज़ोरी पर जल (प्राण पहले); घाट पर सुरक्षा-गहराई
  • प्रसाद सबको — माँगने वाले को ठेकुआ; घाट स्वच्छ रखें, कचरा नहीं
  • मन्नत पूरी हो तो कोसी-भराई; पहली बार रखने वाली को अनुभवी व्रती का साथ

❌ क्या न करें

  • अर्घ्य सूर्यास्त/सूर्योदय के समय से हटकर; बादल में समय पर ही दिशा में अर्घ्य
  • खरना के बाद जल-अन्न (कठोर), पर लू-चक्कर-गर्भावस्था में व्रत तोड़ना पाप नहीं — देवी माँ हैं
  • प्रसाद/सूप को जूठे हाथ, चमड़े की चीज़ (बेल्ट-पर्स) घाट पर, प्लास्टिक-थर्मोकोल, नदी में तेल-प्लास्टिक
  • घाट पर शोर-नशा-पटाखे; व्रती को खरना-प्रसाद के समय आवाज़ देना
  • बिना तैयारी 36 घंटे निर्जला — हृदय-रोगी-मधुमेही डॉक्टर से पूछें; कार्तिक की तरह ही कठोर

व्रत-कथा

राजा प्रियव्रत व रानी मालिनी निःसंतान थे; कश्यप ऋषि के यज्ञ से पुत्र हुआ पर मृत जन्मा; राजा शोक में प्राण देने चले, तब आकाश से देवी षष्ठी प्रकट हुईं — «मैं ब्रह्मा की मानस-पुत्री षष्ठी, संतान की रक्षिका; जो मेरी पूजा करे… पूरी कथा पढ़ें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चैती छठ {Y} में कब है — चारों दिन?

ऊपर इस साल के चारों दिन हैं — नहाय-खाय (चैत्र शुक्ल चतुर्थी), खरना (पंचमी), संध्या-अर्घ्य (षष्ठी — मुख्य), उषा-अर्घ्य (सप्तमी); चैत्र नवरात्रि के चौथे-सातवें दिन, राम नवमी से पहले; सूर्यास्त-सूर्योदय दिल्ली के — अपने शहर का पंचांग देखें।

चैती छठ और कार्तिक छठ में अंतर?

विधि-प्रसाद-कठोरता एक — दोनों शुक्ल षष्ठी की सूर्य-छठी मैया पूजा, चार दिन; कार्तिक की (दीवाली के 6 दिन बाद, अक्टूबर-नवंबर) मुख्य व विशाल (बिहार-झारखंड में छुट्टी, लाखों घाट पर), चैती (मार्च-अप्रैल) साल की पहली — मन्नत वाले/दोनों रखने वाले; चैत्र में गर्मी — निर्जला अधिक कठिन।

क्या पहली बार चैती छठ से शुरू कर सकते हैं?

हाँ — किसी भी छठ से आरंभ हो सकता है (प्रायः मन्नत पूरी होने या घर की परंपरा से); एक बार शुरू करने पर हर साल (कम-से-कम कार्तिक) रखने की रीत, बीच में न छोड़ें — न रख सकें तो परिवार की कोई और व्रती या ब्राह्मण/पड़ोसी से करवाना; पहली बार अनुभवी व्रती की सहायता लें।

गर्मी में 36 घंटे निर्जला कैसे?

खरना की खीर पेट-भर, रात आराम; अर्घ्य-दिन छाया-हवादार जगह, बात कम, घाट पर पानी में खड़े रहना ठंडक देता है; चक्कर-उल्टी-बेहोशी के लक्षण पर तुरंत जल-ORS — व्रत खंडित नहीं माना जाता (आपद्-धर्म); गर्भवती/हृदय-रोगी/मधुमेही न रखें — परिवार की दूसरी स्त्री रखे; उषा-अर्घ्य के बाद पारण धीरे (अदरक-गुड़-जल पहले)।

छठी मैया कौन हैं?

षष्ठी देवी — ब्रह्मा की मानस-पुत्री, सूर्य की बहन (लोक), नवजात की छठी की देवी (जन्म के छठे दिन पूजा) — संतान-रक्षिका; कात्यायनी (नवरात्रि की छठी देवी) से भी जोड़ते हैं; कोई मूर्ति नहीं — सूर्य-जल-अन्न में पूजा; दक्षिण में स्कंद-माता/षष्ठी, बंगाल में «षष्ठी ठाकुरन»।

नदी न हो तो घर पर छठ कैसे?

छत/आँगन में कृत्रिम कुंड (टब/गड्ढा जिसमें कमर या घुटने-भर पानी), पूर्व-पश्चिम खुला; सूप-दउरा वहीं, सूर्यास्त-सूर्योदय पर अर्घ्य; सोसाइटी-कुंड/छठ-समिति के घाट पर भी; भाव व समय मुख्य — स्थान गौण।

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